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नौ दिन बचे कार्यकाल, गांवों में विकास कार्य हुए ठप

Tue, 15 Dec 2020 10:02 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 15 Dec 2020 10:02 PM IST
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Ten days are left, development work in villages stalled
नौ दिन बचा है कार्यकाल, गांवों में विकास कार्य ठप
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ग्राम पंचायतों में असमंजस, प्रधानों का बढ़ेगा कार्यकाल या प्रशासक होंगे तैनात
25 दिसंबर को खत्म होगा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल, विकास कार्यों में नहीं ले रहे रुचि
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। ग्राम पंचायत प्रधान के कार्यकाल बढ़ेंगे या प्रशासक तैनात होंगे, इस असमंजस के कारण गांवों में विकास कार्य ठप हो गए है। कार्यकाल में सिर्फ नौ दिन शेष बचे होने से भुगतान की परेशानी देखते हुए प्रधान विकास कार्यों के प्रति अनिच्छा दिखा रहे हैं।
ग्राम पंचायतों का 25 दिसंबर को कार्यकाल खत्म होने में सिर्फ नौ दिन शेष बचे हैं लेकिन शासन से प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने और प्रशासक नियुक्त करने के संबंध में कोई दिशा-निर्देश नहीं मिला है। इस असमंजस के कारण जिले के कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने के संबंध में प्रधान एवं ग्राम पंचायत अधिकारियों के बीच रस्साकसी चल रही है। हालत यह है कि मिठवल, उसका, डुमरियागंज, भनवापुर, शोहरतगढ़, लोटन समेत अन्य ब्लॉकों के 54 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य पहले से ही बंद हैं। ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष डॉ. पवन मिश्र कहते है कि पूर्व में समय से चुनाव नहीं होने पर प्रधानों का ही कार्यकाल बढ़ा दिया गया था लेकिन सरकार अनिर्णय की स्थिति में है। इससे भुगतान नहीं होने की संभावना से परेशान जिले के सभी ग्राम प्रधान विकास कार्य कराने से परहेज कर रहे हैं। डीपीआरओ आदर्श का कहना है कि ग्राम पंचायतों के 25 दिसंबर के कार्यकाल खत्म होने के बाद की स्थिति के संबंध में शासन से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिला है, जैसे निर्देश मिलेंगे उनका नियमानुसार अनुपालन किया जाएगा।
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भुगतान के पशोपेश में विकास कार्य ठप
वर्तमान में भुगतान की ऑनलाइन प्रक्रिया होने से ग्राम प्रधान कार्यकाल समाप्त होने के निर्धारित तिथि में भुगतान नहीं होने की संभावना से नए विकास कार्य कराने से दूरी बना लिए हैं। वह अधूरे पड़े कार्य को पूर्ण कराने के साथ ही उसका भुगतान कराने में जुटे हैं। पूर्व में चेक के माध्यम से भुगतान होने के कारण बैकडेट में भी भुगतान हो जाते थे, इससे लोग विकास कार्य कराने के बाद कार्यकाल खत्म होने पर भी भुगतान करा लेते थे। अब ऐसा संभव नहीं होने से अधिकांश ग्राम पंचायतों में विकास कार्य पूरी तरह ठप हो चुके हैं।
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