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Siddharthnagar News: सती चरित्र का प्रसंग सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
Thu, 05 Feb 2026 11:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 05 Feb 2026 11:21 PM IST
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- जहां पति का सम्मान न हो, वहां पत्नी को नहीं जाना चाहिए- विनोद शास्त्री
औराताल। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के भलुवाही गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक विनोद शास्त्री ने बताया कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण के नहीं जाना चाहिए। जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे हैं। वहां आपका, अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान न हो। यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए, चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों हो। सती प्रसंग की कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
कथा के दौरान सती चरित्र के प्रसंग को सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि भगवान शिव की बात को न मानकर सती पिता दक्ष के यहां यज्ञ में जाती हैं। वहां उनका और उनके पति का अपमान होता है, जिसके कारण वह अपने आप को अग्नि कुंड में भस्म कर लेती हैं। कथा में उत्तानपाद के वंश में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया, जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया।
परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो, इसके लिए श्रीमद् भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया गया है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंत्र मुग्ध होकर अमृत कथा का रसपान करती रही। इस अवसर पर अश्विनी मिश्रा, शुभम मिश्रा, सिद्धार्थ रवि मिश्रा, सोनू मिश्रा पीहू, गुनगुन, साक्षी मिश्रा सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
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औराताल। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के भलुवाही गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक विनोद शास्त्री ने बताया कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण के नहीं जाना चाहिए। जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे हैं। वहां आपका, अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान न हो। यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए, चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों हो। सती प्रसंग की कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
कथा के दौरान सती चरित्र के प्रसंग को सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि भगवान शिव की बात को न मानकर सती पिता दक्ष के यहां यज्ञ में जाती हैं। वहां उनका और उनके पति का अपमान होता है, जिसके कारण वह अपने आप को अग्नि कुंड में भस्म कर लेती हैं। कथा में उत्तानपाद के वंश में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया, जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया।
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परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो, इसके लिए श्रीमद् भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया गया है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंत्र मुग्ध होकर अमृत कथा का रसपान करती रही। इस अवसर पर अश्विनी मिश्रा, शुभम मिश्रा, सिद्धार्थ रवि मिश्रा, सोनू मिश्रा पीहू, गुनगुन, साक्षी मिश्रा सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
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