{"_id":"69162559ee142614ba0ed9c3","slug":"siddharthnagar-news-combine-machine-running-in-paddy-field-without-reaper-siddharthnagar-news-c-227-1-sdn1003-148085-2025-11-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: बिना रीपर धान के खेत में चल रही कंबाइन मशीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: बिना रीपर धान के खेत में चल रही कंबाइन मशीन
Fri, 14 Nov 2025 12:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 14 Nov 2025 12:07 AM IST
विज्ञापन
भारतभारी क्षेत्र में कंबाइन मशीनें में बिना रीपर के इस्तेमाल की जा रही। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतभारी। नगर पंचायत और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में धान की कटाई जोर-शोर से चल रही है। हालांकि, अधिकांश कंबाइन मशीनें बिना रीपर के इस्तेमाल की जा रही हैं, जिससे खेतों में बड़ी मात्रा में पराली बच रही है। यह पराली बाद में किसानों के लिए एक बड़ी समस्या बन जा रही है, जिसे वह जला दे रहे हैं, ऐसे में दूसरे किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसान शिव कुमार, राम करन और अब्दुल समद सहित अन्य किसानों का कहना है कि उनके पास बची हुई पराली को नष्ट करने का कोई सस्ता विकल्प नहीं है। इस मजबूरी के कारण उन्हें पराली जलानी पड़ती है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता कम होती है। प्रशासन की बार-बार अपील के बावजूद ग्रामीण इलाकों में यह समस्या बनी हुई है।
कंबाइन संचालकों ने कृषि विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विभाग की उदासीनता के कारण किसान पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों से वंचित हैं। यदि विभाग समय पर किसानों को ‘’बेस्ट डीकंपोजर’’ उपलब्ध कराए तो पराली को खेत में ही सड़ाकर जैविक खाद में बदला जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
किसान शिव कुमार, राम करन और अब्दुल समद सहित अन्य किसानों का कहना है कि उनके पास बची हुई पराली को नष्ट करने का कोई सस्ता विकल्प नहीं है। इस मजबूरी के कारण उन्हें पराली जलानी पड़ती है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता कम होती है। प्रशासन की बार-बार अपील के बावजूद ग्रामीण इलाकों में यह समस्या बनी हुई है।
विज्ञापन
कंबाइन संचालकों ने कृषि विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विभाग की उदासीनता के कारण किसान पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों से वंचित हैं। यदि विभाग समय पर किसानों को ‘’बेस्ट डीकंपोजर’’ उपलब्ध कराए तो पराली को खेत में ही सड़ाकर जैविक खाद में बदला जा सकता है।
विज्ञापन