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बाग में तीन परिवार ने ली शरण, दो दिन से नहाए नहीं

Sat, 30 Apr 2022 11:06 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 30 Apr 2022 11:06 PM IST
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Three families took refuge in the garden, did not bathe for two days
बाग में तीन परिवार ने ली शरण, दो दिन से नहाए नहीं
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पथरा। डिड़ई क्षेत्र के कर्महिया गांव में आग लगने से घर जलने के बाद तीन परिवार बाग में पेड़ों की छांव में शरण लेने के लिए विवश हो गए हैं। तीन भाइयों के कुनबे में बच्चों सहित 22 लोग हैं, जिन्हें न रहने, खाने का ठिकाना है और न ही कुछ पहनने के लिए बचा है। उनके पास ऐसी भी व्यवस्था नहीं है कि छांव के लिए पन्नी तान सकें। कपड़े के अभाव में वे दो दिनों से नहा नहीं सके। राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी रिपोर्ट बनाकर चले गए हैं, लेकिन यह पता नहीं है कि इस बड़े जख्म पर मरहम के लिए सरकारी सहायता कब मिलेगी।
कर्महिया गांव में फूलचंद, हरिश्चंद एवं इंद्रजीत का परिवार फूस के घर में रहता था। बृहस्पतिवार की रात में आग लगी तो उनके घर में कुछ नहीं बचा। शनिवार को गांव में पीड़ित मीना देवी फफक पड़ीं। उन्होंने कहा कि बच्चों को खिलाने के लिए घर में कुछ नहीं है। गांव के लोग रोटी दे रहे हैं तो किसी तरह उनकी भूख मिट रही है।
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रिश्तेदारों की शादी में शामिल होने के लिए उन्होंने नए कपड़े खरीदे थे, सब कुछ राख हो गया। एक कपड़ा नहीं है। लगता है कि न नहाने के कारण तबीयत खराब हो सकती है, लेकिन क्या करें, एक भी कपड़ा नहीं है। आरोप लगाया कि प्रधान और कोटेदार ने भी कोई मदद नहीं दी। हरिश्चंद बताते हैं कि आग में दो भैंस और छह बकरियां जलकर मर गईं। झुलसी हुई दो भैंस का इलाज करने पशु चिकित्सक आए थे, उन्होंने रुपये नहीं मांगे। अनिल ने कहा कि भूसा जल गया है। समझ में नहीं आ रहा है कि भैंस को क्या खिलाया जाए।
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आवास मिला होता तो नहीं होती तबाही
फूलचंद का दर्द है कि उनके तीनों भाई सरकारी आवास के पात्र हैं। यदि आवास मिला होता तो आग से यह तबाही नहीं होती। झोपड़ी थी, जली तो उनका सब कुछ बर्बाद हो गया है। किसी भी भाई को सरकारी सुविधा से शौचालय नहीं मिला है। उनकी चिंता है कि उनकी जिंदगी पटरी पर कैसे आएगी।

रोते बच्चों ने कहा, जल गईं किताबें
भीषण गर्मी में परिवार के जिम्मेदारों की गृहस्थी चलाने की चिंता है तो किताबें जल जाने के कारण बच्चों की आंखों में आंसू आ रहे हैं। अनिल ने कहा कि कोई सरकारी मदद नहीं मिली। चुनाव था तो मदद करने वाले नेता बहुत आते थे। उनके घर अब तक कोई नहीं आया। इसी बीच कक्षा पांच में पढ़ने वाला सूरज और उसकी बहन रंगीता ने रोते हुए किताबें जलने की जानकारी दी। इंद्रजीत ने बताया कि उनकी बेटी निशा, बेटे अंकित, मनीष चौरसिया की किताबें जल गई हैं। उनका कुनबा कई साल पीछे चला गया, बच्चे नहीं पढ़ेंगे तो आगे क्या होगा?
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