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हमारी बारी कब आएगी साहब, 12 बजे तक नश्ता नहीं मिला
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जिला अस्पताल के मातृ शिशु भवन में करेक्टिव सर्जरी के लिए आए दिब्यांग जमीन पर बैठे
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
फोटो- 53 से 59
कार्यक्रम दिव्यांगों का, मंत्री अंदर दिव्यांग बाहर
जिला अस्पताल के महिला मातृ शिशु चिकित्सालय में करेक्टिव सर्जरी शिविर का आयोजन
ठंड में जमीन पर बैठकर करते रहे खाने का इंतजार
करेक्टिव सर्जरी शिविर में मंत्री के सामने दिखी अव्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। बदहाल व्यवस्था के बीच प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्री के सामने करेक्टिव सर्जरी शिविर का उद्घाटन शुक्रवार को हुआ। 20 से 25 मिनट स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह रहे, लेकिन इस दौरान दिव्यांगों को अंदर भटकने तक नहीं दिया गया। कड़ाके की ठंड में आठ बजे से दिव्यांग बच्चे और उनके परिजनों को प्रशासन ने बुला लिया था। लेकिन 12 बजे तक उन्हें एक गिलास पानी तक नसीब नहीं हुआ। दिव्यांग बच्चे और परिजन जमीन पर बैठे रहे। मंत्री की आवभगत के बाद प्रशासन ने दिव्यांग बच्चों की सुध ली। इसमें भी कुछ बच्चे और परिजन यह कहते रहे कि आखिर हमारी बारी कब आएगी। लेकिन बच्चों और परिजनों की एक भी नहीं सुनी गई।
शासन के निर्देश पर शुक्रवार को जिला अस्पताल के महिला मातृ शिशु चिकित्सालय में महिला अस्पताल में करेक्टिव सर्जरी शिविर का आयोजन किया गया था। दोपहर 12 बजे स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। 20-25 मिनट तक मंत्री कार्यक्रम में रहे। लेेकिन उन्होंने एक भी दिव्यांग बच्चों की तरफ जाने की जहमत नहीं उठाई। यहां तक की कई दिव्यांग बच्चे और परिजन उनसे मिलना चाहे, तो प्रशासन और उनके साथ रहे सुरक्षा कर्मियों ने दिव्यांगों और उनके परिजनों को रोक लिया। इस बीच मंत्री का काफिला सीधे मंच पर पहुुंच गया। स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने इसके बाद करीब 15 मिनट तक सरकार की योजनाओं का बखान किया। कहा कि सरकार देश व प्रदेश दोनों के विकास को लेकर अग्रसर है। दिव्यांगजन समाज की मुख्यधारा से जुड़ सके। इसके लिए तमाम प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसी के तहत दो दिवसीय करेक्टिव सर्जरी शिविर का आयोजन किया गया है। उपलब्धियों का बखान करने के बाद मंत्री बिना दिव्यांग बच्चों से मिले बिना ही निकल गए। कार्यक्रम के दौरान सदर विधायक श्यामधनी राही, डीएम दीपक मीणा, एसपी विजय ढुल, सीएमओ डॉ. सीमा राय, एसडीएम सदर उमेश चंद्र निगम, सीओ दिलीप कुमार सिंह, भाजपा नेता बृजबिहारी मिश्र, कन्हैया पासवान, अरविंद उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
व्हीलचेयर नहीं मिला तो कंधे पर टांग लिया
शिविर में दिव्यांगजनों की सर्जरी की जानी थी। लेकिन उनके लिए इंतजाम न के बराबर थे। जबकि अधिकारियों और मंत्री के लिए शानदार व्यवस्था किए गए थे। मजबूरन परिजन कंधे पर लादकर दिव्यांग बच्चों को डॉक्टर के पास ले जाते दिखे। यहां तक कई ने ट्राईसाइकिल की मांग की, लेकिन उन्हें प्रशासन ने मंत्री का हवाला देकर डांटकर भगा दिया गया। इसकी वजह से स्थिति ऐसी रही है कि जो पैरों से चलने में असमर्थ थे, वे व्हीलचेयर न होने के कारण घिसटते हुए अंदर प्रवेश करते नजर आए, लेकिन जिम्मेदारों की नजर इस पर नहीं पड़ी।
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सुबह आठ बजे बिना खाए पीए आ गए
