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Siddharthnagar News: हादसे के शिकार अब हादसे का इंतजार
Sat, 13 Dec 2025 12:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 13 Dec 2025 12:13 AM IST
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- सड़क के किनारे हादसे के बाद क्षतिग्रस्त परिवहन कोहरे में बढ़ाएंगे मुसीबत
- जनपद में कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हालत में सड़क सेट पड़े हैं वाहन, कोहरे में नहीं आते हैं नजर
-सड़क हादसों में अब तक जा चुकी है 195 की जान कोहरे में और होता है हादसा
सिद्धार्थनगर। ठंड की दस्तक हो चुकी है। दिसंबर माह की शुरू होने के साथ ही तराई ठंड की गिरफ्त में आता जा रहा है। सुबह और शाम में घना कोहरा लोगों के लिए मुसीबत बनने लगा है। ऐसे में सड़क की पटरी आदि न दिखने पर लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं। इन हादसों में क्षतिग्रस्त हो चुके वाहन अब दूसरों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। जनपद में बड़ी संख्या में हादसे के शिकार और खराब वाहन सड़क के किनारे पड़े हैं, जिन्हें नहीं हटाया गया तो यह कोहरा घना होने के साथ जान के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
जनपद की सड़कों पर हादसों के बाद किनारे छोड़ दिए गए क्षतिग्रस्त वाहन अब भी सड़क किनारे पड़े हैं। यह हादसे को दावत दे रहे हैं। हाईवे से लेकर स्टेट हाईवे तक जहां रोजाना करीब 3 लाख स्थानीय वाहन दौड़ते हैं और एक लाख से अधिक बाहरी वाहन जिले में प्रवेश करते हैं, वहां कोहरे के मौसम में ये खराब हालत में पड़े ट्रक, कार और पिकअप किसी भी वक्त बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। दृश्यता घटने के साथ इनकी मौजूदगी सीधे जान पर भारी पड़ रही है। हाईवे के साथ सिद्धार्थनगर-बांसी, डुमरियागंज-बढ़नी स्टेट हाईवे, शोहरतगढ़-इटवा मार्ग सहित कई रूटों पर दर्जनों क्षतिग्रस्त वाहन महीनों से पटरी पर जंग खा रहे हैं, लेकिन न तो पुलिस इन्हें हटाती है और न परिवहन विभाग उनके मालिकों को नोटिस भेजता है। दिन में भी इनकी हालत के कारण दूरी से पहचान मुश्किल होती है जबकि कोहरे में दृश्यता 20-30 मीटर से भी कम रह जाने पर इन वाहनों से हादसे की आशंका बनी रहती है।
जिले में अब तक 195 लोगों की मौत सड़क हादसों में हो चुकी है, ऐसे में कोहरे में खड़े ये वाहन सड़क सुरक्षा को और अधिक संकट में डाल रहे हैं। जनपद में प्रतिदिन लगभग आठ लाख वाहनों का आवागमन होता है, जिनमें से बड़ी संख्या हाईवे पर तेज गति से निकलती है। ऐसे में किनारे खड़ी क्षतिग्रस्त गाड़ियां किसी भी पल चेन-कोलिजन की वजह बन सकती हैं।
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बचाव के उपाय
यातायात से जुड़े लोगों की मानें तो हाईवे पर खराब वाहन मिलने पर 24 घंटे में हटाने का अनिवार्य सिस्टम लागू हो।
खड़े वाहनों पर रिफ्लेक्टर टेप, चेतावनी बोर्ड और रात में लाल लाइट लगाना आवश्यक किया जाए।
दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की तत्काल सूचना के लिए कंट्रोल रूम में अलग हाईवे रिस्पॉन्स यूनिट सक्रिय की जाए।
एनएचएआई और पुलिस की संयुक्त पेट्रोलिंग कोहरे में हर दो घंटे पर अनिवार्य हो।
स्थानीय थानों को जंक वाहनों की रिपोर्टिंग के लिए जवाबदेह बनाया जाए।
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लापरवाही का असर
कोहरे में 20-25 मीटर दृश्यता होने पर दूर खड़ा वाहन बिल्कुल नहीं दिखता, जिससे टक्कर की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। हाईवे पर चेन-कोलिजन के खतरे में 40-50 वाहन तक एक साथ फंस सकते हैं। सड़क पटरी पर वाहन पड़े रहने से सड़क का चौड़ाई कम हो जाती है, ओवरटेकिंग के दौरान खतरा दोगुना हो जाता है। हादसे के बाद कोई विभाग जिम्मेदारी नहीं लेता। पुलिस कहती है मालिक उठाए और मालिक हादसे के बाद गायब होते हैं। और विभागीय कार्रवाई महीनों से नहीं होती।
