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सच्चाई और अच्छाई के रास्ते पर चलने की सीख देती है कर्बला : मौलाना जाफरी
Wed, 14 Aug 2024 12:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 14 Aug 2024 12:29 AM IST
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डुमरियागंज। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित इमामबारगाह वक्फ शाह आलमगीर सानी में अंजुमन फरोग मातम की ओर से आयोजित अशरे की सातवीं मजलिस को सोमवार की रात मौलाना सैय्यद जमीर अब्बास जाफरी (ईरान) ने संबोधित कर वाकयाते कर्बला पर बातें कीं। उन्होंने इमाम हुसैन के बताऐ नेकी, भलाई और सच्चाई, इंसाफ के रास्ते पर चलते रहने की लोगों से अपील की।
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना जमीर अब्बास जाफरी ने कहा कि कर्बला एक दर्शगाह और सच्चाई हक, इंसाफ का मदरसा है। वाकयाते कर्बला से नसीहत लेकर हर हक पसंद इंसान अपनी जिंदगी और आखिरत को अच्छी बना सकता है। मौलाना ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत सभी कौम और समुदाय के इंसान के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत है जो हक और सच्चाई, इंसाफ के रास्ते पर चलने का हौसला, माददा (क्षमता) रखता है। मौलाना जाफरी ने मजलिस के जरिए लोगों को इल्म की अहमियत बताते हुए अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा पर ध्यान देने की बात कहीं। मजलिस के आखिर में मौलाना ने हजरत इमाम हुसैन के जांबाज बहादुर भाई हजरत अब्बास की शहादत का मंजर बयान किया। मजलिस से पहले मर्सिया अंबर मेंहदी और उनके सहयोगी ने पढ़ी।
इस दौरान मोहम्मद मेहदी, तसकीन हैदर, तसबीब हसन, मौलाना महफूज, निहाल मौलाना, अजीम हैदर, कसीम रिजवी, काजिम कर्बलाई, कैफी रिजवी, जुहेर, कामयाब मास्टर, जानशीन हैदर, जईम अब्बास, शबाब, काजिम रजा आदि मौजूद रहे।
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मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना जमीर अब्बास जाफरी ने कहा कि कर्बला एक दर्शगाह और सच्चाई हक, इंसाफ का मदरसा है। वाकयाते कर्बला से नसीहत लेकर हर हक पसंद इंसान अपनी जिंदगी और आखिरत को अच्छी बना सकता है। मौलाना ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत सभी कौम और समुदाय के इंसान के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत है जो हक और सच्चाई, इंसाफ के रास्ते पर चलने का हौसला, माददा (क्षमता) रखता है। मौलाना जाफरी ने मजलिस के जरिए लोगों को इल्म की अहमियत बताते हुए अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा पर ध्यान देने की बात कहीं। मजलिस के आखिर में मौलाना ने हजरत इमाम हुसैन के जांबाज बहादुर भाई हजरत अब्बास की शहादत का मंजर बयान किया। मजलिस से पहले मर्सिया अंबर मेंहदी और उनके सहयोगी ने पढ़ी।
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इस दौरान मोहम्मद मेहदी, तसकीन हैदर, तसबीब हसन, मौलाना महफूज, निहाल मौलाना, अजीम हैदर, कसीम रिजवी, काजिम कर्बलाई, कैफी रिजवी, जुहेर, कामयाब मास्टर, जानशीन हैदर, जईम अब्बास, शबाब, काजिम रजा आदि मौजूद रहे।
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