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Siddharthnagar News: बाढ़ से बचाव की व्यवस्था परखने उतरीं दो टीमें

Fri, 05 Jun 2026 01:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 05 Jun 2026 01:47 AM IST
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Two teams came to examine the flood protection system
सिद्धार्थनगर। बाढ़ प्रभावित इस जिले में बांधों के मरम्मत और कटान स्थलों पर बचाव कार्य में लापरवाही संबंधी खबरों का संज्ञान लेते हुए जिला और शासन स्तर से जांच शुरू हुई है। बृहस्पतिवार को शासन की दो सदस्यीय टीम ने सिंचाई विभाग की ओर इस वर्ष 47 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए 14 परियोजनाओं की जांच शुरू की।
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वहीं, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन की ओर से गठित तीन सदस्यीय टीम ने बुधवार को तीन कटान स्थलों की जांच और निरीक्षण किया है। यह दोनों टीमें बाढ़ बचाव कार्यों के गुणवत्ता की टेक्निकल जांच के साथ ही स्थायित्व की भी जांच करेंगी।
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राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा, घोघी व बानगंगा नदियों किनारे बने 454 किमी लंबे 39 बांधों एवं 50 से अधिक अति संवेदनशील कटान स्थलों पर पर्याप्त मरम्मत व बचाव कार्य नहीं कराए गए हैं, जिससे हर वर्ष की तरह बारिश के मौसम में बाढ़ आने पर तबाही मचने का खतरा मंडराने लगा है। इसको लेकर अमर उजाला ने लगातार खबरें प्रकाशित की।
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इसको संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने एनएचएआई के अधिशासी अभियंता आरके वर्मा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच का निर्देश दिए हैं। अधिशासी अभियंता आरके वर्मा व जांच टीम के सदस्य एनएच के ही एई बीबी सिंह और डीसी एनआरएलएम डीएन दुबे ने बुधवार को नदी किनारे स्थित कटान स्थल गुजरौलिया, मस्जिदिया व इमिलिहा का निरीक्षण किया। उन्होंने यहां कराए गए कार्यों की जांच करते हुए भौतिक सत्यापन किया।
वहीं, बृहस्पतिवार को शासन की टीम में शामिल सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता डीके सिंह और मुख्य अभियंता उपेंद्र नाथ कुंवर ने भी ड्रेनेज खंड की परियोजनाओं की जांच शुरू की। इस दौरान अधिशासी अभियंता कृपाशंकर भारती, जेई राधेश्याम भारती व सियाराम मौजूद रहे।
यह टीम ड्रेनेज खंड व सिंचाई निर्माण खंड की वर्तमान में संचालित सभी परियोजनाओं की जांच करेगी। जिले के दो तिहाई हिस्सा रहता है बाढ़ की चपेट में : नदियों व प्राकृतिक पहाड़ी नालों से घिरे इस जिले का दो तिहाई हिस्सा बाढ़ से प्रभावित रहता है। जिले के 2300 से अधिक गांवों में 1600 से अधिक गांव बाढ़ प्रभावित होते है।
वहीं, तीन लाख हेक्टेयर में डेढ़ लाख हेक्टर भूमि भी बाढ़ के पानी से डूबा रहता है। बारिश के मौसम में एक तरफ जहां बाढ़ के पानी से सड़कें, गांव जलमग्न रहते हैं। वहीं, दूसरी तरफ पानी की तेज धार से कटान के चलते लोगों के घर नदी में विलीन हो जाते हैं। बाढ़ की तबाही बचाव व सुरक्षा के लिए सिंचाई विभाग की तरफ से बांधों का मरम्मत और कटान स्थलों पर बचाव कार्य संबंधी कार्य कराए जाते है। इसके बाद भी बाढ़ आने पर तबाही मचती है।

इस वर्ष भी कटान स्थलों पर बोल्डर पिचिंग, कटर आदि निर्माण करते हुए कटाव निरोधक कार्य कराए गए है। फिलहाल में बाढ़ में ही पता चलेगा कि इन कार्यों के होने से लोगों को कितनी सुरक्षा हो सकी।
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