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यह पहुंचे तो संभल जाएं
सड़क के किनारे हादसे के बाद खराब हाल में पड़े वाहनों से हादसे होने का खतरा है। जनपद में सैकड़ों जगह पर वाहन हैं। लेकिन, चार प्रमुख जगहों की बात करते हैं, जहां हादसे के बाद वाहन पड़े हैं और ठंड में हादसे का कारण बन सकते हैं।
नौगढ़ - बर्डपुर मार्ग पर पुरानी नौगढ़ कस्बे के बाहर से बाईपास निकला हुआ है। जहां सामान्य दिनों में हादसे होते रहे हैं। ठंड और कोहरे में हादसे बढ़ जाते हैं। इस बाईपास पर समाप्ति से पहले हादसे के बाद एक वाहन कई माह से खड़ा है, जो सड़क की पटरी से लगा हुआ है। इस मार्ग पर हजारों की संख्या में वाहन निकलते हैं। ऐसे में यहां पर बड़े हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता है। अगर इस मार्ग से यात्रा करते हैं तो सतर्क होकर रात में निकलें।
लोटन मार्ग पर कबाड़ की दुकान से खतरा
विकास खंड लोटन के खखरा बुजुर्ग मार्ग पर बिना आरटीओ में गाड़ियों में सरेंडर कराए काट दी जातीं है। यहां बड़ी संख्या में सड़क के किनारे वाहन खड़े हैं। सड़क भी टू लेन है और वाहनों का दबाव भी अधिक है। ऐसे में यहां पर हादसे हो सकते हैं। तीसरा ढेकहरी से मड़नी के बीच में पीडब्ल्यूडी रोड के किनारे पंद्रह दिन पलटने के कारण खराब स्थिति में खड़ी है। चार पहिया वाहन लंबे समय से खड़े हैं। ठंड में यहां भी हादसा हो सकता है। चौथा डुमरियागंज राप्ती सेतु के समीप सड़क पर वाहनों का चल रहा मरम्मत कार्य डुमरियागंज से इटवा मार्ग पर गुरु गोरखनाथ तलैया के पास मुख्य सड़क की फुटपाथ पर महीनों से एक ट्रक खड़ी है, जहां हमेशा हादसे का खतरा बना हुआ है।
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बोले जिम्मेदार
लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सड़क के खराब पड़े वाहनों के बारे में जानकारी लेकर संबंधित विभाग के साथ समन्वय स्थापित करके हटाने का काम किया जाएगा।
- अमरेश यादव, प्रभारी यातायात
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- जनपद में कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हालत में सड़क सेट पड़े हैं वाहन, कोहरे में नहीं आते हैं नजर
-सड़क हादसों में अब तक जा चुकी है 195 की जान कोहरे में और होता है हादसा
सिद्धार्थनगर। ठंड की दस्तक हो चुकी है। दिसंबर माह की शुरू होने के साथ ही तराई ठंड की गिरफ्त में आता जा रहा है। सुबह और शाम में घना कोहरा लोगों के लिए मुसीबत बनने लगा है। ऐसे में सड़क की पटरी आदि न दिखने पर लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं। इन हादसों में क्षतिग्रस्त हो चुके वाहन अब दूसरों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। जनपद में बड़ी संख्या में हादसे के शिकार और खराब वाहन सड़क के किनारे पड़े हैं, जिन्हें नहीं हटाया गया तो यह कोहरा घना होने के साथ जान के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
जनपद की सड़कों पर हादसों के बाद किनारे छोड़ दिए गए क्षतिग्रस्त वाहन अब भी सड़क किनारे पड़े हैं। यह हादसे को दावत दे रहे हैं। हाईवे से लेकर स्टेट हाईवे तक जहां रोजाना करीब 3 लाख स्थानीय वाहन दौड़ते हैं और एक लाख से अधिक बाहरी वाहन जिले में प्रवेश करते हैं, वहां कोहरे के मौसम में ये खराब हालत में पड़े ट्रक, कार और पिकअप किसी भी वक्त बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। दृश्यता घटने के साथ इनकी मौजूदगी सीधे जान पर भारी पड़ रही है। हाईवे के साथ सिद्धार्थनगर-बांसी, डुमरियागंज-बढ़नी स्टेट हाईवे, शोहरतगढ़-इटवा मार्ग सहित कई रूटों पर दर्जनों क्षतिग्रस्त वाहन महीनों से पटरी पर जंग खा रहे हैं, लेकिन न तो पुलिस इन्हें हटाती है और न परिवहन विभाग उनके मालिकों को नोटिस भेजता है। दिन में भी इनकी हालत के कारण दूरी से पहचान मुश्किल होती है जबकि कोहरे में दृश्यता 20-30 मीटर से भी कम रह जाने पर इन वाहनों से हादसे की आशंका बनी रहती है।
