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Siddharthnagar News: संघ के स्वयंसेवकों ने किया पथ संचलन
Fri, 03 Oct 2025 11:15 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 03 Oct 2025 11:15 PM IST
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजय दशमी उत्सव को संबोधित करते सह प्रांत प्रचारक सुरजीत। स्रोत विज्
सिद्धार्थनगर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से नगर पालिका के अवेद्यनाथ सभागार में शुक्रवार को विजयदशमी उत्सव मनाया गया। इसके बाद संघ स्थापना के शताब्दी वर्ष पर पथ संचलन किया गया।
स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए आरएसएस के सह प्रांत प्रचारक सुरजीत ने कहा कि विजयदशमी का उत्सव बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। वैसे तो देशभर में लगभग दो हजार से अधिक उत्सव मनाए जाते हैं, लेकिन संघ द्वारा इनमें से छह उत्सव को मनाने के लिए चुना है। इसी में से एक विजयदशमी उत्सव मनाया जा रहा है। विजयदशमी के दिन 1925 को नागपुर में संघ की स्थापना हुई थी, संघ की स्थापना को सौ वर्ष पूरे हो चुके हैं। आरएसएस के शताब्दी वर्ष में कदम रखने के कारण यह वर्ष काफी महत्वपूर्ण है। इसलिए हमें अत्यधिक उत्साह व सक्रियता से देशहित व हिंदू हित के कार्य में लगना चाहिए। हमें देश विरोधी ताकतों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। प्रत्येक स्वयंसेवक को संघ के राष्ट्र धर्म प्रथम सिद्धांत का अनुसरण करना चाहिए। समाज हित में संगठन की शक्ति का संचयन करते हुए सामाजिक समरसता एवम विनम्रता का विशेष ध्यान रखना होगा। उन्होंने बताया कि भगवान श्री राम की तरह हमें भी अपने जीवन में आदर्श चरित्र एवं अच्छा आचरण करते हुए समाज को संगठित करते हुए बुराई पर अच्छाई की विजय प्राप्त करनी है। उन्होंने संघ द्वारा अपनाए गए पंच परिवर्तन में स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण, सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन की योजना के बारे में स्वयंसेवकों को बताया। े
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स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए आरएसएस के सह प्रांत प्रचारक सुरजीत ने कहा कि विजयदशमी का उत्सव बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। वैसे तो देशभर में लगभग दो हजार से अधिक उत्सव मनाए जाते हैं, लेकिन संघ द्वारा इनमें से छह उत्सव को मनाने के लिए चुना है। इसी में से एक विजयदशमी उत्सव मनाया जा रहा है। विजयदशमी के दिन 1925 को नागपुर में संघ की स्थापना हुई थी, संघ की स्थापना को सौ वर्ष पूरे हो चुके हैं। आरएसएस के शताब्दी वर्ष में कदम रखने के कारण यह वर्ष काफी महत्वपूर्ण है। इसलिए हमें अत्यधिक उत्साह व सक्रियता से देशहित व हिंदू हित के कार्य में लगना चाहिए। हमें देश विरोधी ताकतों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। प्रत्येक स्वयंसेवक को संघ के राष्ट्र धर्म प्रथम सिद्धांत का अनुसरण करना चाहिए। समाज हित में संगठन की शक्ति का संचयन करते हुए सामाजिक समरसता एवम विनम्रता का विशेष ध्यान रखना होगा। उन्होंने बताया कि भगवान श्री राम की तरह हमें भी अपने जीवन में आदर्श चरित्र एवं अच्छा आचरण करते हुए समाज को संगठित करते हुए बुराई पर अच्छाई की विजय प्राप्त करनी है। उन्होंने संघ द्वारा अपनाए गए पंच परिवर्तन में स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण, सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन की योजना के बारे में स्वयंसेवकों को बताया। े
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