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उतरती बाढ़ हुई जानलेवा
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तौलिहवा के बालानगर टोले में नदी हो रहे कटान का निरीक्षण करते एसडीएम उत्कर्ष श्रीवास्तव।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
उतरती बाढ़ हुई जानलेवा
डीएम ने कहा-न करें लापरवाही, रहे सावधान, जलभराव क्षेत्र से रहे दूर
सिद्धार्थनगर। उतरती बाढ़ भी जानलेवा बन गई है। जिले में बृहस्पतिवार को बाढ़ में डूबने से पांच लोगों की मौत हो गई। अब तक बाढ़ की चपेट में आने से 17 लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़ में 16 लोग डूब चुके हैं, जिनमें 14 की लाश मिल चुकी है और दो लोगों का पता नहीं चल सका है। वहीं घर से पलायन करके विवाह घर में शरण लेने वाले तीन लोगों की मौत पिलर गिरकर दबने से हो गई थी। ऐसे में लोगों को वर्ष 1998 के 24 वर्ष बाद एक बार फिर से बड़ी जनहानि झेलनी पड़ रही है। लगातार डूबने से हो रही मौतों को देखते हुए डीएम संजीव रंजन ने लोगों को सावधान रहने की अपील की है।
जिले में आई भयावह बाढ़ में जनहानि की शुरूआत 11 अक्टूबर को ढेबरुआ-डुमरियागंज मार्ग पर बिगौवा नाले के पास रिक्शा चालक समेत चार परिजनों के बाढ़ के पानी में बहने से हुई। इसके बाद तो जैसे जिले में बाढ़ में डूबने से मौतों का सिलसिला ही शुरू हो गया। इसके बाद 15 अक्टूबर को महिला व किशोर के डूबने समेत विभिन्न क्षेत्रों में 16 लोग बाढ़ के पानी में डूब चुके है। इनमें 14 लोगों के शव मिल चुके है, जिसमें बाढ़ के पानी में डूबे रिक्शा चालक की पत्नी समेत दो अभी भी लापता है। प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार बाढ़ में जनहानि के 17 मामले आए हैं। नौगढ़ तहसील में पांच, बांसी में पांच, डुमरियागंज में पांच और इटवा तहसील में दो लोगों की मौत हो चुकी है। वर्तमान में जिले में नदियों का जलस्तर कम हो रहा है फिर भी डूबकर मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। बृहस्पतिवार को ही उसका थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत रीवा नानकार के टोला लक्षनपुर धुसवां में बाढ़ के पानी में डूबने से दो बहनों समेत तीन की मौत हो गई। इसी दिन गोल्हौरा थाना क्षेत्र में डूबने से एसएसबी जवान सहित दो लोगों की मौत हो गई। पहले सिर्फ 1998 की बाढ़ में ही 53 लोगों की मौत हुई थी, इसके बाद आए बाढ़ में जनहानि नहीं होती थी। इस वर्ष बड़ी जनहानि हुई।
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डीएम ने सतर्क रहने की अपील की
डीएम संजीव रंजन ने बृहस्पतिवार को जनपदवासियों को सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जनपद बाढ विभीषिका को झेल रहा है, अभी नदियों, नालों एवं नीचे स्थानों पर बहुत पानी भरा हुआ है। जनपद में पहले ही कई लोगों की बाढ़ विभीषिका से जान जा चुकी है। पानी को किसी भी दृष्टि से कम न समझें और पानी से दूर रहे तथा पानी में प्रवेश न करें। पशुपालन विभाग से जानवरों को आवश्यक टीके लगवाये जा रहे है और स्वास्थ्य विभाग से संक्रामक रोगों तथा मलेरिका डेंगू डायरिया, टायफाइड की रोकथाम के लिए आवश्यक स्थानों पर दवा का छिड़काव व दवा का वितरण कराया जा रहा है।
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तीन दिन बाद खुला नौगढ़-बांसी मार्ग
जोगिया। क्षेत्र के कई गांवों के साथ ही चौराहे पर थाने पर भरा बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही नौगढ़-बांसी मार्ग पर आवागमन शुरू हो गया है। तीन दिन से जोगिया चौराहे पर सड़क पर पानी चढ़ने के कारण आवागमन बंद कर दिया गया था। जिसके संचालन से राहगीरों को राहत मिली है। प्रशासन ने अभी इस मार्ग पर दो पहिया व चार पहिया वाहनों के आवागमन की अनुमति दी है, जबकि सुरक्षा कारणों से भारी और लोडेड वाहनों के संचालन पर रोक लगाया गया है। जोगिया कोतवाली के पास सड़क पर अभी भी दो फीट पानी बह रहा है। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी आवागमन के सुचारू संचालन में जुटे रहे।
