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Siddharthnagar News: जन्म लेते ही बच्चों को आ रहे झटके...एसएनसीयू में बढ़े नवजात

Thu, 26 Sep 2024 04:18 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 26 Sep 2024 04:18 AM IST
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siddharthnagar news
-मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में प्रतिदिन आ रहे सात से आठ नवजात
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बदली दिनचर्या और खान पान की शैली बदलने से जन्म बाद नहीं रोने वाले नवजातों की संख्या बढ़़ रही है। इसमें नवजात काे झटके की समस्या आ रही है। इस तरह के बच्चे मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में प्रतिदिन सात से आठ पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार 4-5 साल पहले की अपेक्षा नवजातों को नहीं रोने, मां के पेट में गंदा पानी पीने और झटके आने की समस्या बढ़ रही है।

माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में 18 बेड का एसएनसीयू वार्ड है, जिसमें बुधवार को 27 बच्चे भर्ती मिले, बेड कम होने से एक बेड पर दो-दो बच्चे भर्ती किए गए हैं। डॉक्टरों के अनुसार इसमें सबसे अधिक भर्ती बच्चे जन्म के तत्काल बाद नहीं रोने से झटके के बीमारी के कारण भर्ती किए गए हैं। पिछले एक माह से इस तरह के केस प्रतिदिन आ रहे हैं।
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डॉक्टरों के अनुसार इसका प्रमुख कारण डिलेवरी के समय बच्चे का गंदा पानी पीना, अप्रशिक्षित महिलाओं के सहयोग से प्रसव कराने व जरूरी उपकरण के नहीं होने होना है। इससे बच्चे प्रसव के दौरान अपने द्वारा त्यागे गए मूत्र को ग्रहण कर लेते हैं, जिससे बच्चों में इस तरह की समस्या होती है। ऐसी स्थिति में बेहतर इलाज समय से नहीं मिलने पर बच्चे के जान को भी खतरा रहता है। वहीं डिलेवरी कराने वाले स्थान पर इमरजेंसी सेवा होने से बच्चों को समय से एंबुलेंस सेवा नहीं मिलने से हालत बिगड़ जाती है। ऐसी स्थिति में कभी-कभी नवजात की जान भी चली जाती है।
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प्रसव केंद्र पर होने वाली सुविधाएं
प्रसव केंद्र पर इमरजेंसी सेवा के लिए तत्कालीन सुविधाएं होना जरूरी है, जिससे गर्भवती महिलाओं को इमरजेंसी सेवा के समय किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। प्रसव केंद्र पर रेडिएंट वार्मर, एंबुबैग, ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, शक्सन मशीन, ऑक्सीजन सुविधा वाला एंबुलेंस, के साथ एक प्रशिक्षित पीडीआरटीसन डिलीवरी के समय उपस्थित होनी चाहिए। संवाद
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बोले बाल रोग विशेषज्ञ
कुछ महिलाओं के प्रसव में समस्या अधिक होती है। इससे बच्चा फंस जाता है। और डिलीवरी कराने में देरी हो जाती है। इससे बच्चे गंदा पानी पी लेते हैं, जबकि गलत खान पान व अन्य समस्याओं से महिलाओं का नार्मल प्रसव कराने में परेशानी होती है। महिला के डिलेवरी का समय पूरा होने पर उसे संबंधित स्वास्थ्य केंद्र पर लेकर जाना चाहिए, इससे नवजातों को बीमार होने की समस्या कम होगी।

-डॉ. नम्रता, एचओडी, बाल रोग विभाग
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महिला को गर्भ धारण करने के बाद नियमित रूप से चेकअप करवाते रहना चाहिए। गर्भवती महिला के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान दे, जबकि प्रसव कराते समय ट्रेंड स्टाफ के साथ प्रसव सुविधाएं भी उपस्थित हो उसी जगह पर प्रसव कराएं, जबकि इमरजेंसी समस्या होने पर बच्चे को आक्सीजन रहित एंबुलेंस के माध्यम से ही नवजात को स्वास्थ्य केंद्र ले जाए।
-डॉ. संजय अग्रहरि, बाल रोग विभाग
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