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Siddharthnagar News: गोंद बनाने में खपाया जा रहा यूरिया, प्लाईवुड फैक्टरियों पर खुफिया नजर
Sun, 04 Jan 2026 11:54 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 04 Jan 2026 11:54 PM IST
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भारत नेपाल सीमा ककरहवा में गस्त करते एसएसबी और पुलिस के जवान। स्रोत विज्ञप्ति
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सिद्धार्थनगर। नेपाल जाने वाला यूरिया सिर्फ खेतों में नहीं बल्कि प्लाइवुड फैक्टरियों में गोंद बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है। दुकानदार से लेकर कारोबारी तक के बीच में कई चैनल इस काम में लगे हैं। संगठित गिरोह इसके जरिये मोटी कमाई कर रहे हैं। बाॅर्डर से जुड़े सूत्रों के मुताबिक भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के कपिलवस्तु जिले में स्थित प्लाईवुड फैक्टरियों में रेजिन (गोंद) निर्माण के लिए भारतीय यूरिया खाद के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके लिए सीमा क्षेत्र में तस्करी बढ़ गई है।
बीते माह नेपाल में खुनुवां बाॅर्डर इलाके में नेपाल की जांच एजेंसी ने स्थित एक प्लाईवुड की फैक्टरी से 181 बोरी यूरिया जब्त किया था, जो भारतीय यूरिया था। इसके अलावा नेपाल में फैक्टरी से यूरिया की बरामदगी हो चुकी है। नेपाल के पुरुषोत्तमपुर, बहादुरगंज, गणेशपुर, जवाभारी, पिपरी और चंद्रौटा क्षेत्र की प्लाईवुड फैक्ट्रियों में यूरिया की लगातार मांग के चलते भारत से नेपाल की ओर अवैध तस्करी में तेजी इजाफा देखा जा रहा है।
आपूर्ति बढ़ी संकट तो जांच और निगरानी पर जोर: समितियों और दुकानों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया भेजे जाने के बाद भी समितियों और दुकानों पर किल्लत और मारामारी के बीच शासन ने अन्य खपत को देखते हुए जांच और कार्रवाई पर जोर दिया है। अब यूरिया कैसे खप रहा है। इसे कहां-कहां इस्तेमाल किया जा सकता है, इसकी जांच की जा रही है। इन खपत वाली फैक्टरी और अन्य गोदामों पर भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर है। समावर्ती जनपद में यूरिया तस्करी को लेकर शासन ने सख्त रुख अपनाया है।
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नेपाल बॉर्डर से सटे इलाकों में संभावित खपत वाले ठिकानों को चिह्नित कर स्पेशल टीमों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। आशंका है कि जांच आगे बढ़ते ही सीमा पार तक फैले बड़े गिरोह का पर्दाफाश हो सकता है। डिमांड कम होने के बावजूद यूरिया की कालाबाजारी और तस्करी का नेटवर्क शासन के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक सीमावर्ती क्षेत्र में बड़े पैमाने पर संचालित प्लाईवुड फैक्ट्रियां तस्करी की कड़ी में अहम कड़ी बनकर उभरी हैं। इससे पहले नेपाल की प्लाईवुड फैक्ट्रियों में दो अलग-अलग मामलों में 300 से अधिक बोरी भारतीय यूरिया पकड़ी जा चुकी है। यही नहीं, स्थानीय स्तर पर भी कुछ खाद्य पदार्थों और अन्य अवैध उपयोग में यूरिया के इस्तेमाल की सूचनाएं मिल रही हैं। इसे देखते हुए शासन ने हर बिंदु पर निगरानी बढ़ाने के आदेश दिए हैं।
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बीते माह नेपाल में खुनुवां बाॅर्डर इलाके में नेपाल की जांच एजेंसी ने स्थित एक प्लाईवुड की फैक्टरी से 181 बोरी यूरिया जब्त किया था, जो भारतीय यूरिया था। इसके अलावा नेपाल में फैक्टरी से यूरिया की बरामदगी हो चुकी है। नेपाल के पुरुषोत्तमपुर, बहादुरगंज, गणेशपुर, जवाभारी, पिपरी और चंद्रौटा क्षेत्र की प्लाईवुड फैक्ट्रियों में यूरिया की लगातार मांग के चलते भारत से नेपाल की ओर अवैध तस्करी में तेजी इजाफा देखा जा रहा है।
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आपूर्ति बढ़ी संकट तो जांच और निगरानी पर जोर: समितियों और दुकानों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया भेजे जाने के बाद भी समितियों और दुकानों पर किल्लत और मारामारी के बीच शासन ने अन्य खपत को देखते हुए जांच और कार्रवाई पर जोर दिया है। अब यूरिया कैसे खप रहा है। इसे कहां-कहां इस्तेमाल किया जा सकता है, इसकी जांच की जा रही है। इन खपत वाली फैक्टरी और अन्य गोदामों पर भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर है। समावर्ती जनपद में यूरिया तस्करी को लेकर शासन ने सख्त रुख अपनाया है।
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नेपाल बॉर्डर से सटे इलाकों में संभावित खपत वाले ठिकानों को चिह्नित कर स्पेशल टीमों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। आशंका है कि जांच आगे बढ़ते ही सीमा पार तक फैले बड़े गिरोह का पर्दाफाश हो सकता है। डिमांड कम होने के बावजूद यूरिया की कालाबाजारी और तस्करी का नेटवर्क शासन के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक सीमावर्ती क्षेत्र में बड़े पैमाने पर संचालित प्लाईवुड फैक्ट्रियां तस्करी की कड़ी में अहम कड़ी बनकर उभरी हैं। इससे पहले नेपाल की प्लाईवुड फैक्ट्रियों में दो अलग-अलग मामलों में 300 से अधिक बोरी भारतीय यूरिया पकड़ी जा चुकी है। यही नहीं, स्थानीय स्तर पर भी कुछ खाद्य पदार्थों और अन्य अवैध उपयोग में यूरिया के इस्तेमाल की सूचनाएं मिल रही हैं। इसे देखते हुए शासन ने हर बिंदु पर निगरानी बढ़ाने के आदेश दिए हैं।