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अब गांवों में प्लास्टिक अपशिष्ट का होगा निस्तारण
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गांवों में ही होगा अपशिष्ट का निस्तारण
प्रत्येक गांव में बनेगा कचरा एकत्रीकरण केंद्र
इसके लिए दस हजार खर्च करने का है नियम
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। अब गांवों में भी प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक गांव में कचरा एकत्रीकरण केंद्र बनाया जाएगा। इसके लिए गांवों में भूमि का चयन करके गड्ढे का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक गांव में राज्य अथवा केंद्रीय आयोग के बजट से अधिकतम दस हजार रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है। सफाईकर्मी या मजदूर घरों से प्लास्टिक अपशिष्ट संकलित करके एकत्रीकरण केंद्र तक ले जाएंगे। केंद्र पर एकत्र हो जाने के बाद उसका निस्तारण किया जाएगा।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के मिशन निदेशक किंजल सिंह ने इस संबंध मेें दिशा-निर्देश जारी किया है। बताया गया है कि घरों में प्रयुक्त होने के बाद प्लास्टिक अपशिष्ट को एकत्र कर उसे बोरों अथवा अन्य थैलों में भरकर एकत्रीकरण केंद्र में जमा कराना है। यह कार्य सफाईकर्मी और मजदूर करेंगे। एकत्रीकरण केंद्र का निर्माण प्रत्येक गांव में भूमि का चयन करके अधिकतम 10 हजार की लागत से किया जाना है। ये रुपये गांव में आए राज्य अथवा केंद्र सरकार से मिले बजट से खर्च होंगे। गांवों में उपयोग के बाद प्लास्टिक घरों के आसपास फेंक दिए जाते हैं। इससे गांवों में गंदगी के साथ प्रदूषण बढ़ता है। अब सरकार ने इसके निस्तारण का प्रबंधन का नियम बनाया है। इस प्लास्टिक के कचरे को एकत्र कर केंद्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। यदि गांव में सफाईकर्मी से अकेले यह कार्य संभव नहीं हो पाएगा तो मजदूर की व्यवस्था भी करनी होगी। डीपीआरओ आदर्श ने बताया कि सफाईकर्मी प्लास्टिक अपशिष्ट को एकत्रीकरण केंद्र तक ले जाएंगे और जरूरत पड़ी तो अतिरिक्त मजदूर भी रखे जा सकेंगे।
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प्रत्येक गांव में बनेगा कचरा एकत्रीकरण केंद्र
इसके लिए दस हजार खर्च करने का है नियम
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। अब गांवों में भी प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक गांव में कचरा एकत्रीकरण केंद्र बनाया जाएगा। इसके लिए गांवों में भूमि का चयन करके गड्ढे का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक गांव में राज्य अथवा केंद्रीय आयोग के बजट से अधिकतम दस हजार रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है। सफाईकर्मी या मजदूर घरों से प्लास्टिक अपशिष्ट संकलित करके एकत्रीकरण केंद्र तक ले जाएंगे। केंद्र पर एकत्र हो जाने के बाद उसका निस्तारण किया जाएगा।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के मिशन निदेशक किंजल सिंह ने इस संबंध मेें दिशा-निर्देश जारी किया है। बताया गया है कि घरों में प्रयुक्त होने के बाद प्लास्टिक अपशिष्ट को एकत्र कर उसे बोरों अथवा अन्य थैलों में भरकर एकत्रीकरण केंद्र में जमा कराना है। यह कार्य सफाईकर्मी और मजदूर करेंगे। एकत्रीकरण केंद्र का निर्माण प्रत्येक गांव में भूमि का चयन करके अधिकतम 10 हजार की लागत से किया जाना है। ये रुपये गांव में आए राज्य अथवा केंद्र सरकार से मिले बजट से खर्च होंगे। गांवों में उपयोग के बाद प्लास्टिक घरों के आसपास फेंक दिए जाते हैं। इससे गांवों में गंदगी के साथ प्रदूषण बढ़ता है। अब सरकार ने इसके निस्तारण का प्रबंधन का नियम बनाया है। इस प्लास्टिक के कचरे को एकत्र कर केंद्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। यदि गांव में सफाईकर्मी से अकेले यह कार्य संभव नहीं हो पाएगा तो मजदूर की व्यवस्था भी करनी होगी। डीपीआरओ आदर्श ने बताया कि सफाईकर्मी प्लास्टिक अपशिष्ट को एकत्रीकरण केंद्र तक ले जाएंगे और जरूरत पड़ी तो अतिरिक्त मजदूर भी रखे जा सकेंगे।
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