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डीएम ने कहा-न करें लापरवाही, रहे सावधान, जलभराव क्षेत्र से रहे दूर
सिद्धार्थनगर। उतरती बाढ़ भी जानलेवा बन गई है। जिले में बृहस्पतिवार को बाढ़ में डूबने से पांच लोगों की मौत हो गई। अब तक बाढ़ की चपेट में आने से 17 लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़ में 16 लोग डूब चुके हैं, जिनमें 14 की लाश मिल चुकी है और दो लोगों का पता नहीं चल सका है। वहीं घर से पलायन करके विवाह घर में शरण लेने वाले तीन लोगों की मौत पिलर गिरकर दबने से हो गई थी। ऐसे में लोगों को वर्ष 1998 के 24 वर्ष बाद एक बार फिर से बड़ी जनहानि झेलनी पड़ रही है। लगातार डूबने से हो रही मौतों को देखते हुए डीएम संजीव रंजन ने लोगों को सावधान रहने की अपील की है।
जिले में आई भयावह बाढ़ में जनहानि की शुरूआत 11 अक्टूबर को ढेबरुआ-डुमरियागंज मार्ग पर बिगौवा नाले के पास रिक्शा चालक समेत चार परिजनों के बाढ़ के पानी में बहने से हुई। इसके बाद तो जैसे जिले में बाढ़ में डूबने से मौतों का सिलसिला ही शुरू हो गया। इसके बाद 15 अक्टूबर को महिला व किशोर के डूबने समेत विभिन्न क्षेत्रों में 16 लोग बाढ़ के पानी में डूब चुके है। इनमें 14 लोगों के शव मिल चुके है, जिसमें बाढ़ के पानी में डूबे रिक्शा चालक की पत्नी समेत दो अभी भी लापता है। प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार बाढ़ में जनहानि के 17 मामले आए हैं। नौगढ़ तहसील में पांच, बांसी में पांच, डुमरियागंज में पांच और इटवा तहसील में दो लोगों की मौत हो चुकी है। वर्तमान में जिले में नदियों का जलस्तर कम हो रहा है फिर भी डूबकर मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। बृहस्पतिवार को ही उसका थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत रीवा नानकार के टोला लक्षनपुर धुसवां में बाढ़ के पानी में डूबने से दो बहनों समेत तीन की मौत हो गई। इसी दिन गोल्हौरा थाना क्षेत्र में डूबने से एसएसबी जवान सहित दो लोगों की मौत हो गई। पहले सिर्फ 1998 की बाढ़ में ही 53 लोगों की मौत हुई थी, इसके बाद आए बाढ़ में जनहानि नहीं होती थी। इस वर्ष बड़ी जनहानि हुई।
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डीएम ने सतर्क रहने की अपील की
डीएम संजीव रंजन ने बृहस्पतिवार को जनपदवासियों को सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जनपद बाढ विभीषिका को झेल रहा है, अभी नदियों, नालों एवं नीचे स्थानों पर बहुत पानी भरा हुआ है। जनपद में पहले ही कई लोगों की बाढ़ विभीषिका से जान जा चुकी है। पानी को किसी भी दृष्टि से कम न समझें और पानी से दूर रहे तथा पानी में प्रवेश न करें। पशुपालन विभाग से जानवरों को आवश्यक टीके लगवाये जा रहे है और स्वास्थ्य विभाग से संक्रामक रोगों तथा मलेरिका डेंगू डायरिया, टायफाइड की रोकथाम के लिए आवश्यक स्थानों पर दवा का छिड़काव व दवा का वितरण कराया जा रहा है।
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तीन दिन बाद खुला नौगढ़-बांसी मार्ग
जोगिया। क्षेत्र के कई गांवों के साथ ही चौराहे पर थाने पर भरा बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही नौगढ़-बांसी मार्ग पर आवागमन शुरू हो गया है। तीन दिन से जोगिया चौराहे पर सड़क पर पानी चढ़ने के कारण आवागमन बंद कर दिया गया था। जिसके संचालन से राहगीरों को राहत मिली है। प्रशासन ने अभी इस मार्ग पर दो पहिया व चार पहिया वाहनों के आवागमन की अनुमति दी है, जबकि सुरक्षा कारणों से भारी और लोडेड वाहनों के संचालन पर रोक लगाया गया है। जोगिया कोतवाली के पास सड़क पर अभी भी दो फीट पानी बह रहा है। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी आवागमन के सुचारू संचालन में जुटे रहे।