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Siddharthnagar News: चंद्रशेखर के सानिध्य में रामलखन ने लड़ी आजादी की जंग

Tue, 12 Aug 2025 11:00 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 12 Aug 2025 11:00 PM IST
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Siddharthnagar News: Ramlakhan fought the war of independence under the guidance of Chandrashekhar
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम लखन त्रिपाठी। 
बांसी। तहसील क्षेत्र के जीवा गांव निवासी भारत माता के वीर सपूत स्वतंत्रता सेनानी राम लखन त्रिपाठी ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। इसके लिए उन्हें काफी यातना सहनी पड़ी। कई बार जेल भी गए। इन्हें महान क्रांतिकारी अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद का सानिध्य प्राप्त था।
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राम लखन त्रिपाठी का जन्म सन् 1906 में ग्राम-जीवा तहसील-बांसी, अब सिद्धार्थनगर के ब्राह्मण परिवार में हुआ था। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका होने के कारण उनके घर अक्सर ब्रिटिश सरकार की पुलिस पकड़ने के लिए छापा मारी करती थी, लेकिन वह कभी पकड़े नहीं गए। उसके बाद वह क्रांतिकारियों के गढ़ कानपुर पहुंच गए और यहां भी अग्रेजों के विरुद्ध चलाए जा रहे आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने लगे। नौघड़ा कुली बाजार बादशाही नाका कलक्टरगंज आदि में यह काफी लोकप्रिय हो गए। उनकी एक आवाज पर वहां काफी सेनानी इक्ट्ठा हो जाया करते थे। अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद से इनके अच्छे संबंध थे। यही कारण था कि आजाद अपनी मृत्यु से लगभग एक वर्ष पूर्व गोरखपुर के तत्कालीन अत्याचारी अंग्रेज कमिश्नर को मारने के लिए जब गोरखपुर जा रहे थे, तभी खुफिया एजेंसी ने मामले को भांप लिया और कमिश्नर की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी।
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इसका आभास होने पर खलीलाबाद से ही रास्ता बदलकर वह रात में ग्राम जीवा पहुंचे कुछ देर रुकने के बाद वहां से चले गए। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम लखन त्रिपाठी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को वर्ष 1940 डीआईआर में गिरफ्तार कर जिला कारागार कानपुर बंद कर दिया गया फिर यहां से जिला कारागार गाजीपुर भेज दिया गया। इस प्रकार वर्ष 1940 से 1941 वह जेल में रहे। जहां उन्हें बहुत यातनाएं दी गईं। जेल से रिहा होने के बाद कानपुर सीटी बम कांड में वह भूमिगत हो गए और अंग्रेज पुलिस इस वीर क्रांतिकारी को अंग्रेज पुलिस नहीं पकड़ पाई। इन्होंने अंग्रेजी भारत छोड़ो, करो या मरो सहित सभी आंदोलन में बढ़चढ़ का भाग लिया।
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देश आजाद होने के बाद सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की तरह इन्हें भी नैनीताल में खेत देने का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार ने दिया। लेकिन, उन्होंने यह कहकर प्रस्ताव को ठुकरा दिया कि वह भारत माता की आजादी के लिए लड़े थे फार्म हाउस बनाने के लिए नहीं। वर्ष 1962 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम लखन त्रिपाठी का स्वर्गवास हो गया।
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