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Siddharthnagar News: हाईवे निर्माण की रफ्तार सुस्त...सता रहे गड्ढे और गुबार
Wed, 22 Apr 2026 02:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 22 Apr 2026 02:34 AM IST
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उसका क्षेत्र में निर्माणधीन बाईपास पर डाली गई गिट्टी।
सिद्धार्थनगर। शहर से उसका होते हुए फरेंदा और गोरखपुर तक जाने के लिए लोगों को अभी हिचकोले खाते हुए सफर करना पड़ेगा। साथ ही सड़क के गड्ढों के बीच उड़ते गुबार के बीच से उनका सफर पूरा होगा।
पांच सौ करोड़ की लागत से एनएच-730 पर उसका से शहर होते हुए शोहरतगढ़ तक 32 किमी सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। मगर काम की रफ्तार शुरुआत से ही धीमी होने से समय सीमा तीसरी बार भी बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया। अब मई 2026 तक नई समय सीमा निर्धारित की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह काम की रफ्तार है, उससे समय सीमा बीतने के बाद भी काम पूरा होने की संभावना नहीं नजर आ रही है।
एनएच-730 पर महराजगंज की सीमा से उसका बाजार से शहर होते हुए शोहरतगढ़ तक 32 किमी सड़क निर्माण के लिए चार वर्ष पहले बजट स्वीकृत हुआ था। इसके योजना के तहत सड़क को 10 मीटर चौड़ा करने के साथ ही उसका बाजार में आठ किमी और चिल्हिया में 2.5 किमी लंबे बाईपास का भी निर्माण होना था।
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मगर, दो वर्ष की देर के बाद शुरू हुए निर्माण की धीमी गति से काम के समय से पूर्ण नहीं हो पाया। पूर्व में निर्धारित समय सितंबर 2025 तक सड़क निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ तो कार्यदायी संस्था ने समय सीमा बढ़ाने की मांग की, जिस पर उसे फरवरी 2026 तक समय दिया गया था। मगर यह समय सीमा भी समाप्त हो गई, लेकिन कार्यदायी संस्था की मांग पर दोबारा समय सीमा बढ़ाते हुए मई 2026 तक का काम पूरा करने के लिए समय सीमा निर्धारित की गई है।
वर्तमान में चल रहे कार्य की गति को देखते हुए इसके समय से पूरा होने के आसार नहीं हैं। ऐसा इसलिए कि जून से ही मानसून का समय आ जाएगा, तब बारिश होने से निचली भूमि पर बन रहे उसका बाईपास पर पानी भरने से कार्य बाधित होगा। ग्रामीणों का मानना है कि इस काम को पूर्ण होने में अभी एक वर्ष से अधिक समय लगना तय है।
गड्ढों में खा रहे हिचकोले, उड़ रहा धूल का गुबार : शहर से मदनपुर तक उसका बाईपास निर्माण स्थल तक तो सड़क निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन उसके आगे उसका बाजार और जिले की महराजगंज सीमा तक आठ किमी तक लंबी सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है। इस सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों को गड्ढों में हिचकोले खाने के साथ ही टूटी सड़क की बिखरी गिट्टियों और उड़ रहे गुबार से सांस फूल जाती है।
वहीं, विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि उसका बाईपास समेत संपूर्ण हाईवे के निर्माण के बाद ही उसका मार्ग का निर्माण कराकर इसे पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर किया जाएगा। ऐसे में इस मार्ग से प्रतिदिन गुजरने वाले राहगीरों की समस्या का अंत होता नहीं दिख रहा है। उन्हें अभी कम से कम एक से डेढ़ वर्ष तक सांसत झेलनी होगी।
एनओसी मिलने के बाद शुरू हुआ काम : हाईवे के निर्माण की शुरुआत में डेढ़ वर्ष तक सड़क किनारे संरक्षित वन क्षेत्र के पेड़ों को हटाने के लिए एनओसी आड़े आई। सनई चौराहे से शोहरतगढ़ तक सड़क किनारे लगे पेड़ संरक्षित वन क्षेत्र में शामिल हैं। इसे हटाने के लिए केंद्र सरकार से एनओसी लेनी थी, जिसके लिए वन विभाग के माध्यम से आवेदन किया जाना था।
इसके लिए जरूरी 12 हेक्टेयर भूमि मिलने के बाद एनओसी लेने की प्रक्रिया पूर्ण होने के साथ ही सड़क किनारे के पेड़ों को हटाने का कार्य अब शुरू हो पाया है। इन पेड़ों के चलते सड़क निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है, जिसमें अब तेजी आने की उम्मीद जगी है।
तो पुल एवं पुलिया निर्माण में होगी देरी : एनएच-730 पर रेलवे क्राॅसिंग पर बिना रुके निर्बाध आवागमन के लिए 8.5 किमी लंबे उसका बाईपास और 2.5 किमी लंबे चिल्हिया बाईपास का निर्माण हो रहा है।
