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Siddharthnagar News: दूध में मैदा और अरारोट मिलाकर तैयार हो रहा पनीर
Wed, 27 Nov 2024 11:05 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 27 Nov 2024 11:05 PM IST
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दुकान में रखा हुआ पनीर।
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फैजाबाद से भी आ रहा पनीर, गांवों में बनाकर शहरों में हो रही बिक्री नहीं हो रही मिलावट की जांच
पौने आठ लाख लीटर ही दूध का उत्पादन, 12 लाख लीटर से अधिक की खपत
फोटो--
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। दूध की कीमत में इजाफा होने के कारण मिलावटी पनीर व दूध की खपत बढ़ गई है। दूध में मैदा और अरारोट मिलाकर पनीर तैयार किया जा रहा है। सहालग में यह धंधा और फल-फूल रहा है। जिले में फैजाबाद से भी सस्ता पनीर चिह्नित जगहों पर उतर रहा है। जबकि गांवों में भी बनाए हुए पनीर शहर-कस्बों में बेचे जा रहे हैं। पनीर में मिलावट की जांच कम होने से लोगों की सेहत पर खराब असर पड़ रहा है।
सरकारी आंकड़े के अनुसार औसतन पौने आठ लाख लीटर ही दूध का उत्पादन जिले में होता है, लेकिन खपत करीब 12 लाख लीटर से अधिक की होती हैं। शादी का दौर शुरू होते ही सामान्य दिनों से अधिक दूध और पनीर की मांग हो जाती है। लगभग हर घर के कार्यक्रम में पनीर हिस्सा होता है। ऐसे में जरूरत की पूर्ति के लिए धंधेबाज पाउडर निर्मित पनीर तैयार करते हैं उसी में कुछ पड़ोसी जनपद बिहार से शुद्ध दूध से बने पनीर की बिक्री करते हैं।
जानकार बताते हैं कि अरारोट व वनस्पति घी से बन रहा मिलावटी पनीर मिलावटी पनीर में दूध के तत्व न के बराबर होते हैं। जबकि पनीर की गुणवत्ता पता करने पर एक हलवाई ने बताया कि पनीर बनाने के लिए अरारोट, सोया पाउडर और वनस्पति घी को क्रीम निकले स्प्रेटा दूध में तैयार किया जाता है। इसके बाद इस दूध को टांटरी डालकर फाड़ा जाता। तब मलमल के कपड़े में बांधकर इसके ऊपर भारी पत्थर रखकर जमाया जाता है। इसकी पहचान भी आसानी से नहीं होती है। इसलिए मिलावटखोर इसका फायदा उठा रहे हैं। इस कारण नकली उत्पाद बनाने का यह धंधा खुलेआम चल रहा है। हालांकि खाद्य विभाग अधिकारियों का मानना है कि वह समय-समय पर कार्रवाई को मूर्त रूप देते हैं।
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इस तरह बनाया जा रहा मिलावटी दूध
जिले में व्यापक स्तर पर नकली दूध का कारोबार चल रहा है। कारोबारी दस लीटर नकली दूध तैयार करने एक लीटर असली दूध में एक लीटर रिफाइंड एवं सौ ग्राम लिक्विड डिटर्जेंट डालते हैं। इस मिश्रण को फेंटने के बाद 8 लीटर पानी मिलाते हैं। घोल तैयार होने पर 10 लीटर सिंथेटिक दूध मिलता है। दस लीटर दूध की कीमत 115 रुपए तक आती है। जबकि यह दूध गांवों में 50 और बाजार में 65 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से बेचा जा रहा है। जबकि इसको और भी असली का रूप देने के लिए दूध में कास्टिक सोडा, नमक, पानी और चीनी मिलाई जा रही है। सूरजमुखी का तेल, खाद्य तेल, स्प्रेटा दूध, कैस्टर ऑयल आदि की मिलावट भी किया जाता है।
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रोजाना चाय में ही इस्तेमाल होते हैं हजारों लीटर दूध
