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Siddharthnagar News: बिना पुलिस वेरिफिकेशन के नए संचालित नहीं होंगे विद्यालय वाहन
Tue, 22 Sep 2026 11:17 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 22 Sep 2026 11:17 PM IST
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- स्कूल वाहनों की सुरक्षा को लेकर शासन सख्त, प्रशासन कराएगा निर्देशों का पालन
- अनट्रेंड चालकों के हाथ में स्टेयरिंग से हादसों का खतरा, जिले में सामने आ चुकी हैं कई घटनाएं
- संभागीय परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में 700 से अधिक स्कूली वाहन पंजीकृत
सिद्धार्थनगर। स्कूल के बच्चों को घर से विद्यालय और विद्यालय से घर तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी अब केवल वाहन की फिटनेस और कागजात तक सीमित नहीं रहेगी। विद्यालय में नए चालक की तैनाती से पहले उसका पुलिस सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। शासन ने स्कूली वाहनों से होने वाले सड़क हादसों को गंभीरता से लेते हुए चालकों के सत्यापन पर जोर दिया है। प्रशासन की ओर से इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। बिना पुलिस सत्यापन के नए चालक को स्कूली वाहन की स्टेयरिंग सौंपने की अनुमति नहीं होगी।
स्कूल के वाहनों से होने वाले हादसों को देखते हुए शासन ने यह कदम उठाया है। कई बार मानक और अनुभव की अनदेखी कर अनट्रेंड चालकों से बच्चों को लाने-ले जाने का काम कराया जाता है। चालक की लापरवाही या वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाने की स्थिति में हादसे का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में चालक की पहचान, पृष्ठभूमि और पुलिस सत्यापन को विद्यालय वाहन संचालन की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है।
इस व्यवस्था से विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। बिना जांचे-परखे किसी चालक को बच्चों की जिम्मेदारी सौंपना आसान नहीं होगा। संभागीय परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार जिले में 700 से अधिक विद्यालय वाहन पंजीकृत हैं। इनमें बस, वैन और अन्य श्रेणी के वाहन शामिल हैं। स्कूल वाहनों की जांच के दौरान मुख्य रूप से परमिट, फिटनेस और अन्य जरूरी अभिलेखों पर जोर दिया जाता रहा है। शासन के नए निर्देश के तहत चालक के पुलिस सत्यापन को भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया गया है।
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सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसमें कागजात की जांच के साथ चालक के बारे में पूरी जानकारी ली जा रही है।
- संजय कुमार सिंह, एआरटीओ
विद्यालय प्रबंधन की भी होगी जिम्मेदारी
नए चालक की तैनाती से पहले उसका पुलिस सत्यापन कराना विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी। प्रशासन और परिवहन विभाग की ओर से होने वाली जांच में इस बिंदु को भी शामिल किया जाएगा। नियमों की अनदेखी मिलने पर संबंधित विद्यालय और वाहन संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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- अनट्रेंड चालकों के हाथ में स्टेयरिंग से हादसों का खतरा, जिले में सामने आ चुकी हैं कई घटनाएं
- संभागीय परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में 700 से अधिक स्कूली वाहन पंजीकृत
सिद्धार्थनगर। स्कूल के बच्चों को घर से विद्यालय और विद्यालय से घर तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी अब केवल वाहन की फिटनेस और कागजात तक सीमित नहीं रहेगी। विद्यालय में नए चालक की तैनाती से पहले उसका पुलिस सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। शासन ने स्कूली वाहनों से होने वाले सड़क हादसों को गंभीरता से लेते हुए चालकों के सत्यापन पर जोर दिया है। प्रशासन की ओर से इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। बिना पुलिस सत्यापन के नए चालक को स्कूली वाहन की स्टेयरिंग सौंपने की अनुमति नहीं होगी।
स्कूल के वाहनों से होने वाले हादसों को देखते हुए शासन ने यह कदम उठाया है। कई बार मानक और अनुभव की अनदेखी कर अनट्रेंड चालकों से बच्चों को लाने-ले जाने का काम कराया जाता है। चालक की लापरवाही या वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाने की स्थिति में हादसे का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में चालक की पहचान, पृष्ठभूमि और पुलिस सत्यापन को विद्यालय वाहन संचालन की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है।
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इस व्यवस्था से विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। बिना जांचे-परखे किसी चालक को बच्चों की जिम्मेदारी सौंपना आसान नहीं होगा। संभागीय परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार जिले में 700 से अधिक विद्यालय वाहन पंजीकृत हैं। इनमें बस, वैन और अन्य श्रेणी के वाहन शामिल हैं। स्कूल वाहनों की जांच के दौरान मुख्य रूप से परमिट, फिटनेस और अन्य जरूरी अभिलेखों पर जोर दिया जाता रहा है। शासन के नए निर्देश के तहत चालक के पुलिस सत्यापन को भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया गया है।
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सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसमें कागजात की जांच के साथ चालक के बारे में पूरी जानकारी ली जा रही है।
- संजय कुमार सिंह, एआरटीओ
विद्यालय प्रबंधन की भी होगी जिम्मेदारी
नए चालक की तैनाती से पहले उसका पुलिस सत्यापन कराना विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी। प्रशासन और परिवहन विभाग की ओर से होने वाली जांच में इस बिंदु को भी शामिल किया जाएगा। नियमों की अनदेखी मिलने पर संबंधित विद्यालय और वाहन संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।