फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Not taking lessons from accidents, tractor-trolleys running fearlessly

Siddharthnagar News: हादसों से नहीं ले रहे सबक, बेधड़क चल रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली

Mon, 26 Feb 2024 01:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 26 Feb 2024 01:17 AM IST
विज्ञापन
Not taking lessons from accidents, tractor-trolleys running fearlessly
सिद्धार्थनगर। ड्राईविंग का हाल यह है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली पर खलासी का कार्य करते हुए लोग स्टेयरिंग पकड़ ले रहे हैं। उनके पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस है और न ही प्रशिक्षित हैं। ऐसे में उनके स्टेयरिंग पकड़ने पर ट्रैक्टर-ट्रॉली से हादसे हो रहे हैं। क्योंकि खेत और गांव में चलने वाले अप्रशिक्षित चालक जब सड़क पर चढ़ते हैं तो गाड़ी के संतुलन पर ध्यान नहीं रहता है और कान फाडू साउंड लगा लेते हैं, कौन आगे है और कौन पीछे वाहन चालक है। इसे नहीं देखते हैं और थोड़ा सा संतुलन खोए तो हादसा हो जाता है।
विज्ञापन

जिले में इस प्रकार की कई घटनाएं हो चुकी हैं। अभी दो फरवरी की रात बांसी कस्बे में बाइक सवार युवक को ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कुचल दिया। इस हादसे में उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इन हादसों से भी जिम्मेदार सबक नहीं ले रहे हैं और। न तो ट्रैक्टर-ट्रॉली चलाने वालों की जांच करते हैं और न ही कार्रवाई। ऐसे में कासगंज जैसे हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन


कृषि कार्य में होता है पंजीकरण

टै्रक्टर-ट्रॉली मुख्य रूप से कृषि कार्य के उपयोग में लाया जाता है। खेत की जुताई से लेकर अन्य खेती से जुड़े कार्य किए जाते हैं। एआरटीओ में उसका पंजीकरण होता है। वहीं, ट्रैक्टर के साथ ट्रॉली चलाने के लिए अलग से परमिट होती है। लेकिन देखा जाए तो अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रॉली चल रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


बांसी कोतवाली क्षेत्र के बांसी कस्बे में दो फरवरी की रात मिट्टी लादकर जा रहा ट्रैक्टर-ट्रॉली बाइक सवार को टक्कर मार दी और गिरने के बाद उसे कुचलते हुए निकल गया। इस हादसे में उसकी जान चली गई। चालक के खिलाफ लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने से मौत सहित अन्य धारा में केस दर्ज किया गया है।

ट्रैक्टर-ट्रॉली चपेट में आकर चली गई दो किशोरों की जान

भवानीगंज थाना क्षेत्र में एक दिसंबर 2023 को ट्रैक्टर-ट्रॉली ने दो किशोरों को चपेट में ले लिया था। इस हादसे में दोनों की जान चली गई थी। दोनों भवालीगंज थाना क्षेत्र के रहने वाले थे।

ट्रॉली पलटने से हुई मौत

जोगिया कोतवाली क्षेत्र के महादेवा नानकार गांव के पास वर्ष 2020 में भूसा लदा ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गया। इस हादसे में एक युवक की दबकर मौत हो गई थी।

चालक की दबकर हो गई मौत

उसका थाना क्षेत्र एक गांव के पास एक वर्ष २०२२ में ही एक युवक ठेकेदार के यहां टै्रक्टर- ट्रॉली लेकर जा रहा था। टै्रक्टर अनियंत्रित होकर बांध के नीचे जाकर पलट गई और वह उसके नीचे दब गया। इस हादसे में उसकी मौत हो गई। यह तो महज नजीर है, इस प्रकार की कई घटनाएं घट चुकी हैं।

पंजीकृत इतने, सड़क पर दौड़ते हैं सभी

सहायक संभागीय परिवहन विभाग के आकड़ों के मुताबिक जिले में २० हजार से अधिक ट्रैक्टर कृषि कार्य के लिए पंजीकृत हैं। लेकिन ट्रॉली के साथ ईंट भट्ठे पर 35 ट्रैक्टर-ट्रॉली पंजीकृत हैं। देखा जाए तो जिले के हर गांव में चार से छह ट्रैक्टर-ट्रॉली मिल जाएंगे। हजारों की संख्या में चल रहे इन वाहनों पर किसी की नजर नहीं है।

गांव से निकले सड़क पर तो हुआ हादसा

कभी खलासी का कार्य करने वाले युवा देखते ही देखते ही स्टेयरिंग पकड़ लेते हैं। जब यह स्टेयरिंग पकड़ते हैं तो सड़क पर निकलने के बाद हवा से बात करने लगते हैं। ट्रैक्टर पर साउंड लगाते हैं तो उनकी चाल बदल जाती है। इसके साथ ही अधिकांश नशा करते हैं और नशे में वाहन चलाते हैं। ऐसे में हादसा होता है। अधिकांश ट्रॉली हादसे में चालक के नशे में होने की बात सामने आती है।

नाबालिग और दिव्यांग चलाते हैं वाहन

ग्रामीण क्षेत्र में अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रॉली नाबालिग चलाते हैं। वह खेत की जुताई से लेकर धान लाने और ले जाने का कार्य करते हैं। साथ ही जब गेहूं की कटाई होती है तो भूसा भी बनाने पर अधिकांश वही कार्य देखे जाते हैं। इसमें दिव्यांग भी अछूता नहीं है। कई वाहनों पर दिव्यांग को चलाते हुए देख सकते हैं।

बालू और कोटे का राशन ढोने में होता है अधिक उपयोग

ट्रैक्टर-ट्रॉली का प्रयोग मौजूदा समय में गांव में बंटने वाले राशन की ढुलाई के साथ ही बालू को ढोने के प्रयोग में लाया जा रहा है। गर्मी के सीजन में मिट्टी की ढुलाई के साथ भूसा बनाने वाली मशीन पर चलाता है।

चलाते हुए उम्र ढ़ल गई नहीं बनवाया लाइसेंस

गांव में अकसर यही होता है देखते ही देखते वाहन पर खलासी का कार्य करने वाला स्टेयरिंग पकड़ लेता है। अधिकांश तो ऐसे में मिल जाएंगे कि चलाते हुए उम्र ढल गई, लेकिन अभी तक लाइसेंस नहीं बनवा पाए। जोगिया क्षेत्र के निवासी रामहित की उम्र 50 वर्ष है। वह ट्रैक्टर चलाने के माहिर हैं। खेत की जुताई से लेकर ईंट भट्ठों पर गाड़ी दौड़ चुके हैं। रामहित ने बताया कि लाइसेंस की कभी जरूरत ही नहीं पड़ी है।


ट्रैक्टर-ट्रॉली सवारी ढोने के कार्य के लिए नहीं हैं। अगर चल रहे हैं तो संबंधित विभाग को निर्देश देकर चेकिंग करवाई जाएगी। बिना लाइसेंस और बिना पंजीकरण के चलने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

-उमाशंकर, एडीएम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed