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‘हुजूर हम जिंदा हैं! इसका प्रमाण दे दीजिए’
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ट्रेजरी कार्यालय पर जिवित प्रमाण पत्र जमा करने के लिए लगी भीड़।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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‘हुजूर हम जिंदा हैं! इसका प्रमाण दे दीजिए’
सिद्धार्थनगर। जिले में मौत का प्रमाण भले ही आपको आसानी से मिल जाए। लेकिन बुजुर्गों को पेंशन के लिए जिंदा होने का प्रमाण पत्र बनवाना जरूर मुश्किल हो रहा है। इसके लिए बुजुर्ग विभाग का चक्कर लगाकर हलाकान हो रहे हैं। जबकि अशक्त पेंशनर्स के लिए कर्मचारी को घर भेजकर सत्यापन कराने के अलावा वीडियो कॉलिंग के जरिए भी सिस्टम में सत्यापन की सुविधा मुहैया कराने की व्यवस्था हैर।
पेंशन के लिए कई ऐसे बुजुर्ग है जो टेंपो के जरिए या फिर दूसरों के सहारे कोषागार कार्यालय पहुंच रहे हैं। ऐसे बुजुर्गों की संख्या एक नहीं है, बल्कि सात हजार है जो सालों साल विभाग के चक्कर लगाते हैं। इसके बाद भी जिम्मेदारों की नजर नहीं पड़ती है। जीवित होने का प्रमाण पत्र देने के लिए पेंशनर्स को कई बार घंटों कोषागार कार्यालय में कतार लगानी पड़ती है। इसके बाद किसी तरह सत्यापन होता है। दो केस तो मात्र बानगी है, ऐसे सैकड़ों पेंशनधारक प्रतिदिन सत्यापन के लिए कोषागार में आने के लिए मजबूर है। डुमरियागंज के रामफेर (85) साल ने बताया कि कई बार ऐसी स्थिति हुई है कि आने की इच्छा नहीं हुई है, लेकिन बुढ़ापे में पेंशन ही सहारा है, ऐसे में मजबूरी में टेंपो या फिर अन्य गाड़ियां करके कोषागार आना पड़ता है।
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केस-1
25 सालों से खुद ही आ रही पेंशन के लिए
जोगिया के टड़िया निवासी विद्या देवी (83) ने बताया कि पिछले 25 सालों से खुद ही पेंशन के लिए सत्यापन कराती आई हूं। कई बार बीमार होने पर भी कोषागार कार्यालय खुद ही आना पड़ा। कभी विभाग से कोई नहीं गया। अगर घर बैठे सत्यान की व्यवस्था मिलती है तो काफी राहत मिल जाएगी।
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केस-दो
बीमार होने के बाद भी आना पड़ता है पेंशन के लिए
शोहरतगढ़ के परसिया ब्लॉक की रहने वाली सुशीला देवी (65) ने बताया कि पिछले तीन सालों से पेंशन के लिए कोषागार का चक्कर लगाना पड़ता है। कई बार बीमार भी हुई, लेकिन खुद ही पेंशन के लिए आना पड़ा। कभी बेटों के साथ आती हूं तो किसी और के साथ आ जाती हूं।
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वीडियो कॉलिंग के जरिए हो रहा सत्यापन
वरिष्ठ कोषाधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि जीवित होने का प्रमाण पत्र कभी भी दिया जा सकता है। जो कोषागार आने में असमर्थ है उनका वीडियो कॉलिंग के जरिए सत्यापन कराने की व्यवस्था है। अब तक 80 से 85 अशक्त पेंशनधारकों का वीडियो कॉलिंग और घर भेजकर सत्यापन कराया जा चुका है। जो बेहद बीमार है वह वीडियो कॉलिंग कर सत्यापन करा सकते है।
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सिद्धार्थनगर। जिले में मौत का प्रमाण भले ही आपको आसानी से मिल जाए। लेकिन बुजुर्गों को पेंशन के लिए जिंदा होने का प्रमाण पत्र बनवाना जरूर मुश्किल हो रहा है। इसके लिए बुजुर्ग विभाग का चक्कर लगाकर हलाकान हो रहे हैं। जबकि अशक्त पेंशनर्स के लिए कर्मचारी को घर भेजकर सत्यापन कराने के अलावा वीडियो कॉलिंग के जरिए भी सिस्टम में सत्यापन की सुविधा मुहैया कराने की व्यवस्था हैर।
पेंशन के लिए कई ऐसे बुजुर्ग है जो टेंपो के जरिए या फिर दूसरों के सहारे कोषागार कार्यालय पहुंच रहे हैं। ऐसे बुजुर्गों की संख्या एक नहीं है, बल्कि सात हजार है जो सालों साल विभाग के चक्कर लगाते हैं। इसके बाद भी जिम्मेदारों की नजर नहीं पड़ती है। जीवित होने का प्रमाण पत्र देने के लिए पेंशनर्स को कई बार घंटों कोषागार कार्यालय में कतार लगानी पड़ती है। इसके बाद किसी तरह सत्यापन होता है। दो केस तो मात्र बानगी है, ऐसे सैकड़ों पेंशनधारक प्रतिदिन सत्यापन के लिए कोषागार में आने के लिए मजबूर है। डुमरियागंज के रामफेर (85) साल ने बताया कि कई बार ऐसी स्थिति हुई है कि आने की इच्छा नहीं हुई है, लेकिन बुढ़ापे में पेंशन ही सहारा है, ऐसे में मजबूरी में टेंपो या फिर अन्य गाड़ियां करके कोषागार आना पड़ता है।
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केस-1
25 सालों से खुद ही आ रही पेंशन के लिए
जोगिया के टड़िया निवासी विद्या देवी (83) ने बताया कि पिछले 25 सालों से खुद ही पेंशन के लिए सत्यापन कराती आई हूं। कई बार बीमार होने पर भी कोषागार कार्यालय खुद ही आना पड़ा। कभी विभाग से कोई नहीं गया। अगर घर बैठे सत्यान की व्यवस्था मिलती है तो काफी राहत मिल जाएगी।
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केस-दो
बीमार होने के बाद भी आना पड़ता है पेंशन के लिए
शोहरतगढ़ के परसिया ब्लॉक की रहने वाली सुशीला देवी (65) ने बताया कि पिछले तीन सालों से पेंशन के लिए कोषागार का चक्कर लगाना पड़ता है। कई बार बीमार भी हुई, लेकिन खुद ही पेंशन के लिए आना पड़ा। कभी बेटों के साथ आती हूं तो किसी और के साथ आ जाती हूं।
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वीडियो कॉलिंग के जरिए हो रहा सत्यापन
वरिष्ठ कोषाधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि जीवित होने का प्रमाण पत्र कभी भी दिया जा सकता है। जो कोषागार आने में असमर्थ है उनका वीडियो कॉलिंग के जरिए सत्यापन कराने की व्यवस्था है। अब तक 80 से 85 अशक्त पेंशनधारकों का वीडियो कॉलिंग और घर भेजकर सत्यापन कराया जा चुका है। जो बेहद बीमार है वह वीडियो कॉलिंग कर सत्यापन करा सकते है।