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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में रेडॉन जियो स्टेशन स्थापित
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में रेडॉन जियो स्टेशन स्थापित
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) मुंबई की ओर से रेडॉन जियो स्टेशन स्थापित कर दिया गया है। इससे भूकंप तरंगों का आकलन संभव हो सकेगा। राष्ट्रीय परियोजना के तहत विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित स्टेशन ने काम करना भी शुरू कर दिया है।
कुलपति प्रो. हरि बहादुर श्रीवास्तव ने बताया कि रेडॉन जियो स्टेशन का भार 100 किलोग्राम है। इसके लिए परिसर में दो गुणे दो मीटर की जगह ली गई है। इसे ऐसी जगह पर स्थापित किया गया है, जहां सूर्य की पूरी रोशनी मिलती रहे। कुलसचिव राकेश कुमार ने कहा कि इस तरह की पहल से विश्वविद्यालय को भी लाभ मिलेगा। इस सेंटर का डाटा सीधे मुंबई बार्क में पहुंच जाएगा, जिससे क्षेत्र में भूमि के नीचे की रेडियोधर्मी तत्वों से संबंधित कई जानकारियां मिलती रहेंगी।
डाटा को कई तरह के शोध करने में मदद मिलेगी और भविष्य में कई अन्य परियोजनाओं को लेकर भी यह स्टेशन काम आएगा। इसके अलावा नेपाल हिमालय की तलहटी में उत्पन्न भूकंप तरंगों की जानकारी मिल सकेगी। भविष्य में फिजिक्स, जियो फिजिक्स, सिस्मोलॉजी से संबंधित शोध में मदद मिल सकेगी। इसके अलावा रेडिएशन के खतरों की जानकारी होने पर बचाव के उपाय किए जा सकेंगे।
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) मुंबई की ओर से रेडॉन जियो स्टेशन स्थापित कर दिया गया है। इससे भूकंप तरंगों का आकलन संभव हो सकेगा। राष्ट्रीय परियोजना के तहत विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित स्टेशन ने काम करना भी शुरू कर दिया है।
कुलपति प्रो. हरि बहादुर श्रीवास्तव ने बताया कि रेडॉन जियो स्टेशन का भार 100 किलोग्राम है। इसके लिए परिसर में दो गुणे दो मीटर की जगह ली गई है। इसे ऐसी जगह पर स्थापित किया गया है, जहां सूर्य की पूरी रोशनी मिलती रहे। कुलसचिव राकेश कुमार ने कहा कि इस तरह की पहल से विश्वविद्यालय को भी लाभ मिलेगा। इस सेंटर का डाटा सीधे मुंबई बार्क में पहुंच जाएगा, जिससे क्षेत्र में भूमि के नीचे की रेडियोधर्मी तत्वों से संबंधित कई जानकारियां मिलती रहेंगी।
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डाटा को कई तरह के शोध करने में मदद मिलेगी और भविष्य में कई अन्य परियोजनाओं को लेकर भी यह स्टेशन काम आएगा। इसके अलावा नेपाल हिमालय की तलहटी में उत्पन्न भूकंप तरंगों की जानकारी मिल सकेगी। भविष्य में फिजिक्स, जियो फिजिक्स, सिस्मोलॉजी से संबंधित शोध में मदद मिल सकेगी। इसके अलावा रेडिएशन के खतरों की जानकारी होने पर बचाव के उपाय किए जा सकेंगे।
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