फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   online education in siddharthnagar

घर में नहीं है आटा, छात्र कैसे भराएं इंटरनेट का डाटा

Fri, 03 Jul 2020 06:27 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2020 06:27 PM IST
विज्ञापन
online education in siddharthnagar
घर में नहीं आटा, कैसे भराएं डाटा
विज्ञापन

ऑनलाइन पढ़ाई में अभिभावकों को आड़े आ रही रकम की कमी
महानगरों से लौटने वाले खुद बेरोजगार, परिवार चलाएं या डाटा डलवाएं
शासन ने परिषदीय विद्यालय में ऑनलाइन पढ़ाई की कवायद शुरू की
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। कोरोना के संक्रमण को देखते हुए परिषदीय विद्यालय भी बंद हैं। विद्यालय बंद होने के बाद बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शासन ने प्राइवेट विद्यालयों की तरह परिषदीय विद्यालय में भी ऑनलाइन पढ़ाई की कवायद शुरू की और शिक्षकों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। मगर सरकार की यह योजना उन नौनिहालों के लिए बेकार है, जिनके यहां भूख मिटाने की चुनौती है। ऐसे में वह स्मार्ट फोन कहां से लाएं और उसे डाटा कहां से भराएं और पढ़ाई करें। ऐसे में बच्चों के शिक्षा के लिए शासन और प्रशासन को दूसरा रास्ता ढूंढने की जरूरत है।
सूबे की सरकार परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के लिए रोज नए प्रयोग कर रही है। लोगों का सरकारी विद्यालयों के प्रति रुझान बढ़े विद्यालयों के अंग्रेजी मीडियम में विकसित करने के साथ ही प्राइवेट विद्यालयों की तरह से स्मार्ट क्लॉस भी चलवा रही है। जिससे ग्रामीण स्तर की प्रतिभाओं को आगे आने और शिक्षित बनने का अवसर मिल सके। कोरोना महामारी को देखते हुए स्कूल, कॉलेज सब बंद हैं। निजी विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई को देखते हुए शासन ने परिषदीय विद्यालयों में भी ऑनलाइन पढ़ाई की कवायद शुरू की है। मगर इस व्यवस्था को लाभ बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। परिषदीय विद्यालय में अपने बच्चों को भेजने वाले अभिभावकों से बात की गई तो उन्होंने व्यवस्था पर ही सवाल खड़ा कर दिया। बढ़नी ब्लॉक क्षेत्र के एक गांव निवासी चंद्रभान, रामकुमार, चैतू और मो. इलियास के बच्चे उनके गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में पढ़ते हैं। इन्होंने बताया कि विद्यालय बंद हुए दो माह से अधिक का समय बीत चुका है। स्कूल बंद हैं और बच्चे घरों पर हैं। लोग कह रहे थे कि मोबाइल पर पढ़ाई हो रही है। यहां दो माह से बेरोजगार हुए बैठे हैं। भोजन के प्रबंध करने में काफी समस्या है। घर में आटा का प्रबंध करें कि वीडियो वाला मोबाइल में डाटा भराएं। बच्चों की शिक्षा भगवान भरोसे है। प्रभारी बीएसए एडी बेसिक कृपाशंकर वर्मा ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम सफल भी है। मोबाइल के साथ-साथ रेडियो और दूरदर्शन के जरिए पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। कुछ समस्याएं आ रही हैं जो शासन के संज्ञान लाया गया है।
विज्ञापन

जिले में विद्यालयों की संख्या
बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 1924 प्राथमिक विद्यालय हैं और 743 पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में ढाई लाख से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पेट भरें की मोबाइल का डाटा
कुछ अभिभावकों ने नाम नहीं छापने की शर्त बोला कि लॉकडाउन में शहर छोड़ देना पड़ा। रोजगार छूट गया है। पहले पेट भरा जाए, अगर जीवित रहे तो बच्चे पढ़ेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed