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Siddharthnagar News: फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र मामले में स्वास्थ्यकर्मी संदेह के घेरे में, तलब

Mon, 21 Sep 2026 11:35 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 21 Sep 2026 11:35 PM IST
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Siddharthnagar News: Health worker under scrutiny in fake disability certificate case; summoned
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। दिल्ली पुलिस की जांच में एक और स्वास्थ्यकर्मी संदेह के घेरे में आ गया है। उसे पुलिस ने साक्ष्यों के साथ मोरिस नगर थाने में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। उसे 23 सितंबर को थाने में पहुंचना है। बताया जा रहा है कि संबंधित स्वास्थ्यकर्मी आवश्यक दस्तावेज लेकर दिल्ली के लिए रवाना भी हो चुका है।
पुलिस की डिजिटल जांच और क्रॉस पूछताछ में लेनदेन से जुड़ी अन्य जानकारियां सामने आने की संभावना जताई जा रही है।सीएमओ कार्यालय के वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जयप्रकाश शुक्ल की गिरफ्तारी और फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किए जाने के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, संदिग्धों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।
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मलेरिया निरीक्षक के बाद ईएनटी विभाग में तैनात एक ऑडियोमेट्रिस्ट और अब एक अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी जांच के दायरे में आया है। बताया जा रहा है कि संबंधित स्वास्थ्यकर्मी के बैंक खाते में फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने के एवज में मिलने वाली रकम मंगाए जाने की आशंका है।
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14 सितंबर को भी पहुंची थी दिल्ली पुलिस की टीम : फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र मामले की जांच के सिलसिले में 14 सितंबर को उत्तरी दिल्ली के मोरिस नगर थाने से एक उपनिरीक्षक सिद्धार्थनगर पहुंचे थे।
उन्होंने सीएमओ कार्यालय स्थित अचल प्रशिक्षण केंद्र में दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किए जाने वाले पटल के नोडल अधिकारी के संबंध में जानकारी ली और उनसे मुलाकात की। इसके बाद वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक और दिव्यांगता प्रमाणपत्र पटल के सहायक बाबू जयप्रकाश शुक्ल से पूछताछ में सामने आई जानकारी के आधार पर पुलिस ने संबंधित अभिलेखों और रजिस्टरों की जांच की।
कुछ पुराने और नए दस्तावेजों को देखने के साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों से मौखिक जानकारी भी ली गई। जयप्रकाश शुक्ल से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने ईएनटी विभाग में कान की जांच करने वाले ऑडियोमेट्रिस्ट से भी पूछताछ की थी। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका होने की बात सामने आई थी। काफी देर तक चली पूछताछ के बाद पुलिस टीम वापस लौट गई थी।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान एक अन्य स्वास्थ्यकर्मी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि जयप्रकाश शुक्ल की ओर से फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने के एवज में मिलने वाली रकम संबंधित स्वास्थ्यकर्मी के खाते में मंगाई गई थी। दिल्ली पुलिस के जांच अधिकारी संबंधित स्वास्थ्यकर्मी से इस संबंध में पूछताछ कर चुके हैं।
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