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Siddharthnagar News: मरीज की मौत के मामले में जांच करेगी दो डॉक्टरों की टीम
Mon, 10 Jun 2024 03:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 10 Jun 2024 03:10 AM IST
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परिवारीजनों ने गलत इंजेक्शन लगाने से मौत होने का लगाया था आरोप
उसका क्षेत्र के मरीज की एक सप्ताह पहले मेडिकल कॉलेज में हुई थी मौत
डॉक्टर सहित चार की सेवा हो चुकी है समाप्त
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में इलाज में लापरवाही से मरीज के मौत के मामले में कॉलेज प्रशासन ने एक जूनियर डॉक्टर, एक वार्ड बॉय और एक स्टाफनर्स की सेवा समाप्त कर दिया गया है। अब फिर एक बार मामले की जांच के लिए दो डॉक्टरों की टीम गठित की गई है जो यह जांच करेगी कि इंजेक्शन लगाया था या नहीं। क्योंकि ओवरडोज इंजेक्शन देेने से मौत होने का आरोप लगाते हुए परिवार के लोगों ने कार्रवाई की मांग की है। इसमें मामले में जिलाधिकारी से शिकायत करके कार्रवाई की मांग की है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में 21 मई को इलाज कराने उसका थाना क्षेत्र के चनरैया गांव निवासी धनुषधारी मणि त्रिपाठी की हालत बिगडऩे पर मेडिकल कॉलेज लगाया गया। पूरे दिन इलाज चला, वह मेडिसिन वार्ड में भर्ती थे। परिवार के मुताबिक सुगर सहित अन्य प्रकार की समस्या थी। देर रात में ओवरडोज इंजेक्शन लगा देने के कारण तबीयत बिगड़ गई और जान चली गई थी। इस मामले में मृतक के छोटे भाई ने प्राचार्य व सीएमएस को पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। प्रभारी सीएमएस डॉ. संजय कुमार शर्मा ने ड्यूटी तैनात जूनियर डॉक्टर और तीन स्वास्थ्य कर्मियों को नोटिस जारी करक जवाब मांगा था। इसके बाद प्राचार्य डॉ. एके झा ने डॉक्टर को हटा दिया था। जबकि स्वास्थ्य कर्मियों से जवाब मांगा था। इसके बाद 28 मई को जवाब सही नहीं मिलने पर एक जूनियर डॉ. पुनित जायसवाल, स्टाफ नर्स अतुल मिश्र व वार्ड ब्वाय अश्वनी की सेवा समाप्त कर दिया गया था।
इस मामले की एक बार फिर जांच शुरू हो गई है। क्योंकि मृतक के परिजन कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने आगे शिकायत की और ओवरडोज इंजेक्शन देने से मौत की बात कही। मामले की सच्चाई जानने के लिए सीएमएस ने दो डॉक्टरों की टीम गठित की है जो यह जांच करेंंगे कि इंजेक्शन किसने लगाया था। कितनी डोज लगाया था। क्या उस इंजेक्शन की जरूरत थी या नहीं। जांच के बाद रिपोर्ट सीएमएस को देंगे इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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इस संबंध में सीएमएस डॉ. एके झा ने बताया कि बीमार व्यक्ति के मौत के मामले की जांच के लिए दो डॉक्टरों की कमेटी गठित की गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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यह है घटनाक्रम
उसका थाना क्षेत्र के सोहांस गांव के टोला चनरैया निवासी रामदरस त्रिपाठी ने प्राचार्य व सीएमएस को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि वह अपने बड़े भाई धनुसधारी त्रिपाठी सुबह तबीयत खराब होने के बाद जिला अस्पताल लेकर आए। यहां 10 बजे के लगभग इमरजेंसी दाखिल करवाया। रात्रि में डॉक्टर अपने कक्ष में चल गए। ड्यूटी पर एक स्टाफ नर्स मौजूद था। रात में डॉक्टर के कहने पर इंसुलिन का ओवरडोज वार्ड बॉय ने लगा दिया। इसके बाद हालत और बिगड़ गई। दिए गए नंबर पर कॉल करने पर बंद कर दिया। इससे मरीज की मौत हो गई। शिकायतकर्ता ने नशे में होने का भी आरोप लगाया है। उसने मामले की जांच करके कार्रवाई की मांग की।
