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जूता पहनकर चढ़ाए फूल, नहीं सजा स्तूप
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 29 Dec 2016 10:36 PM IST
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बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते डीएम।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। जिला प्रशासन के अफसरों ने गुरुवार को फिर एक परंपरा तोड़ दी है। स्थापना दिवस पर भगवान बुद्ध की प्रतिमाओं पर जूता पहन कर माल्यार्पण किया। स्तूप पूजन की रस्म अदायगी में भी पांव में जूते पहने रहे। इस दौरान न तो स्तूप की सजावट हुई और न ही जिले के जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया। मनमाने ढंग से हुए इस रस्म अदायगी को लेकर कपिलवस्तु महोत्सव से जुड़े लोगों और बुद्ध के अनुयाइयों ने कड़ी नाराजगी जताई है।
तीन दिवसीय आयोजन स्थगित होने के बाद रस्मी तौर पर स्तूप पूजन व बुद्ध प्रतिमाओं के माल्यार्पण की परंपरा के निर्वहन का फैसला बुधवार की देर शाम तय किया गया। गुरुवार की सुबह साड़ी तिराहे से यह क्रम शुरू हुआ। क्रमवार साड़ी तिराहा, सिद्धार्थ तिराहा, बर्डपुर तिराहा पर स्थापित राजकुमार सिद्धार्थ व भगवान बुद्ध क प्रतिमाओं पर माल्यार्पण हुआ।
लोग तब दंग रह गए, जब उनकी नजर माल्यार्पण करने वाले अफसरों के पैरों पर पड़ी। भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण के दौरान किसी भी अफसर ने जूते उतारे की जहमत नहीं उठाई। बता दें कि अब तक हर बार अफसर जूते उतारकर ही चबूतरे पर चढ़ते और माल्यार्पण करते थे। इस बार ठीक उलट स्थिति थी। यही नहीं स्तूप की रौनक भी गायब थी। न इसकी सजावट हुई थी और न ही साफ-सफाई, जबकि स्थापना दिवस पर स्तूप पहले दीपों से जगमगाता था और फूलों से सजावट होती थी। रस्म अदायगी के नाम पर भी इस उपेक्षा को लेकर लोगों में नाराजगी दिखी। आयोजन के दौरान स्तूप पर न तो सांसद दिखे और न ही कोई अन्य जनप्रतिनिधि। प्रशासन और सरकारी तंत्र के अलावा कुछ चुनिंदा और चहेते चेहरे ही मौजूद रहे।
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तीन दिवसीय आयोजन स्थगित होने के बाद रस्मी तौर पर स्तूप पूजन व बुद्ध प्रतिमाओं के माल्यार्पण की परंपरा के निर्वहन का फैसला बुधवार की देर शाम तय किया गया। गुरुवार की सुबह साड़ी तिराहे से यह क्रम शुरू हुआ। क्रमवार साड़ी तिराहा, सिद्धार्थ तिराहा, बर्डपुर तिराहा पर स्थापित राजकुमार सिद्धार्थ व भगवान बुद्ध क प्रतिमाओं पर माल्यार्पण हुआ।
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लोग तब दंग रह गए, जब उनकी नजर माल्यार्पण करने वाले अफसरों के पैरों पर पड़ी। भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण के दौरान किसी भी अफसर ने जूते उतारे की जहमत नहीं उठाई। बता दें कि अब तक हर बार अफसर जूते उतारकर ही चबूतरे पर चढ़ते और माल्यार्पण करते थे। इस बार ठीक उलट स्थिति थी। यही नहीं स्तूप की रौनक भी गायब थी। न इसकी सजावट हुई थी और न ही साफ-सफाई, जबकि स्थापना दिवस पर स्तूप पहले दीपों से जगमगाता था और फूलों से सजावट होती थी। रस्म अदायगी के नाम पर भी इस उपेक्षा को लेकर लोगों में नाराजगी दिखी। आयोजन के दौरान स्तूप पर न तो सांसद दिखे और न ही कोई अन्य जनप्रतिनिधि। प्रशासन और सरकारी तंत्र के अलावा कुछ चुनिंदा और चहेते चेहरे ही मौजूद रहे।
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