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विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने वाला संस्थान नहीं : कुलपति

Fri, 16 Sep 2022 12:21 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 16 Sep 2022 12:21 AM IST
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University is not the only degree distributing institution: Vice Chancellor
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में छात्र-छात्राओं को संबोधित करते कुलपति प्रो. हरि बहादुर श? - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने वाला संस्थान नहीं : कुलपति
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कला संकाय में हुआ परिचयात्मक कार्यक्रम
शिक्षकों ने बताई विश्वविद्यालय की खूबियां
सिद्धार्थनगर। विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने का संस्थान नहीं है, बल्कि यहां से युवाओं का व्यक्तित्व निर्माण होना चाहिए। निरंतर प्रयास अधिकतम सफलता का आधार है। सतत प्रयास कठिन से कठिन उद्देश्यों की प्राप्ति सहज बना देती है। इसके लिए धैर्य महत्वपूर्ण है। पुस्तकों का अनवरत अध्ययन सही अर्थों में विद्या है।
ये बातें सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में बृहस्पतिवार को बीए एवं एमए के नवागत छात्र-छात्राओं के परिचयात्मक कार्यक्रम में कुलपति प्रोफेसर हरि बहादुर श्रीवास्तव ने कहीं। उन्होंने कहा कि केवल किताबी ज्ञान ही आवश्यक नहीं है, बल्कि व्यक्तित्व के अन्य आयामों के लिए भी सतत प्रयत्नशील रहना चाहिए। आज के आधुनिक दौर में प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए गहन अध्ययन और कठोर परिश्रम आवश्यक है।
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उन्होंने कहा कि किसी संस्थान का विद्यार्थी जितनी ही ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा, वह संस्थान भी उसी अनुपात में उन्नति की ओर अग्रसर होगा। अच्छे विद्यार्थी की अलग पहचान उसके ज्ञान के साथ-साथ आचरण से स्पष्ट होती है। शिक्षकों को भी अधिक से अधिक समय विद्यार्थियों के साथ रहना चाहिए। विद्यार्थियों को भी शिक्षकों के ज्ञान का भरपूर सदुपयोग करना चाहिए।
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अधिष्ठाता विज्ञान संकाय देवेश कुमार ने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान का भंडार होता है। विश्वविद्यालय केवल परंपरागत अध्ययन अध्यापन के लिए नहीं होता, बल्कि उसकी उपादेयता शोध के वातावरण को सृजित कर शोध के क्षेत्र के विभिन्न आयामों को निर्मित करना होता है। कुलानुशासक प्रोफेसर दीपक बाबू ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का होना अनिवार्य होता है। उत्तम आचरण और श्रेष्ठ संस्कार विद्यार्थी की वास्तविक पहचान होती है।
अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. हरीश कुमार शर्मा ने कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालय उत्तम और उत्कृष्ट संस्थान होता है। लगन और परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही विद्यार्थी के भविष्य का निर्धारण करती है। संवाद से समस्या का समाधान कर चुनौतियों से निपटा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन में कर्म समर्पण और तपस्या आगे बढ़ने की अनिवार्य कड़ी मानी जाती है, प्रयास और परिश्रम हमेशा शुभ होता है। इसीलिए विद्यार्थियों को प्रथम दिन से उत्तम विद्यार्थी के साथ-साथ उत्तम नागरिक बनने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए। कार्यक्रम में डॉ. सच्चिदानंद चौबे, डॉ. सुनीता त्रिपाठी, डॉ. सत्येंद्र दुबे, डॉ. नीता यादव, डॉ. प्रज्ञेश त्रिपाठी, डॉ. अविनाश प्रताप सिंह, डॉ. अब्दुल हफीज, डॉ. रेनू त्रिपाठी मौजूद रहीं।
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