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Siddharthnagar News: रोग से बचे तो मौसम की मार से बर्बाद हो रहे टिकोरे
Sun, 04 Oct 2026 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 04 Oct 2026 03:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अप्रैल के पहले हफ्ते में आई आंधी और बारिश ने बस्ती मंडल (बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर) में आम की फसल को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बागों में बौर से टिकोरा बनने के संवेदनशील दौर के बीच मौसम के इस उतार-चढ़ाव ने उत्पादन के अनुमान पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह सिर्फ मौसमी घटना नहीं बल्कि बदलते मौसम के उस पैटर्न की ओर इशारा है जो आम की खेती के लिए लगातार जोखिम बढ़ा रहा है।
मंडल के कई हिस्सों में तेज हवा के साथ हुई बारिश के बाद बागों में कच्चे आम और बौर के झड़ने की स्थिति देखी गई। नौगढ़ क्षेत्र के बड़े बागबान जमशेद खान बताते हैं कि इस मौसम की वजह से 10 से 20 प्रतिशत तक बौर और टिकोरा गिरने का अनुमान है।
उद्यान विशेषज्ञ बताते हैं कि फरवरी से अप्रैल के बीच का समय आम के लिए निर्णायक होता है। इसी दौरान फूल से फल बनने की प्रक्रिया पूरी होती है। ऐसे में तेज हवा परागण को बाधित करती है जबकि बारिश से नमी बढ़ने पर फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसका सीधा असर फल बनने और टिकने की क्षमता पर पड़ता है।
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बस्ती मंडल में आम का रकबा सीमित होने के बावजूद हजारों किसान इससे जुड़े हैं। खासकर संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर के कई गांवों में बागवानी आय का अहम जरिया है।
पिछले कुछ वर्षों में मौसम की अनिश्चितता के कारण उत्पादन का पैटर्न लगातार अस्थिर हुआ है। मार्च-अप्रैल में अचानक आंधी या बारिश की घटनाएं पहले की तुलना में ज्यादा दर्ज की जा रही हैं।
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सिद्धार्थनगर। अप्रैल के पहले हफ्ते में आई आंधी और बारिश ने बस्ती मंडल (बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर) में आम की फसल को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बागों में बौर से टिकोरा बनने के संवेदनशील दौर के बीच मौसम के इस उतार-चढ़ाव ने उत्पादन के अनुमान पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह सिर्फ मौसमी घटना नहीं बल्कि बदलते मौसम के उस पैटर्न की ओर इशारा है जो आम की खेती के लिए लगातार जोखिम बढ़ा रहा है।
मंडल के कई हिस्सों में तेज हवा के साथ हुई बारिश के बाद बागों में कच्चे आम और बौर के झड़ने की स्थिति देखी गई। नौगढ़ क्षेत्र के बड़े बागबान जमशेद खान बताते हैं कि इस मौसम की वजह से 10 से 20 प्रतिशत तक बौर और टिकोरा गिरने का अनुमान है।
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उद्यान विशेषज्ञ बताते हैं कि फरवरी से अप्रैल के बीच का समय आम के लिए निर्णायक होता है। इसी दौरान फूल से फल बनने की प्रक्रिया पूरी होती है। ऐसे में तेज हवा परागण को बाधित करती है जबकि बारिश से नमी बढ़ने पर फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसका सीधा असर फल बनने और टिकने की क्षमता पर पड़ता है।
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बस्ती मंडल में आम का रकबा सीमित होने के बावजूद हजारों किसान इससे जुड़े हैं। खासकर संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर के कई गांवों में बागवानी आय का अहम जरिया है।
पिछले कुछ वर्षों में मौसम की अनिश्चितता के कारण उत्पादन का पैटर्न लगातार अस्थिर हुआ है। मार्च-अप्रैल में अचानक आंधी या बारिश की घटनाएं पहले की तुलना में ज्यादा दर्ज की जा रही हैं।