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Siddharthnagar News: ई-पॉस से वितरण में पेच, खाद के अभाव में मुरझा रही धान की फसल
Fri, 24 Jul 2026 11:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 24 Jul 2026 11:45 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। खरीफ सीजन में धान की फसल को समय पर खाद उपलब्ध न होने से किसानों की फसल मुरझाने लगी है। सबसे बड़ी जरूरत होने के बाद भी खाद केंद्रों पर ई-पॉस मशीन की तकनीकी खामियां और वितरण का समय सीमा किसानों की परेशानी बढ़ा रहे हैं।
उनका कहना है कि सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक ही ई-पॉस मशीन के जरिये खाद और बीज का वितरण होता है। इस बीच यदि सर्वर डाउन हो जाए तो बिक्री पूरी तरह रुक जाती है। नतीजा यह है कि घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी कई किसानों को बिना खाद के लौटना पड़ता है।
जिले की साधन सहकारी समितियों और निजी उर्वरक केंद्रों पर इन दिनों सुबह से ही किसानों की लंबी कतार लग रही है। ई-पॉस मशीन पर आधार सत्यापन के बाद ही खाद मिलती है। नेटवर्क या सर्वर में दिक्कत आते ही मशीन काम करना बंद कर देती है। कई बार एक-दो घंटे तक वितरण नहीं हो पाता। सर्वर चालू होने के बाद भीड़ बढ़ जाती है और शाम पांच बजे तक सभी किसानों का नंबर नहीं आ पाता।
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किसानों का कहना है कि खेती के सबसे व्यस्त समय में उन्हें खेत छोड़कर पूरे दिन खाद केंद्र पर इंतजार करना पड़ता है। इससे मजदूरी का नुकसान भी होता है और खेत का काम भी प्रभावित होता है। खाद विक्रेताओं का कहना है कि वे भी मजबूर हैं क्योंकि ई-पॉस मशीन के बिना खाद वितरण संभव नहीं है।
बांसी के किसान रामऔतार यादव ने बताया कि सुबह साढ़े नौ बजे समिति पहुंचा था। करीब दो घंटे सर्वर नहीं चला। बाद में भीड़ बढ़ गई और शाम तक नंबर नहीं आया। बिना खाद लौटना पड़ा।
इटवा के राम अवध का कहना है कि धान की फसल में यूरिया डालने का समय निकल रहा है। हर दूसरे दिन केंद्र का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
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सिद्धार्थनगर। खरीफ सीजन में धान की फसल को समय पर खाद उपलब्ध न होने से किसानों की फसल मुरझाने लगी है। सबसे बड़ी जरूरत होने के बाद भी खाद केंद्रों पर ई-पॉस मशीन की तकनीकी खामियां और वितरण का समय सीमा किसानों की परेशानी बढ़ा रहे हैं।
उनका कहना है कि सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक ही ई-पॉस मशीन के जरिये खाद और बीज का वितरण होता है। इस बीच यदि सर्वर डाउन हो जाए तो बिक्री पूरी तरह रुक जाती है। नतीजा यह है कि घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी कई किसानों को बिना खाद के लौटना पड़ता है।
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जिले की साधन सहकारी समितियों और निजी उर्वरक केंद्रों पर इन दिनों सुबह से ही किसानों की लंबी कतार लग रही है। ई-पॉस मशीन पर आधार सत्यापन के बाद ही खाद मिलती है। नेटवर्क या सर्वर में दिक्कत आते ही मशीन काम करना बंद कर देती है। कई बार एक-दो घंटे तक वितरण नहीं हो पाता। सर्वर चालू होने के बाद भीड़ बढ़ जाती है और शाम पांच बजे तक सभी किसानों का नंबर नहीं आ पाता।
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किसानों का कहना है कि खेती के सबसे व्यस्त समय में उन्हें खेत छोड़कर पूरे दिन खाद केंद्र पर इंतजार करना पड़ता है। इससे मजदूरी का नुकसान भी होता है और खेत का काम भी प्रभावित होता है। खाद विक्रेताओं का कहना है कि वे भी मजबूर हैं क्योंकि ई-पॉस मशीन के बिना खाद वितरण संभव नहीं है।
बांसी के किसान रामऔतार यादव ने बताया कि सुबह साढ़े नौ बजे समिति पहुंचा था। करीब दो घंटे सर्वर नहीं चला। बाद में भीड़ बढ़ गई और शाम तक नंबर नहीं आया। बिना खाद लौटना पड़ा।
इटवा के राम अवध का कहना है कि धान की फसल में यूरिया डालने का समय निकल रहा है। हर दूसरे दिन केंद्र का चक्कर लगाना पड़ रहा है।