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शबरी प्रेम व बालि वध का हुआ मंचन
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भनवापुर क्षेत्र के सहिजवार गांव में रामलीला का मंचन करते कलाकार। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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शबरी प्रेम व बालि वध का हुआ मंचन
भनवापुर। ब्लॉक क्षेत्र के सहिजवार में रामलीला के सातवें दिन शबरी मिलन, राम-सुग्रीव मित्रता व बालि वध का मंचन किया गया।
पहले दृश्य में प्रभु श्रीराम, भाई लक्ष्मण के साथ माता सीता की खोज में जंगल में भटक रहे हैं। दूर से उन्हें जय श्रीराम की आवाज सुनाई दी और पास जाने पर देखते हैं कि वृद्ध महिला कुटी में प्रभु नाम का जप कर रही है। कुटी में प्रवेश करते ही महिला अपना परिचय प्रभु भक्त शबरी के रूप में दी और उसके बाद भक्त और भगवान के भावपूर्ण वार्तालाप से दर्शक भाव-विभोर हो गए।
भगवान श्रीराम ने भ्राता लक्ष्मण के साथ आश्रम में प्रवेश किया तो शबरी उनके चरणों में लेट गई। उसने जल से पांव पखारकर आसन पर बैठाया और सरस कंद, मूल, फल अर्पण किए। प्रभु ने प्रेम पूर्वक उसे ग्रहण किया और शबरी को नौ प्रकार की भक्ति के बारे में बताया। श्रीराम के प्रेम के वशीभूत शबरी उन्हें अपने झूठे बेर खिलाए। वहीं ऋष्यमूक पर्वत पर विराजमान वानर राज सुग्रीव राम और लक्ष्मण को आते देख डर जाते हैं। हनुमान जी को ब्राह्मण का रूप धारण कर उनके बारे में पता लगाने के लिए भेजते हैं।
प्रभु श्रीराम को पहचान कर हनुमान जी उनके पैरों में गिर पड़ते हैं। दोनों भाइयों को कंधे पर बैठाकर सुग्रीव के पास ले जाते हैं। श्रीराम के पूछने पर सुग्रीव ने अपने भाई बाली के बारे में बताया कि स्त्री व धन लेकर मुझे भगा दिया है इसलिए मैं यहां निवास करता हूं। बाली को मारने के लिए राम-लक्ष्मण चले जाते हैं। दोनों भाइयों की सूरत एक समान होने से वह बाली को मार नहीं पाते। बाद में सुग्रीव के गले में मोती की माला पहनाकर बाली का वध करते हैं। सुग्रीव को किष्किंधा का राजा और बाली पुत्र अंगद को युवराज बना दिया जाता है। इस अवसर पर समिति के डाइरेक्टर रामप्रताप चौधरी, प्रदीप चौधरी, बुद्धि सागर, उत्तम प्रसाद, अंकित, मनीष कुमार, बालगोविंद, रामजीत गिरी, रामजीत यादव, सूरज कुमार, राजू, रामदेव गुप्ता ने भगवान की आरती की।
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भनवापुर। ब्लॉक क्षेत्र के सहिजवार में रामलीला के सातवें दिन शबरी मिलन, राम-सुग्रीव मित्रता व बालि वध का मंचन किया गया।
पहले दृश्य में प्रभु श्रीराम, भाई लक्ष्मण के साथ माता सीता की खोज में जंगल में भटक रहे हैं। दूर से उन्हें जय श्रीराम की आवाज सुनाई दी और पास जाने पर देखते हैं कि वृद्ध महिला कुटी में प्रभु नाम का जप कर रही है। कुटी में प्रवेश करते ही महिला अपना परिचय प्रभु भक्त शबरी के रूप में दी और उसके बाद भक्त और भगवान के भावपूर्ण वार्तालाप से दर्शक भाव-विभोर हो गए।
भगवान श्रीराम ने भ्राता लक्ष्मण के साथ आश्रम में प्रवेश किया तो शबरी उनके चरणों में लेट गई। उसने जल से पांव पखारकर आसन पर बैठाया और सरस कंद, मूल, फल अर्पण किए। प्रभु ने प्रेम पूर्वक उसे ग्रहण किया और शबरी को नौ प्रकार की भक्ति के बारे में बताया। श्रीराम के प्रेम के वशीभूत शबरी उन्हें अपने झूठे बेर खिलाए। वहीं ऋष्यमूक पर्वत पर विराजमान वानर राज सुग्रीव राम और लक्ष्मण को आते देख डर जाते हैं। हनुमान जी को ब्राह्मण का रूप धारण कर उनके बारे में पता लगाने के लिए भेजते हैं।
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प्रभु श्रीराम को पहचान कर हनुमान जी उनके पैरों में गिर पड़ते हैं। दोनों भाइयों को कंधे पर बैठाकर सुग्रीव के पास ले जाते हैं। श्रीराम के पूछने पर सुग्रीव ने अपने भाई बाली के बारे में बताया कि स्त्री व धन लेकर मुझे भगा दिया है इसलिए मैं यहां निवास करता हूं। बाली को मारने के लिए राम-लक्ष्मण चले जाते हैं। दोनों भाइयों की सूरत एक समान होने से वह बाली को मार नहीं पाते। बाद में सुग्रीव के गले में मोती की माला पहनाकर बाली का वध करते हैं। सुग्रीव को किष्किंधा का राजा और बाली पुत्र अंगद को युवराज बना दिया जाता है। इस अवसर पर समिति के डाइरेक्टर रामप्रताप चौधरी, प्रदीप चौधरी, बुद्धि सागर, उत्तम प्रसाद, अंकित, मनीष कुमार, बालगोविंद, रामजीत गिरी, रामजीत यादव, सूरज कुमार, राजू, रामदेव गुप्ता ने भगवान की आरती की।
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