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कोमा में हैं रामबरन, जिंदगी बचाने को मदद की दरकार

Fri, 27 May 2022 11:42 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 27 May 2022 11:42 PM IST
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Rambaran is in coma, needs help to save life
कोमा में हैं रामबरन, जिंदगी बचाने को मदद की दरकार
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शोहरतगढ़। सड़क दुर्घटना में सात लोगों की मौत से गम में डूबे स्थानीय थाने के महला गांव के रामबरन की जिंदगी बचाने के लिए मदद की दरकार की है। हादसे के बाद गंभीर स्थिति में बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के आईसीयू में भर्ती कराए गए रामबरन कोमा में हैं। उनकी हालत में सुधार नहीं होने से परिवार की चिंता बढ़ गई है। इलाज के सामान्य खर्च को उठाने के लिए भी उनके पास रुपये की कमी हो गई है।
जिले के जोगिया कोतवाली क्षेत्र के कटया के पास 21 मई की रात में हुए हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी, जबकि रामबरन सहित चार लोग घायल हो गए थे। इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर मृतकों आश्रितों को दो-दो लाख रुपये एवं घायलों को 50-50 हजार रुपये आर्थिक मदद देने की घोषणा की थी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शोक संवेदन व्यक्त करते हुए घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए थे। रामबरन के भाई के बगेदू के अनुसार, अब तक उन्हें कोई सरकारी मदद नहीं मिली है।
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भाई की हालत गंभीर होने से चिंता है। भतीजे दीपक के पास मात्र एक हजार रुपये बचे हैं। आईसीयू में दवा तो अंदर मिल रही है, लेकिन कुछ जांच बाहर से करानी पड़ रही है। यहां रहने और खाने के लिए रकम खर्च करनी पड़ी है।
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शुरूआती दौर में गांव के कुछ लोगों ने आर्थिक मदद दी थी, लेकिन अब मददगार नजर नहीं आ रहे हैं। गांव के लोग बता रहे हैं कि कई नेता आए थे, लेकिन वे सांत्वना देकर चले गए। कुछ मदद करते तो बड़ी राहत मिलती।
पत्नी की हो चुकी है मौत, बेटी को पाला
बगेदू ने दूरभाष पर बताया कि रामबरन की 19 साल की बेटी निशा जब डेढ़ साल की थी तो उनकी पत्नी की मौत हो गई। उसके बाद रामबरन ने घर मजदूरी करते हुए बेटी को पाला। बेटी के लिए मां की कमी नहीं होने दी। उनके परिवार में इकलौती बेटी है। परिवार के लोग उनके साथ खड़े हैं, लेकिन वे गरीब लोग हैं। बहुत कुछ नहीं कर सकते। बेटी का रो-रोकर बुरा हाल है। शुक्रवार को ही उसे मेडिकल कॉलेज से उसे घर भेजा हूं। यह बताकर बगेदू फफक पड़े। कहा कि भगवान रामबरन को बचा लें, नहीं तो बेटी के हाथ पीले कैसे होंगे।

भतीजा की मौत से ही टूट चूका हूं
बगेदू ने बताया कि हादसे में उनके भाई राजाराम के 17 साल के बेटे रवि की मौत से ही उनका परिवार टूट चुका है। भाई को बचाने के लिए वह मेडिकल कॉलेज में हैं। भाई रामबरन ने जितना कमाया, उससे दो जून का चूल्हा ही जलाते रह गए। उनके हिस्से में एक कमरे का मकान है और पांच मंडा खेत।
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