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सामाजिक दूरी का पालन करते हुए अदा करेंगे नमाज

Wed, 12 May 2021 10:25 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 12 May 2021 10:25 PM IST
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Moon was not seen, Eid will be accepted to Zuma
नहीं हुआ चांद का दीदार, जुमा को मनेगी ईद
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जुमा को घरों में अदा की जाएगी ईद की नमाज
सादगीपूर्वक मनाई जाएगी ईद की खुशियां
संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी। पाक रमजान में बुधवार को ईद के चांद का दीदार नहीं हुआ। लिहाजा तीस के चांद के मुताबिक जुमा को ईद मनाई जाएगी। जुमा के दिन मस्जिदों में चंद लोग इबादत करेंगे, जबकि माह-ए-रमजान में रोजा रखने वाले अन्य लोग घरों में ही ईद की नमाज अदा करेंगे। कोरोना संक्रमण के कारण ईद का पर्व सादगीपूर्वक मनाई जाएगी।
कोरोना संक्रमण के कारण इस बाद ईद की बाजार नहीं सजी। जिन बाजारों में ईद के दो दिन पहले देर रात तक चहल पहल रहती थी, वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। यहीं कारण है कि घरों में ईद की मीठी सेवइयां ही रिश्तों में मिठास घोलेगी। विभिन्न प्रकार के पकवानों में इस बार कुछ कमी रहेगी। कोरोना संक्रमण के कारण लोगों ने सादगी पूर्वक ईद मनाने का निर्णय लिया है, क्योंकि अपनी और अपनों की जान की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। हालांकि ईद के दिन मस्जिदों के आसपास सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात रहेगी।
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बाटेंगे जकात और फितरा
ईद उल फितर का मतलब है कि अपनी खुशी में दूसरों को शामिल करना। रमजान माह का रोजा रखने व इबादत करने के बाद ईद का त्योहार आता है। ईद उल फितर का पर्व इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि हम इस खुशी में इन्हें भी शामिल करें, जो बेबस, लाचार व गरीब हैं, इसलिए इस्लाम धर्म मानने वालों को यह निर्देश है कि ईद उल फितर की नमाज से पहले जकात व फितरा गरीबों में बांट दें। जिससे गरीब व लाचार भी ईद की खुशी में शामिल हो सकें।
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खुुशियों के लिए मुकर्रर है ईद
अरबी कैलेंडर के अनुसार आज से लगभग 1430 हिजरी पूर्व सऊदी अरब के मदीना में पहली बार ईद का पर्व मनाया गया था। तभी से पूरी दुनिया के इस्लाम धर्म के अनुयायी रमजान माह की समाप्ति व शव्वाल माह के पहले दिन ईद उल फितर का त्योहार मनाते हैं। हदीस अबू दाऊद के अनुसार जब नबी ए करीम हजरत मोहम्मद साहब मक्का से मदीना हिजरत करके आए तो देखा कि दो दिन त्योहार मनाते हैं, जिसमें खेलकूद, ढोल, मंजीरा बजाने आदि का आयोजन होता है। इस पर उन्होंने लोगों से पूछा कि यह त्योहार आप लोग किस खुशी में मनाते हैं, वहां मौजूद साहब ए कराम ने बताया कि परंपरा के अनुसार यह पर्व मनाते हैं। यह सुनने के नबी ए करीम ने फरमाया कि इससे बेहतर अल्लाह ने दो दिन ईद उल फितर व ईद उल अजहा खुशी मनाने के लिए मुकर्रर किया है।
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