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Siddharthnagar News: कथावाचक ने सुनाई नारद के पूर्व जन्म की कथा
Mon, 11 May 2026 02:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 11 May 2026 02:19 AM IST
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इटवा। स्थानीय क्षेत्र के मुडिला शिवदत्त गांव में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार की रात में कथावाचक उत्तम कृष्ण शास्त्री ने श्रोताओं को नारद के चरित्र और श्रीमद्भागवत कथा की महिमा को विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि नारद ने व्यास के असंतोष को समाप्त करने के लिए अपने जीवन के पूर्व चरित्र को सुनाया और बताया कि मैं पूर्व जन्म में दासी का पुत्र था। भगवान का भजन करते-करते में ब्रह्मा का पुत्र बना। आज भक्ति के प्रभाव से मेरी ही मेरी हर जगह पूजा हो रही है, सम्मान हो रहा है। यह नारायण की भक्ति का प्रभाव है। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ ने मैया पार्वती को अमरनाथ की गुफा में अमर कथा का श्रवण कराकर सुखदेव का जन्म कराया। उन्होंने कहा कि कलयुग के प्रभाव के चलते परीक्षित को कलयुग के प्रभाव के चलते ऋषि का अपमान कर बैठे। उन्होंने मरे हुए सर्प को ऋषि के गले में डाल दिया, जिससे क्रोधित होकर ऋषि ने परीक्षित को सांप के डसने से मृत्यु का श्राप दे दिया। वहीं, परीक्षित के कल्याण के लिए सुखदेव ने परीक्षित को भागवत कथा श्रवण करने की सलाह दी। राजा परीक्षित ने ऐसा ही किया, जिसके चलते उन्हें भक्ति व मोक्ष की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि भागवत कथा के सुनने मात्र से भक्ति मिलती है और जीवन में बदलाव आता है। कल्याण होता है।
इस अवसर पर यज्ञाचार्य पं. शशिकांत शास्त्री, पं. वेद प्रकाश शास्त्री, शेष राम शास्त्री, अवधेश शास्त्री, मुख्य यजमान कृष्णा मिश्रा, राधे श्याम आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि नारद ने व्यास के असंतोष को समाप्त करने के लिए अपने जीवन के पूर्व चरित्र को सुनाया और बताया कि मैं पूर्व जन्म में दासी का पुत्र था। भगवान का भजन करते-करते में ब्रह्मा का पुत्र बना। आज भक्ति के प्रभाव से मेरी ही मेरी हर जगह पूजा हो रही है, सम्मान हो रहा है। यह नारायण की भक्ति का प्रभाव है। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ ने मैया पार्वती को अमरनाथ की गुफा में अमर कथा का श्रवण कराकर सुखदेव का जन्म कराया। उन्होंने कहा कि कलयुग के प्रभाव के चलते परीक्षित को कलयुग के प्रभाव के चलते ऋषि का अपमान कर बैठे। उन्होंने मरे हुए सर्प को ऋषि के गले में डाल दिया, जिससे क्रोधित होकर ऋषि ने परीक्षित को सांप के डसने से मृत्यु का श्राप दे दिया। वहीं, परीक्षित के कल्याण के लिए सुखदेव ने परीक्षित को भागवत कथा श्रवण करने की सलाह दी। राजा परीक्षित ने ऐसा ही किया, जिसके चलते उन्हें भक्ति व मोक्ष की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि भागवत कथा के सुनने मात्र से भक्ति मिलती है और जीवन में बदलाव आता है। कल्याण होता है।
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इस अवसर पर यज्ञाचार्य पं. शशिकांत शास्त्री, पं. वेद प्रकाश शास्त्री, शेष राम शास्त्री, अवधेश शास्त्री, मुख्य यजमान कृष्णा मिश्रा, राधे श्याम आदि मौजूद रहे।
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