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जिले में अब तक 195 लोगों की मौत सड़क हादसों में हो चुकी है, ऐसे में कोहरे में खड़े ये वाहन सड़क सुरक्षा को और अधिक संकट में डाल रहे हैं। जनपद में प्रतिदिन लगभग आठ लाख वाहनों का आवागमन होता है, जिनमें से बड़ी संख्या हाईवे पर तेज गति से निकलती है। ऐसे में किनारे खड़ी क्षतिग्रस्त गाड़ियां किसी भी पल चेन-कोलिजन की वजह बन सकती हैं।
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यातायात से जुड़े लोगों की मानें तो हाईवे पर खराब वाहन मिलने पर 24 घंटे में हटाने का अनिवार्य सिस्टम लागू हो।
खड़े वाहनों पर रिफ्लेक्टर टेप, चेतावनी बोर्ड और रात में लाल लाइट लगाना आवश्यक किया जाए।
दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की तत्काल सूचना के लिए कंट्रोल रूम में अलग हाईवे रिस्पॉन्स यूनिट सक्रिय की जाए।
एनएचएआई और पुलिस की संयुक्त पेट्रोलिंग कोहरे में हर दो घंटे पर अनिवार्य हो।
स्थानीय थानों को जंक वाहनों की रिपोर्टिंग के लिए जवाबदेह बनाया जाए।
लापरवाही का असर
कोहरे में 20-25 मीटर दृश्यता होने पर दूर खड़ा वाहन बिल्कुल नहीं दिखता, जिससे टक्कर की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। हाईवे पर चेन-कोलिजन के खतरे में 40-50 वाहन तक एक साथ फंस सकते हैं। सड़क पटरी पर वाहन पड़े रहने से सड़क का चौड़ाई कम हो जाती है, ओवरटेकिंग के दौरान खतरा दोगुना हो जाता है। हादसे के बाद कोई विभाग जिम्मेदारी नहीं लेता। पुलिस कहती है मालिक उठाए और मालिक हादसे के बाद गायब होते हैं। और विभागीय कार्रवाई महीनों से नहीं होती।
यह पहुंचे तो संभल जाएं
सड़क के किनारे हादसे के बाद खराब हाल में पड़े वाहनों से हादसे होने का खतरा है। जनपद में सैकड़ों जगह पर वाहन हैं। लेकिन, चार प्रमुख जगहों की बात करते हैं, जहां हादसे के बाद वाहन पड़े हैं और ठंड में हादसे का कारण बन सकते हैं।
नौगढ़ - बर्डपुर मार्ग पर पुरानी नौगढ़ कस्बे के बाहर से बाईपास निकला हुआ है। जहां सामान्य दिनों में हादसे होते रहे हैं। ठंड और कोहरे में हादसे बढ़ जाते हैं। इस बाईपास पर समाप्ति से पहले हादसे के बाद एक वाहन कई माह से खड़ा है, जो सड़क की पटरी से लगा हुआ है। इस मार्ग पर हजारों की संख्या में वाहन निकलते हैं। ऐसे में यहां पर बड़े हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता है। अगर इस मार्ग से यात्रा करते हैं तो सतर्क होकर रात में निकलें।
लोटन मार्ग पर कबाड़ की दुकान से खतरा
विकास खंड लोटन के खखरा बुजुर्ग मार्ग पर बिना आरटीओ में गाड़ियों में सरेंडर कराए काट दी जातीं है। यहां बड़ी संख्या में सड़क के किनारे वाहन खड़े हैं। सड़क भी टू लेन है और वाहनों का दबाव भी अधिक है। ऐसे में यहां पर हादसे हो सकते हैं। तीसरा ढेकहरी से मड़नी के बीच में पीडब्ल्यूडी रोड के किनारे पंद्रह दिन पलटने के कारण खराब स्थिति में खड़ी है। चार पहिया वाहन लंबे समय से खड़े हैं। ठंड में यहां भी हादसा हो सकता है। चौथा डुमरियागंज राप्ती सेतु के समीप सड़क पर वाहनों का चल रहा मरम्मत कार्य डुमरियागंज से इटवा मार्ग पर गुरु गोरखनाथ तलैया के पास मुख्य सड़क की फुटपाथ पर महीनों से एक ट्रक खड़ी है, जहां हमेशा हादसे का खतरा बना हुआ है।
बोले जिम्मेदार
लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सड़क के खराब पड़े वाहनों के बारे में जानकारी लेकर संबंधित विभाग के साथ समन्वय स्थापित करके हटाने का काम किया जाएगा।
- अमरेश यादव, प्रभारी यातायात