शहर में एक अनुमान के मुताबिक, तीन हजार से अधिक चाय विक्रेता हैं। इनमें से कुछ छोटे स्टाल लगाने वाले तो कुछ बड़े रेस्टोरेंट व स्टाइलिश चाय विक्रेता शामिल हैं। प्रति दुकान पर रोजाना औसतन 500 से एक हजार कप चाय बेची जा रही हैं। यदि एक दुकान पर रोजाना कम से कम पांच लीटर दूध की जरूरत पड़ती है तो करीब दस हजार लीटर दूध केवल चाय बनाने में इस्तेमाल हो जाता है। इसके अलावा शादी, जन्मदिन व अन्य पार्टियां अलग हैं
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जब दूध महंगा है तो कैसे मिल सकता सस्ता पनीर
खाद्य से जुड़े जानकार बताते हैं कि एक किलो पनीर बनाने के लिए कम से कम पांच लीटर दूध की जरूरत पड़ती है। एक लीटर दूध 60 से 68 रुपये में आता है। एक किलो पनीर के लिए 300 रुपये से अधिक का दूध लगता है। प्रोसेसिंग चार्ज अलग से शामिल है। ऐसे में पनीर की न्यूनतम लागत 300 से 350 रुपये प्रतिकिलो पहुंच जाती है। ऐसे में सस्ते पनीर में मिलावट संभावना रहती है और समझदार लोगों को इसे समझना चाहिए।
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ऐसे पहचानें मिलावटी पनीर
-चिकनई न होने से पनीर बेहद खुरदुरा होगा।
-हाथ से मसलने पर पनीर टूटता चला जाएगा।
-फाई करने के बाद पनीर रबर की तरह हो जाता है।
-चाकू से काटने पर भी पनीर टूट जाएगा।
-हाथ से मसलने में मिलावटी पनीर में चिकनाई नहीं होगी।
कोट
मिलावटी पनीर खाने से लीवर से जुड़ी कई बीमारियां हो सकती है। अल्सर के अलावा लीवर कैंसर भी मिलावटी पनीर खाने से हो सकता है। इसलिए बिना जांच किए पनीर न खाए, इसके अधिक सेवन से गैस की बीमारी भी हमेशा के लिए बनी रहती है। लोगों को खान-पान को लेकर सचेत रहना चाहिए।
-डॉ. गौरव दुबे, मेडिसिन विभाग
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कोट
ताजा पनीर खरीदें। यदि पनीर जाता है तो वहा मुलायम होगा। दूध के अलावा अन्य किसी तरह की गंध नहीं आएगी। कई कारोबारी दूध की मलाई निकालकर पनीर बनाते हैं। कुछ मिल्क पाउडर भी पनीर बनाते हैं। ऐसे पनीर में बसा कम होती है। इसको मानक विहीन माना जाता है। ऐसे पनीर खरीदने से बचें।
आरएल यादव, सहायक आयुक्त खाद्य
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पौने आठ लाख लीटर ही दूध का उत्पादन, 12 लाख लीटर से अधिक की खपत
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। दूध की कीमत में इजाफा होने के कारण मिलावटी पनीर व दूध की खपत बढ़ गई है। दूध में मैदा और अरारोट मिलाकर पनीर तैयार किया जा रहा है। सहालग में यह धंधा और फल-फूल रहा है। जिले में फैजाबाद से भी सस्ता पनीर चिह्नित जगहों पर उतर रहा है। जबकि गांवों में भी बनाए हुए पनीर शहर-कस्बों में बेचे जा रहे हैं। पनीर में मिलावट की जांच कम होने से लोगों की सेहत पर खराब असर पड़ रहा है।
सरकारी आंकड़े के अनुसार औसतन पौने आठ लाख लीटर ही दूध का उत्पादन जिले में होता है, लेकिन खपत करीब 12 लाख लीटर से अधिक की होती हैं। शादी का दौर शुरू होते ही सामान्य दिनों से अधिक दूध और पनीर की मांग हो जाती है। लगभग हर घर के कार्यक्रम में पनीर हिस्सा होता है। ऐसे में जरूरत की पूर्ति के लिए धंधेबाज पाउडर निर्मित पनीर तैयार करते हैं उसी में कुछ पड़ोसी जनपद बिहार से शुद्ध दूध से बने पनीर की बिक्री करते हैं।
