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Siddharthnagar News: त्योहार में तस्करों की बहार, सामान कर रहे बाॅर्डर पार

Mon, 14 Oct 2024 11:34 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 14 Oct 2024 11:34 PM IST
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Smugglers are out during the festival, goods are being smuggled across the border
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। सीमा पर पटाखे ही नहीं, बल्कि कपड़ा, चीनी, चांदी सहित अन्य पदार्थों व वस्तुओं की भी धड़ल्ले से तस्करी हो रही है। तस्करी के पीछे दीपावली और छठ पर्व माना जा रहा है। त्योहार पर मांग को देखते हुए तस्कर पटाखे, चीनी, भारतीय कपड़ाें, सोने-चांदी समेत अन्य सामानों को पहले ही बार्डर पार पहुंचा कर जमाखोरी कर रहे हैं, जिसे दीपावली से दो तीन दिन पहले बिक्री कर भारी मुनाफा कमा सकें।
हाल ही में बार्डर पर अलीगढ़वा कस्बे में सर्च अभियान में एक दुकान से पटाखा बरामद हुआ था। शनिवार को सीमावर्ती क्षेत्र के कोटिया में तस्करी कर ले जाए जा रहे पटाखों में विस्फोट से दो नेपाली युवक घायल हो गए थे।
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बार्डर पर जब तस्करी के बारे में जानकारी ली गई तो कपड़ा, चीनी, मटर की तस्करी होने की बात सामने आ रही है। दबी जुबान से कुछ दुकानदारों ने कहा कि तस्कर सामान उस पार पहुंचा देते हैं, इसलिए त्योहार में कमाई कम हो रही है।
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अगर तस्करी के जरिए नेपाल में सामान न जाए तो वहां से ग्राहक यहीं पर आकर खरीद करते हैं। इससे उन्हें भी फायदा होता है और यहां के व्यापारियों को भी, लेकिन तस्करों के हावी होने से बाजार पर बुरा असर पड़ रहा है। वहीं, अलीगढ़वा कस्बे में रहने वाली एक कारोबारी ने कहा कि पिछले साल पटाखे से विस्फोट हुआ। तीन लोगों की जान चली गई थी, लेकिन लोग मान नहीं रहे हैं। इन दिनों से सबसे अधिक जोर पटाखे की तस्करी पर है।

पटाखा में पांच गुना कमाई : ककरहवा कस्बे में दुकान करने वाले मुनीर ने बताया कि नेपाल में पटाखा नहीं बनाया जाता है इसलिए वहां पटाखे की अधिक डिमांड रहती है। यहां 10 रुपये में बिकने वाले की पटाखा की कीमत 50 रुपये हो जाती है। पांच गुना कमाई के चक्कर में तस्कर यहां से पटाखे ले जाते हैं।
एक बार पिकअप और ट्रक से पार कर लें तो लाखों में कमाई होती है इसलिए दशहरा से पटाखे की तस्करी शुरू हो जाती है।
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