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उसका क्षेत्र के मरीज की एक सप्ताह पहले मेडिकल कॉलेज में हुई थी मौत
डॉक्टर सहित चार की सेवा हो चुकी है समाप्त
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में इलाज में लापरवाही से मरीज के मौत के मामले में कॉलेज प्रशासन ने एक जूनियर डॉक्टर, एक वार्ड बॉय और एक स्टाफनर्स की सेवा समाप्त कर दिया गया है। अब फिर एक बार मामले की जांच के लिए दो डॉक्टरों की टीम गठित की गई है जो यह जांच करेगी कि इंजेक्शन लगाया था या नहीं। क्योंकि ओवरडोज इंजेक्शन देेने से मौत होने का आरोप लगाते हुए परिवार के लोगों ने कार्रवाई की मांग की है। इसमें मामले में जिलाधिकारी से शिकायत करके कार्रवाई की मांग की है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में 21 मई को इलाज कराने उसका थाना क्षेत्र के चनरैया गांव निवासी धनुषधारी मणि त्रिपाठी की हालत बिगडऩे पर मेडिकल कॉलेज लगाया गया। पूरे दिन इलाज चला, वह मेडिसिन वार्ड में भर्ती थे। परिवार के मुताबिक सुगर सहित अन्य प्रकार की समस्या थी। देर रात में ओवरडोज इंजेक्शन लगा देने के कारण तबीयत बिगड़ गई और जान चली गई थी। इस मामले में मृतक के छोटे भाई ने प्राचार्य व सीएमएस को पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। प्रभारी सीएमएस डॉ. संजय कुमार शर्मा ने ड्यूटी तैनात जूनियर डॉक्टर और तीन स्वास्थ्य कर्मियों को नोटिस जारी करक जवाब मांगा था। इसके बाद प्राचार्य डॉ. एके झा ने डॉक्टर को हटा दिया था। जबकि स्वास्थ्य कर्मियों से जवाब मांगा था। इसके बाद 28 मई को जवाब सही नहीं मिलने पर एक जूनियर डॉ. पुनित जायसवाल, स्टाफ नर्स अतुल मिश्र व वार्ड ब्वाय अश्वनी की सेवा समाप्त कर दिया गया था।
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इस मामले की एक बार फिर जांच शुरू हो गई है। क्योंकि मृतक के परिजन कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने आगे शिकायत की और ओवरडोज इंजेक्शन देने से मौत की बात कही। मामले की सच्चाई जानने के लिए सीएमएस ने दो डॉक्टरों की टीम गठित की है जो यह जांच करेंंगे कि इंजेक्शन किसने लगाया था। कितनी डोज लगाया था। क्या उस इंजेक्शन की जरूरत थी या नहीं। जांच के बाद रिपोर्ट सीएमएस को देंगे इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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इस संबंध में सीएमएस डॉ. एके झा ने बताया कि बीमार व्यक्ति के मौत के मामले की जांच के लिए दो डॉक्टरों की कमेटी गठित की गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
यह है घटनाक्रम
उसका थाना क्षेत्र के सोहांस गांव के टोला चनरैया निवासी रामदरस त्रिपाठी ने प्राचार्य व सीएमएस को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि वह अपने बड़े भाई धनुसधारी त्रिपाठी सुबह तबीयत खराब होने के बाद जिला अस्पताल लेकर आए। यहां 10 बजे के लगभग इमरजेंसी दाखिल करवाया। रात्रि में डॉक्टर अपने कक्ष में चल गए। ड्यूटी पर एक स्टाफ नर्स मौजूद था। रात में डॉक्टर के कहने पर इंसुलिन का ओवरडोज वार्ड बॉय ने लगा दिया। इसके बाद हालत और बिगड़ गई। दिए गए नंबर पर कॉल करने पर बंद कर दिया। इससे मरीज की मौत हो गई। शिकायतकर्ता ने नशे में होने का भी आरोप लगाया है। उसने मामले की जांच करके कार्रवाई की मांग की।