{"_id":"6505efcdfadbd25de50210a6","slug":"take-measures-to-prevent-bacterial-leaf-blight-in-paddy-crop-dr-pradeep-kumar-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1033-4760-2023-09-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"धान की फसल में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट के निवारण का करें उपाय : डॉ. प्रदीप कुमार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धान की फसल में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट के निवारण का करें उपाय : डॉ. प्रदीप कुमार
विज्ञापन
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिकों ने किसानों को दिया धान की फसल में बीमारियों से बचाव की जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। धान की फसल में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट नामक बीमारी का प्रकोप शुरू हो गया है। जीवाणु पर्ण अंगमारी रोग के प्रकोप से शुरुआत में पत्तियों पर धब्बे बनने शुरू हो गए हैं, जो बढ़कर धारियों का रूप ले लेती हैं। बीमारी का प्रकोप बढ़ने पर आमतौर पर 14.22 प्रतिशत तक उत्पादन का आकलन किया गया है।
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक फसल सुरक्षा डॉ. प्रदीप कुमार बताते हैं कि पत्तियों पर पहले हल्के भूरे रंग की धारियां शुरू होती हैं। रोग के लक्षण यह है कि पत्तियों की नोक या किनारे से शुरू होकर रोग नीचे की तरफ बढ़ता है और गंभीर रूप से ग्रसित पौधे झुलस कर गिर जाते हैं। समय रहते किसान यदि रोग नियंत्रण उपाय नहीं अपनाता तो आम तौर पर 14.22 प्रतिशत उत्पादन क्षति बढ़कर 60.70 प्रतिशत तक हो सकती है। डॉ. प्रदीप के अनुसार धान की फसल का यह विनाशकारी रोग है। इस रोग के नियंत्रण के लिए धान में किसान पांच सौ ग्राम कापर ऑक्सीक्लोराइड व छह ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लीन का दो सौ लीटर पानी में घोल बनाकर 10.12 दिनों के अंतराल पर दो बार छिड़काव करें। रसायनों के घोल में स्टीकर एक मिली प्रति लीटर पानी की दर से मिलाकर छिड़काव करें। इससे रसायनों की प्रभावशीलता करीब 40.50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। धान की फसल में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट नामक बीमारी का प्रकोप शुरू हो गया है। जीवाणु पर्ण अंगमारी रोग के प्रकोप से शुरुआत में पत्तियों पर धब्बे बनने शुरू हो गए हैं, जो बढ़कर धारियों का रूप ले लेती हैं। बीमारी का प्रकोप बढ़ने पर आमतौर पर 14.22 प्रतिशत तक उत्पादन का आकलन किया गया है।
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक फसल सुरक्षा डॉ. प्रदीप कुमार बताते हैं कि पत्तियों पर पहले हल्के भूरे रंग की धारियां शुरू होती हैं। रोग के लक्षण यह है कि पत्तियों की नोक या किनारे से शुरू होकर रोग नीचे की तरफ बढ़ता है और गंभीर रूप से ग्रसित पौधे झुलस कर गिर जाते हैं। समय रहते किसान यदि रोग नियंत्रण उपाय नहीं अपनाता तो आम तौर पर 14.22 प्रतिशत उत्पादन क्षति बढ़कर 60.70 प्रतिशत तक हो सकती है। डॉ. प्रदीप के अनुसार धान की फसल का यह विनाशकारी रोग है। इस रोग के नियंत्रण के लिए धान में किसान पांच सौ ग्राम कापर ऑक्सीक्लोराइड व छह ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लीन का दो सौ लीटर पानी में घोल बनाकर 10.12 दिनों के अंतराल पर दो बार छिड़काव करें। रसायनों के घोल में स्टीकर एक मिली प्रति लीटर पानी की दर से मिलाकर छिड़काव करें। इससे रसायनों की प्रभावशीलता करीब 40.50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
विज्ञापन