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अब मिनी सदन का महाभारत शुरू
अमर उजाला ब्यूरो/ सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 02 Nov 2015 11:41 PM IST
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वैसे तो जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव प्रधानी चुनाव के बाद जनवरी 2016 में होने हैं, लेकिन इसकी सक्रियता सदस्य पद के नतीजों के साथ ही शुरू हो गई है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित अध्यक्ष पद की होड़ में सपा के ही तीन दिग्गज शामिल हैं, जबकि अन्य दलों के नेता या निर्वाचित सदस्यों ने अभी अपना पत्ता नहीं खोला है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होते ही सदस्य पद की वह आठ सीटें वीआईपी हो गई, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थीं। मतगणना के बाद क्षेत्र संख्या 42 से विधायक विजय पासवान के भाई रामलाल पासवान व 38 से निर्वाचित हुई उनकी पत्नी मंजू पासवान निर्वाचित हो चुकी हैं। वहीं क्षेत्र संख्या 33 से जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि चिनकू यादव के करीबी गरीब दास व क्षेत्र संख्या 41 पूर्व प्रमुख शांति देवी स्वयं निर्वाचित हुई हैं। इन नेताओं के अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल होने से सपा से समर्थन पाने की होड़ मचनी तय है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इन चुनावों में सत्ताधारी पार्टी से समर्थित उम्मीदवार के ही सफलता पाने की संभावना ज्यादा होती है। जिले का एकमात्र अनुसूचित जाति का विधायक होने के कारण जहां विजय पासवान अपना दावा मजबूत मानते हैं, वहीं पत्नी के वर्तमान अध्यक्ष पद पर काबिज होने के कारण चिनकू यादव भी अपने करीबी को इस पद पर बिठाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते।
चिनकू यादव डुमरियागंज विस क्षेत्र से सपा के प्रत्याशी भी रह चुके हैं। पूर्व प्रमुख शांति देवी पर एक बड़े नेता का हाथ बताया जा रहा है। वह खुद को प्रत्याशी बनाए जाने से सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं अपितु पूरे जिले में पार्टी को मजबूत करने का दावा करती हैं।
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बता दें कि विभिन्न ब्लाकों की आरक्षित सीटों से अधिकांश सपा के ही कई दिग्गज नेताओं ने अपनों को मैदान में उतार दिया। उसका बाजार, जोगिया व खेसरहा में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित तीन सीटों पर विधायक विजय पासवान ने अपने भाई रामलाल, भाभी पियारी देवी व पत्नी मंजू पासवान को उतारा तो सपा के विधायक प्रत्याशी रह चुके व वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष पूजा यादव के पति चिनकू यादव ने भी अपने करीबी गरीबदास को मिठवल से उतार दिया।
सपा की ही नेता व पूर्व प्रमुख शांति देवी ने भी उसका-जोगिया से अपना चुनावी बिगुल फूंक दिया। वहीं पूर्व विधायक लालजी यादव ने खेसरहा से अनुसूचित जाति के सपा नेता बनारसी कन्नौजिया को चुनाव में उतारा तो शोहरतगढ़ में विधायक प्रतिनिधि उग्रसेन सिंह ने भी अनुसूचित जाति के ही प्रत्याशी रग्घु को उतारा था।
इनमें पूर्व विधायक व विधायक प्रतिनिधि को अपने प्रत्याशियों को जीत दिलाने में सफलता नहीं मिल सकी। जबकि भाजपा, बसपा व कांग्रेस समेत अन्य दलों के तरफ से अध्यक्ष पद का कोई दावेदार सामने नहीं आया है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होते ही सदस्य पद की वह आठ सीटें वीआईपी हो गई, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थीं। मतगणना के बाद क्षेत्र संख्या 42 से विधायक विजय पासवान के भाई रामलाल पासवान व 38 से निर्वाचित हुई उनकी पत्नी मंजू पासवान निर्वाचित हो चुकी हैं। वहीं क्षेत्र संख्या 33 से जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि चिनकू यादव के करीबी गरीब दास व क्षेत्र संख्या 41 पूर्व प्रमुख शांति देवी स्वयं निर्वाचित हुई हैं। इन नेताओं के अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल होने से सपा से समर्थन पाने की होड़ मचनी तय है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इन चुनावों में सत्ताधारी पार्टी से समर्थित उम्मीदवार के ही सफलता पाने की संभावना ज्यादा होती है। जिले का एकमात्र अनुसूचित जाति का विधायक होने के कारण जहां विजय पासवान अपना दावा मजबूत मानते हैं, वहीं पत्नी के वर्तमान अध्यक्ष पद पर काबिज होने के कारण चिनकू यादव भी अपने करीबी को इस पद पर बिठाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते।
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चिनकू यादव डुमरियागंज विस क्षेत्र से सपा के प्रत्याशी भी रह चुके हैं। पूर्व प्रमुख शांति देवी पर एक बड़े नेता का हाथ बताया जा रहा है। वह खुद को प्रत्याशी बनाए जाने से सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं अपितु पूरे जिले में पार्टी को मजबूत करने का दावा करती हैं।
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बता दें कि विभिन्न ब्लाकों की आरक्षित सीटों से अधिकांश सपा के ही कई दिग्गज नेताओं ने अपनों को मैदान में उतार दिया। उसका बाजार, जोगिया व खेसरहा में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित तीन सीटों पर विधायक विजय पासवान ने अपने भाई रामलाल, भाभी पियारी देवी व पत्नी मंजू पासवान को उतारा तो सपा के विधायक प्रत्याशी रह चुके व वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष पूजा यादव के पति चिनकू यादव ने भी अपने करीबी गरीबदास को मिठवल से उतार दिया।
सपा की ही नेता व पूर्व प्रमुख शांति देवी ने भी उसका-जोगिया से अपना चुनावी बिगुल फूंक दिया। वहीं पूर्व विधायक लालजी यादव ने खेसरहा से अनुसूचित जाति के सपा नेता बनारसी कन्नौजिया को चुनाव में उतारा तो शोहरतगढ़ में विधायक प्रतिनिधि उग्रसेन सिंह ने भी अनुसूचित जाति के ही प्रत्याशी रग्घु को उतारा था।
इनमें पूर्व विधायक व विधायक प्रतिनिधि को अपने प्रत्याशियों को जीत दिलाने में सफलता नहीं मिल सकी। जबकि भाजपा, बसपा व कांग्रेस समेत अन्य दलों के तरफ से अध्यक्ष पद का कोई दावेदार सामने नहीं आया है।