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जानकार बताते हैं कि अरारोट व वनस्पति घी से बन रहा मिलावटी पनीर मिलावटी पनीर में दूध के तत्व न के बराबर होते हैं। जबकि पनीर की गुणवत्ता पता करने पर एक हलवाई ने बताया कि पनीर बनाने के लिए अरारोट, सोया पाउडर और वनस्पति घी को क्रीम निकले स्प्रेटा दूध में तैयार किया जाता है। इसके बाद इस दूध को टांटरी डालकर फाड़ा जाता। तब मलमल के कपड़े में बांधकर इसके ऊपर भारी पत्थर रखकर जमाया जाता है। इसकी पहचान भी आसानी से नहीं होती है। इसलिए मिलावटखोर इसका फायदा उठा रहे हैं। इस कारण नकली उत्पाद बनाने का यह धंधा खुलेआम चल रहा है। हालांकि खाद्य विभाग अधिकारियों का मानना है कि वह समय-समय पर कार्रवाई को मूर्त रूप देते हैं।
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इस तरह बनाया जा रहा मिलावटी दूध
जिले में व्यापक स्तर पर नकली दूध का कारोबार चल रहा है। कारोबारी दस लीटर नकली दूध तैयार करने एक लीटर असली दूध में एक लीटर रिफाइंड एवं सौ ग्राम लिक्विड डिटर्जेंट डालते हैं। इस मिश्रण को फेंटने के बाद 8 लीटर पानी मिलाते हैं। घोल तैयार होने पर 10 लीटर सिंथेटिक दूध मिलता है। दस लीटर दूध की कीमत 115 रुपए तक आती है। जबकि यह दूध गांवों में 50 और बाजार में 65 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से बेचा जा रहा है। जबकि इसको और भी असली का रूप देने के लिए दूध में कास्टिक सोडा, नमक, पानी और चीनी मिलाई जा रही है। सूरजमुखी का तेल, खाद्य तेल, स्प्रेटा दूध, कैस्टर ऑयल आदि की मिलावट भी किया जाता है।
रोजाना चाय में ही इस्तेमाल होते हैं हजारों लीटर दूध
शहर में एक अनुमान के मुताबिक, तीन हजार से अधिक चाय विक्रेता हैं। इनमें से कुछ छोटे स्टाल लगाने वाले तो कुछ बड़े रेस्टोरेंट व स्टाइलिश चाय विक्रेता शामिल हैं। प्रति दुकान पर रोजाना औसतन 500 से एक हजार कप चाय बेची जा रही हैं। यदि एक दुकान पर रोजाना कम से कम पांच लीटर दूध की जरूरत पड़ती है तो करीब दस हजार लीटर दूध केवल चाय बनाने में इस्तेमाल हो जाता है। इसके अलावा शादी, जन्मदिन व अन्य पार्टियां अलग हैं
जब दूध महंगा है तो कैसे मिल सकता सस्ता पनीर
खाद्य से जुड़े जानकार बताते हैं कि एक किलो पनीर बनाने के लिए कम से कम पांच लीटर दूध की जरूरत पड़ती है। एक लीटर दूध 60 से 68 रुपये में आता है। एक किलो पनीर के लिए 300 रुपये से अधिक का दूध लगता है। प्रोसेसिंग चार्ज अलग से शामिल है। ऐसे में पनीर की न्यूनतम लागत 300 से 350 रुपये प्रतिकिलो पहुंच जाती है। ऐसे में सस्ते पनीर में मिलावट संभावना रहती है और समझदार लोगों को इसे समझना चाहिए।
ऐसे पहचानें मिलावटी पनीर
-चिकनई न होने से पनीर बेहद खुरदुरा होगा।
-हाथ से मसलने पर पनीर टूटता चला जाएगा।
-फाई करने के बाद पनीर रबर की तरह हो जाता है।
-चाकू से काटने पर भी पनीर टूट जाएगा।
-हाथ से मसलने में मिलावटी पनीर में चिकनाई नहीं होगी।
कोट
मिलावटी पनीर खाने से लीवर से जुड़ी कई बीमारियां हो सकती है। अल्सर के अलावा लीवर कैंसर भी मिलावटी पनीर खाने से हो सकता है। इसलिए बिना जांच किए पनीर न खाए, इसके अधिक सेवन से गैस की बीमारी भी हमेशा के लिए बनी रहती है। लोगों को खान-पान को लेकर सचेत रहना चाहिए।
-डॉ. गौरव दुबे, मेडिसिन विभाग
कोट
ताजा पनीर खरीदें। यदि पनीर जाता है तो वहा मुलायम होगा। दूध के अलावा अन्य किसी तरह की गंध नहीं आएगी। कई कारोबारी दूध की मलाई निकालकर पनीर बनाते हैं। कुछ मिल्क पाउडर भी पनीर बनाते हैं। ऐसे पनीर में बसा कम होती है। इसको मानक विहीन माना जाता है। ऐसे पनीर खरीदने से बचें।
आरएल यादव, सहायक आयुक्त खाद्य