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Siddharthnagar News: बाॅर्डर पर क्वारंटीन के फेर में फंसे ट्रक, ट्रांसपोर्टर परेशान

Sat, 05 Sep 2026 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sat, 05 Sep 2026 03:00 AM IST
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Trucks stranded at the border due to quarantine, causing distress to transporters
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। बढ़नी सीमा पर नेपाल सरकार की ओर से कई खाद्य वस्तुओं के लिए क्वारंटीन प्रक्रिया अनिवार्य किए जाने और नेपाल नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (एनएसडब्ल्यूएस) से ऑनलाइन परमिट लेने की व्यवस्था लागू होने के बाद सीमा पर ट्रकों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
पहले जहां भारतीय सीमा पर मालवाहक ट्रकों की लंबी कतारें नजर आती थीं, वहीं अब हालात बदले हुए दिख रहे हैं। आलू, प्याज और कोयला जैसे जरूरी सामान तो निकल रहे हैं, लेकिन पपीता, केला, नींबू समेत कई उत्पादों की निकासी अटकने लगी है।
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व्यापारियों का कहना है कि नई डिजिटल प्रक्रिया, क्वारंटीन जांच और ऑनलाइन अनुमति में लग रहे समय के कारण माल की क्लीयरेंस धीमी हो गई है। कई खाद्य वस्तुओं को क्वारंटीन प्रक्रिया पूरी किए बिना नेपाल में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।
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भारतीय कस्टम से जुड़े सूत्रों के अनुसार करीब एक माह पहले तक बढ़नी बॉर्डर से प्रतिदिन छोटे-बड़े मिलाकर 110 से 115 मालवाहक वाहन नेपाल जाते थे। अब यह संख्या घटकर लगभग 93 से 99 के बीच रह गई है। सीमा पर खड़े ट्रकों की संख्या कम जरूर दिख रही है, लेकिन इसका कारण सामान्य कारोबार नहीं बल्कि बदली हुई कस्टम, क्वारंटीन और डिजिटल परमिट व्यवस्था मानी जा रही है।
भारतीय कस्टम एजेंट सतीश शर्मा ने बताया कि पपीता, नींबू और कुछ अन्य खाद्य वस्तुओं के लिए क्वारंटीन और परमिट संबंधी प्रक्रिया सख्त कर दी गई है। ऐसे में इस तरह के उत्पाद आसानी से क्लियर नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि आलू, प्याज, सब्जी और अन्य जरूरी खाद्य सामग्री को ज्यादा देर तक नहीं रोका जा रहा।
बढ़नी के थोक व्यवसायी हिमांशु कंछल का कहना है कि सीमा क्षेत्र के फुटकर व्यापारियों की बिक्री घटने का सीधा असर थोक कारोबार पर पड़ा है। उनके मुताबिक कारोबार में लगभग 50 प्रतिशत तक गिरावट महसूस की जा रही है। व्यापारियों का मानना है कि यदि नियमों और परमिट प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो सीमावर्ती बाजारों में मंदी और गहरा सकती है।

सीमा पर खड़े ट्रक चालकों की चिंता भी अलग है। कोयला लेकर पहुंचे चालक सुरेश ने बताया कि वह बृहस्पतिवार को पहुंचे हैं और उम्मीद है कि शाम तक कस्टम व परमिट प्रक्रिया पूरी होने के बाद नेपाल में प्रवेश मिल जाएगा। वहीं, कानपुर से आलू-प्याज लेकर पहुंचे चालक अखिलेश ने कहा कि जल्दी खराब होने वाले माल को प्राथमिकता जरूर मिलती है।
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