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Siddharthnagar News: थाने में खड़ी एंबुलेंस देखकर रो पड़ी पीड़िता
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संवाद न्यूज एजेंसी
सकारपार। 29 अगस्त को पति का इलाज कराकर लखनऊ से घर लौट रही महिला के साथ एंबुलेंस में दुष्कर्म की कोशिश के बाद पीड़िता के पति की मौत हो गई थी। इसके बाद पीड़िता ने लखनऊ के गाजीपुर कोतवाली में तहरीर देकर एंबुलेंस ड्राइवर एवं उसके सहयोगी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। कोर्ट में बयान देने के दौरान वह थाने गई थी। जहां उसकी नजर कोतवाली में खड़ी एंबुलेंस पर पड़ी, जिसमें उसके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की गई। उसके साथ बीमार पति को नीचे उतार दिया गया था। उस एंबुलेंस को देखते ही पीड़िता जोर-जोर से चिल्लाने लगी। इहै तो एंबुलेंसवा रहल, कहते हुए फूट-फूट कर रोने लगी।
कुछ देर तक पीड़िता वही, सदमे की हालत में हो गई। बाद में पीड़िता का भाई किसी तरह बहन को पकड़ कर दूर ले गया। पीड़िता ने बताया कि 29 अगस्त की रात की दरिंदगी की घटना को सोचकर आज भी एंबुलेंस शब्द कान में पढ़ते ही रूह कांप उठती है। उसने कहा कि ईश्वर करे किसी को एंबुलेंस से न आना-जाना पड़े। दिन तो किसी तरह बीत जाता है, लेकिन रात को सोते वक्त अक्सर एंबुलेंस में दुष्कर्म की कोशिश की घटनाक्रम कानों में गूंजती रहती है। इसके बाद पूरी रात नींद नहीं आती है।
पीड़िता के अनुसार पीड़िता एवं उसका भाई बिना कुछ खाए-पिये सुबह ही घर से लखनऊ के लिए निकल गए थे। पीड़िता का कहना है कि लखनऊ के गाजीपुर कोतवाली में न तो हम लोगों को जलपान करवाया गया और न ही खाना खाने के लिए कहा गया। पुलिस हमको बयान दिलवाने सीधे कोर्ट ले गई। जहां पूरा दिन भूखे रह जाना पड़ा। वहीं, पीड़िता ने आरोप लगाते हुए कहा कि यदि छावनी पुलिस हमारी एफआईआर दर्ज कर ली होती तो मुझे बयान देने के लिए इतनी दूर लखनऊ नहीं जाना पड़ता। इस हालत में भागदौड़ से थोड़ी राहत मिलती है।
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साथ ही आने जाने में आर्थिक व्यय कम खर्च होता, लेकिन उनकी लापरवाही का नतीजा अधिक पैसे खर्च करके मुझे लखनऊ तक भाग दौड़ करनी पड़ रही है।
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सकारपार। 29 अगस्त को पति का इलाज कराकर लखनऊ से घर लौट रही महिला के साथ एंबुलेंस में दुष्कर्म की कोशिश के बाद पीड़िता के पति की मौत हो गई थी। इसके बाद पीड़िता ने लखनऊ के गाजीपुर कोतवाली में तहरीर देकर एंबुलेंस ड्राइवर एवं उसके सहयोगी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। कोर्ट में बयान देने के दौरान वह थाने गई थी। जहां उसकी नजर कोतवाली में खड़ी एंबुलेंस पर पड़ी, जिसमें उसके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की गई। उसके साथ बीमार पति को नीचे उतार दिया गया था। उस एंबुलेंस को देखते ही पीड़िता जोर-जोर से चिल्लाने लगी। इहै तो एंबुलेंसवा रहल, कहते हुए फूट-फूट कर रोने लगी।
कुछ देर तक पीड़िता वही, सदमे की हालत में हो गई। बाद में पीड़िता का भाई किसी तरह बहन को पकड़ कर दूर ले गया। पीड़िता ने बताया कि 29 अगस्त की रात की दरिंदगी की घटना को सोचकर आज भी एंबुलेंस शब्द कान में पढ़ते ही रूह कांप उठती है। उसने कहा कि ईश्वर करे किसी को एंबुलेंस से न आना-जाना पड़े। दिन तो किसी तरह बीत जाता है, लेकिन रात को सोते वक्त अक्सर एंबुलेंस में दुष्कर्म की कोशिश की घटनाक्रम कानों में गूंजती रहती है। इसके बाद पूरी रात नींद नहीं आती है।
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पीड़िता के अनुसार पीड़िता एवं उसका भाई बिना कुछ खाए-पिये सुबह ही घर से लखनऊ के लिए निकल गए थे। पीड़िता का कहना है कि लखनऊ के गाजीपुर कोतवाली में न तो हम लोगों को जलपान करवाया गया और न ही खाना खाने के लिए कहा गया। पुलिस हमको बयान दिलवाने सीधे कोर्ट ले गई। जहां पूरा दिन भूखे रह जाना पड़ा। वहीं, पीड़िता ने आरोप लगाते हुए कहा कि यदि छावनी पुलिस हमारी एफआईआर दर्ज कर ली होती तो मुझे बयान देने के लिए इतनी दूर लखनऊ नहीं जाना पड़ता। इस हालत में भागदौड़ से थोड़ी राहत मिलती है।
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साथ ही आने जाने में आर्थिक व्यय कम खर्च होता, लेकिन उनकी लापरवाही का नतीजा अधिक पैसे खर्च करके मुझे लखनऊ तक भाग दौड़ करनी पड़ रही है।