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समाज में परिवर्तन करने वाले पद्मश्री पाए लोगों से लें प्रेरणा : राज्यपाल
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समाज में परिवर्तन करने वाले पद्मश्री पाए लोगों से लें प्रेरणा : राज्यपाल
सिद्धार्थनगर। शिक्षित न होते हुए भी कुछ बदलने की सोंच ने पद्मश्री हासिल कराया। यह कुछ अलग करने की इच्छा और सकारात्मक सोच का परिणाम है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पद्मश्री पाए दो लोगों की कहानी सुनाकर विद्यार्थियों को समाज में सकारात्मक परिवर्तन करने वाले कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सही सोचें, सब ठीक होगा। सकारात्मक सोच से बहुत कुछ बदलाव ला सकते हैं।
राज्यपाल ने वर्ष 2020 में पद्मश्री से सम्मानित हुई हस्तियों को प्ररेणा के रूप में पेश करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की आदिवासी राही वोकले नाम की महिला के परिवार में बच्चे बीमार पड़ने लगे थे। शिक्षित न होते हुए भी उन्होंने मंथन किया और पाया कि फसल में तेजी से होने वाले रासायनिक का इस्तेमाल करने से बच्चे और हर उम्र के लोग अधिक बीमार हो रहे हैं। इसके बाद उन्होंने आर्गेनिक खेती पर जोर दिया और आज 154 प्रकार के सीड सेंटर चला रही हैं। इससे उनके आसपास गांव के लोग बीमार कम होते हैं। उनके इस कार्य के लिए पद्मश्री से नवाजा गया। इसी प्रकार से कर्नाटक के काला हजबा फेरी लगाकर सामान बेचते हुए गुजरा करते थे। एक अंग्रेज ने उन्हें अंग्रेजी में कुछ बोला। समझ नहीं सके तो हिंदी में कहा कि जब पढ़े नहीं हो तो सामान कैसे बेचते हो। यह उनके दिल और दिमाग पर चोट की और उसी के बाद उन्होंने ठान लिया कि अब कोई दूसरा इस प्रकार से शर्मिंदा नहीं होगा। इसके बाद उन्होंने इंग्लिश मीडियम स्कूल खोल दिया और आज उसमें 150 बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
उनके सेवाभाव और समाज को नई दिशा देने वाले कार्य के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। ऐसे कई प्रेरणादायक लोग हैं, जिनके कार्य आज इंटरनेट उपलब्ध हैं। ऐसे लोगों की प्रेरणादायक कहानियों की स्मारिका बनवाएं और पढ़ने वाले बच्चों के बीच में वितरण करें। इससे उनके अंदर सकारात्मक कार्य करने की प्रेरणा मिले और वे सामान व देश के लिए कुछ कर सकें। एक शिक्षक की प्रेरणा से जिंदगी बदल जाएगी।
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सिद्धार्थनगर। शिक्षित न होते हुए भी कुछ बदलने की सोंच ने पद्मश्री हासिल कराया। यह कुछ अलग करने की इच्छा और सकारात्मक सोच का परिणाम है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पद्मश्री पाए दो लोगों की कहानी सुनाकर विद्यार्थियों को समाज में सकारात्मक परिवर्तन करने वाले कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सही सोचें, सब ठीक होगा। सकारात्मक सोच से बहुत कुछ बदलाव ला सकते हैं।
राज्यपाल ने वर्ष 2020 में पद्मश्री से सम्मानित हुई हस्तियों को प्ररेणा के रूप में पेश करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की आदिवासी राही वोकले नाम की महिला के परिवार में बच्चे बीमार पड़ने लगे थे। शिक्षित न होते हुए भी उन्होंने मंथन किया और पाया कि फसल में तेजी से होने वाले रासायनिक का इस्तेमाल करने से बच्चे और हर उम्र के लोग अधिक बीमार हो रहे हैं। इसके बाद उन्होंने आर्गेनिक खेती पर जोर दिया और आज 154 प्रकार के सीड सेंटर चला रही हैं। इससे उनके आसपास गांव के लोग बीमार कम होते हैं। उनके इस कार्य के लिए पद्मश्री से नवाजा गया। इसी प्रकार से कर्नाटक के काला हजबा फेरी लगाकर सामान बेचते हुए गुजरा करते थे। एक अंग्रेज ने उन्हें अंग्रेजी में कुछ बोला। समझ नहीं सके तो हिंदी में कहा कि जब पढ़े नहीं हो तो सामान कैसे बेचते हो। यह उनके दिल और दिमाग पर चोट की और उसी के बाद उन्होंने ठान लिया कि अब कोई दूसरा इस प्रकार से शर्मिंदा नहीं होगा। इसके बाद उन्होंने इंग्लिश मीडियम स्कूल खोल दिया और आज उसमें 150 बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
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उनके सेवाभाव और समाज को नई दिशा देने वाले कार्य के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। ऐसे कई प्रेरणादायक लोग हैं, जिनके कार्य आज इंटरनेट उपलब्ध हैं। ऐसे लोगों की प्रेरणादायक कहानियों की स्मारिका बनवाएं और पढ़ने वाले बच्चों के बीच में वितरण करें। इससे उनके अंदर सकारात्मक कार्य करने की प्रेरणा मिले और वे सामान व देश के लिए कुछ कर सकें। एक शिक्षक की प्रेरणा से जिंदगी बदल जाएगी।
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