इसके तहत उसका बाईपास पर मदनपुर, पंडितपुर व बिहठा समेत हथिवड़ताल में 13 छोटी पुलिया और कूड़ा नदी पर एक बड़े पुल का निर्माण होना है। अगर उसका बाईपास के निचली भूमि पर निर्माणाधीन छोटे पुलिया व कूड़ा नदी के पुल का निर्माण कार्य नहीं हुआ तो बारिश के मौसम में इसे पूरा करना संभव नहीं होगा, जिससे आगे चलकर इन पुल व पुलियों के निर्माण कार्य में भी देरी होनी तय है।
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पांच सौ करोड़ की लागत से एनएच-730 पर उसका से शहर होते हुए शोहरतगढ़ तक 32 किमी सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। मगर काम की रफ्तार शुरुआत से ही धीमी होने से समय सीमा तीसरी बार भी बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया। अब मई 2026 तक नई समय सीमा निर्धारित की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह काम की रफ्तार है, उससे समय सीमा बीतने के बाद भी काम पूरा होने की संभावना नहीं नजर आ रही है।
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एनएच-730 पर महराजगंज की सीमा से उसका बाजार से शहर होते हुए शोहरतगढ़ तक 32 किमी सड़क निर्माण के लिए चार वर्ष पहले बजट स्वीकृत हुआ था। इसके योजना के तहत सड़क को 10 मीटर चौड़ा करने के साथ ही उसका बाजार में आठ किमी और चिल्हिया में 2.5 किमी लंबे बाईपास का भी निर्माण होना था।
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मगर, दो वर्ष की देर के बाद शुरू हुए निर्माण की धीमी गति से काम के समय से पूर्ण नहीं हो पाया। पूर्व में निर्धारित समय सितंबर 2025 तक सड़क निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ तो कार्यदायी संस्था ने समय सीमा बढ़ाने की मांग की, जिस पर उसे फरवरी 2026 तक समय दिया गया था। मगर यह समय सीमा भी समाप्त हो गई, लेकिन कार्यदायी संस्था की मांग पर दोबारा समय सीमा बढ़ाते हुए मई 2026 तक का काम पूरा करने के लिए समय सीमा निर्धारित की गई है।
वर्तमान में चल रहे कार्य की गति को देखते हुए इसके समय से पूरा होने के आसार नहीं हैं। ऐसा इसलिए कि जून से ही मानसून का समय आ जाएगा, तब बारिश होने से निचली भूमि पर बन रहे उसका बाईपास पर पानी भरने से कार्य बाधित होगा। ग्रामीणों का मानना है कि इस काम को पूर्ण होने में अभी एक वर्ष से अधिक समय लगना तय है।
गड्ढों में खा रहे हिचकोले, उड़ रहा धूल का गुबार : शहर से मदनपुर तक उसका बाईपास निर्माण स्थल तक तो सड़क निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन उसके आगे उसका बाजार और जिले की महराजगंज सीमा तक आठ किमी तक लंबी सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है। इस सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों को गड्ढों में हिचकोले खाने के साथ ही टूटी सड़क की बिखरी गिट्टियों और उड़ रहे गुबार से सांस फूल जाती है।
वहीं, विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि उसका बाईपास समेत संपूर्ण हाईवे के निर्माण के बाद ही उसका मार्ग का निर्माण कराकर इसे पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर किया जाएगा। ऐसे में इस मार्ग से प्रतिदिन गुजरने वाले राहगीरों की समस्या का अंत होता नहीं दिख रहा है। उन्हें अभी कम से कम एक से डेढ़ वर्ष तक सांसत झेलनी होगी।
एनओसी मिलने के बाद शुरू हुआ काम : हाईवे के निर्माण की शुरुआत में डेढ़ वर्ष तक सड़क किनारे संरक्षित वन क्षेत्र के पेड़ों को हटाने के लिए एनओसी आड़े आई। सनई चौराहे से शोहरतगढ़ तक सड़क किनारे लगे पेड़ संरक्षित वन क्षेत्र में शामिल हैं। इसे हटाने के लिए केंद्र सरकार से एनओसी लेनी थी, जिसके लिए वन विभाग के माध्यम से आवेदन किया जाना था।
इसके लिए जरूरी 12 हेक्टेयर भूमि मिलने के बाद एनओसी लेने की प्रक्रिया पूर्ण होने के साथ ही सड़क किनारे के पेड़ों को हटाने का कार्य अब शुरू हो पाया है। इन पेड़ों के चलते सड़क निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है, जिसमें अब तेजी आने की उम्मीद जगी है।
तो पुल एवं पुलिया निर्माण में होगी देरी : एनएच-730 पर रेलवे क्राॅसिंग पर बिना रुके निर्बाध आवागमन के लिए 8.5 किमी लंबे उसका बाईपास और 2.5 किमी लंबे चिल्हिया बाईपास का निर्माण हो रहा है।
इसके तहत उसका बाईपास पर मदनपुर, पंडितपुर व बिहठा समेत हथिवड़ताल में 13 छोटी पुलिया और कूड़ा नदी पर एक बड़े पुल का निर्माण होना है। अगर उसका बाईपास के निचली भूमि पर निर्माणाधीन छोटे पुलिया व कूड़ा नदी के पुल का निर्माण कार्य नहीं हुआ तो बारिश के मौसम में इसे पूरा करना संभव नहीं होगा, जिससे आगे चलकर इन पुल व पुलियों के निर्माण कार्य में भी देरी होनी तय है।