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Siddharthnagar News: साॅफ्टवेयर का खेल, मानक वाले विद्यालय भी हो गए फेल
Thu, 21 Nov 2024 11:09 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 21 Nov 2024 11:09 PM IST
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सिद्धार्थनगर। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित होने वाली बोर्ड परीक्षा की तिथि घोषित हो चुकी है। परीक्षा केंद्र की प्रस्तावित सूची जारी होने के साथ ही आपत्ति की भी जांच की जा रही है। पिछली बार के तुलना में इस वर्ष 22 परीक्षा केंद्र कम हो गए। जबकि, परीक्षा में बच्चों की संख्या बढ़ गई है। कटने वाले विद्यालय में वित्तविहीन वाले वे विद्यालय हैं जो पिछली बार केंद्र बने थे और सुविधाओं से लैस भी थे।
परीक्षा केंद्र कटने के पीछे डिजिटल प्रणाली का खेल है। क्योंकि, नियम है कि परीक्षा केंद्र बनाने में पहले राजकीय फिर सहायता प्राप्त और अगर बचता है तो वित्तविहीन को चयनित किया जाए। साॅफ्टवेयर इसी प्रकार से अपडेट है जो चयन करता है। उसी साॅफ्टवेयर की मानक में वित्तविहीन कटे हैं। अब जांच कमेटी के पाले में केंद्र बढ़ाने की गेंद है। अगर बढ़ा तो वित्तविहीन विद्यालय सेंटर बनने की रेस पास कर जाएंगे। अगर केंद्र नहीं बढ़ा तो परीक्षा कराने में मुसीबत होगी। क्योंकि बच्चों की संख्या बढ़ गई है और केंद्र की संख्या कम हो गई है। ऐसा विद्यालय से जुड़े लोगों का कहना है।
इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक सोमारू प्रधान ने बताया कि केंद्र बोर्ड की ओर से बनाया जाता है। पूरी पारदर्शिता से काम होता है। केंद्रों के आपत्ति की जांच रिपोर्ट जाएगी फिर फाइनल सूची जारी होगी।
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पिछले वर्ष की तुलना में कट गए 22 केंद्र : जनपद में माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से 221 विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इसमें 28 राजकीय, 48 अशासकीय व 155 वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। जिन्होंने परीक्षा केंद्र बनाने के लिए बोर्ड को आवेदन किया था। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से 92 केंद्रों की प्रस्तावित सूची जारी की गई है। इसमें पिछले वर्ष की तुलना में 22 केंद्र कट गए। क्योंकि पिछली बार 114 परीक्षा केंद्र बने थे। कटने वाले विद्यालयों में वित्तविहीन वाले हैं। जो दौड़भाग करना शुरू कर दिए। क्योंकि वे पिछली बार केंद्र बने थे और बोर्ड मानक के अनुरूप सुविधाओं से लैस थे। विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक परीक्षा केंद्र के चयन की प्रक्रिया बोर्ड के साॅफ्टवेयर से चयन करते हैं। इसमें साॅफ्टवेयर में पहले राजकीय और फिर सहायता प्राप्त और इसके बाद अगर संख्या बढ़ रही है तो सीरियल से आने वाले वित्तविहीन विद्यालयों को चुनता है। यह वजह है कि यह विद्यालय बाहर हो गए।
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परीक्षा केंद्र कटने के पीछे डिजिटल प्रणाली का खेल है। क्योंकि, नियम है कि परीक्षा केंद्र बनाने में पहले राजकीय फिर सहायता प्राप्त और अगर बचता है तो वित्तविहीन को चयनित किया जाए। साॅफ्टवेयर इसी प्रकार से अपडेट है जो चयन करता है। उसी साॅफ्टवेयर की मानक में वित्तविहीन कटे हैं। अब जांच कमेटी के पाले में केंद्र बढ़ाने की गेंद है। अगर बढ़ा तो वित्तविहीन विद्यालय सेंटर बनने की रेस पास कर जाएंगे। अगर केंद्र नहीं बढ़ा तो परीक्षा कराने में मुसीबत होगी। क्योंकि बच्चों की संख्या बढ़ गई है और केंद्र की संख्या कम हो गई है। ऐसा विद्यालय से जुड़े लोगों का कहना है।
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इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक सोमारू प्रधान ने बताया कि केंद्र बोर्ड की ओर से बनाया जाता है। पूरी पारदर्शिता से काम होता है। केंद्रों के आपत्ति की जांच रिपोर्ट जाएगी फिर फाइनल सूची जारी होगी।
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पिछले वर्ष की तुलना में कट गए 22 केंद्र : जनपद में माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से 221 विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इसमें 28 राजकीय, 48 अशासकीय व 155 वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। जिन्होंने परीक्षा केंद्र बनाने के लिए बोर्ड को आवेदन किया था। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से 92 केंद्रों की प्रस्तावित सूची जारी की गई है। इसमें पिछले वर्ष की तुलना में 22 केंद्र कट गए। क्योंकि पिछली बार 114 परीक्षा केंद्र बने थे। कटने वाले विद्यालयों में वित्तविहीन वाले हैं। जो दौड़भाग करना शुरू कर दिए। क्योंकि वे पिछली बार केंद्र बने थे और बोर्ड मानक के अनुरूप सुविधाओं से लैस थे। विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक परीक्षा केंद्र के चयन की प्रक्रिया बोर्ड के साॅफ्टवेयर से चयन करते हैं। इसमें साॅफ्टवेयर में पहले राजकीय और फिर सहायता प्राप्त और इसके बाद अगर संख्या बढ़ रही है तो सीरियल से आने वाले वित्तविहीन विद्यालयों को चुनता है। यह वजह है कि यह विद्यालय बाहर हो गए।