इटवा ब्लॉक के शनिचरा गांव से दिव्यांग बेटी मोनका को लेकर आई महिला ने बताया कि सुबह आठ बजे ही बिना कुछ खाए-पीए अस्पताल लाकर पहुंचा दिया गया। दोपहर के 12 बजे गए, लेकिन नाश्ता और भोजन तो छोड़िए एक गिलास पानी तक नहीं मिला। बांसी ब्लॉक के बलेजिनवा निवासी व्यक्ति दिव्यांग बेटी ज्योति को लेकर पहुंचे थे। बताया कि दिव्यांग बेटी को लेकर परेशान हूं, कोई पूछने वाला नहीं है। सब मंत्री की आवगभगत में लगे हुए हैं। बिना कुछ खाए पहुंचा हूं। अब तक नाश्ता तक नहीं मिला है। बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। खुनियांव ब्लॉक के खखरी गांव निवासी महिला ने बताया कि दिव्यांग बेटी सुनैना को लेकर आई थी। आशा ने उसे जल्दबाजी में भेज दिया और कहा कि अस्पताल पहुंचने के बाद खाना भी मिलेगा। मगर यहां खाना कौन कहे पानी और बैठने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। यह हाल तो ऐसे लोगों का था, जिन्होंने किसी तरह अपनी बात कह ली। लेकिन कई ऐसे भी थे, जो बेहद परेशान नजर आए।
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कार्यक्रम दिव्यांगों का, मंत्री अंदर दिव्यांग बाहर
जिला अस्पताल के महिला मातृ शिशु चिकित्सालय में करेक्टिव सर्जरी शिविर का आयोजन
ठंड में जमीन पर बैठकर करते रहे खाने का इंतजार
करेक्टिव सर्जरी शिविर में मंत्री के सामने दिखी अव्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। बदहाल व्यवस्था के बीच प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्री के सामने करेक्टिव सर्जरी शिविर का उद्घाटन शुक्रवार को हुआ। 20 से 25 मिनट स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह रहे, लेकिन इस दौरान दिव्यांगों को अंदर भटकने तक नहीं दिया गया। कड़ाके की ठंड में आठ बजे से दिव्यांग बच्चे और उनके परिजनों को प्रशासन ने बुला लिया था। लेकिन 12 बजे तक उन्हें एक गिलास पानी तक नसीब नहीं हुआ। दिव्यांग बच्चे और परिजन जमीन पर बैठे रहे। मंत्री की आवभगत के बाद प्रशासन ने दिव्यांग बच्चों की सुध ली। इसमें भी कुछ बच्चे और परिजन यह कहते रहे कि आखिर हमारी बारी कब आएगी। लेकिन बच्चों और परिजनों की एक भी नहीं सुनी गई।
शासन के निर्देश पर शुक्रवार को जिला अस्पताल के महिला मातृ शिशु चिकित्सालय में महिला अस्पताल में करेक्टिव सर्जरी शिविर का आयोजन किया गया था। दोपहर 12 बजे स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। 20-25 मिनट तक मंत्री कार्यक्रम में रहे। लेेकिन उन्होंने एक भी दिव्यांग बच्चों की तरफ जाने की जहमत नहीं उठाई। यहां तक की कई दिव्यांग बच्चे और परिजन उनसे मिलना चाहे, तो प्रशासन और उनके साथ रहे सुरक्षा कर्मियों ने दिव्यांगों और उनके परिजनों को रोक लिया। इस बीच मंत्री का काफिला सीधे मंच पर पहुुंच गया। स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने इसके बाद करीब 15 मिनट तक सरकार की योजनाओं का बखान किया। कहा कि सरकार देश व प्रदेश दोनों के विकास को लेकर अग्रसर है। दिव्यांगजन समाज की मुख्यधारा से जुड़ सके। इसके लिए तमाम प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसी के तहत दो दिवसीय करेक्टिव सर्जरी शिविर का आयोजन किया गया है। उपलब्धियों का बखान करने के बाद मंत्री बिना दिव्यांग बच्चों से मिले बिना ही निकल गए। कार्यक्रम के दौरान सदर विधायक श्यामधनी राही, डीएम दीपक मीणा, एसपी विजय ढुल, सीएमओ डॉ. सीमा राय, एसडीएम सदर उमेश चंद्र निगम, सीओ दिलीप कुमार सिंह, भाजपा नेता बृजबिहारी मिश्र, कन्हैया पासवान, अरविंद उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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व्हीलचेयर नहीं मिला तो कंधे पर टांग लिया
शिविर में दिव्यांगजनों की सर्जरी की जानी थी। लेकिन उनके लिए इंतजाम न के बराबर थे। जबकि अधिकारियों और मंत्री के लिए शानदार व्यवस्था किए गए थे। मजबूरन परिजन कंधे पर लादकर दिव्यांग बच्चों को डॉक्टर के पास ले जाते दिखे। यहां तक कई ने ट्राईसाइकिल की मांग की, लेकिन उन्हें प्रशासन ने मंत्री का हवाला देकर डांटकर भगा दिया गया। इसकी वजह से स्थिति ऐसी रही है कि जो पैरों से चलने में असमर्थ थे, वे व्हीलचेयर न होने के कारण घिसटते हुए अंदर प्रवेश करते नजर आए, लेकिन जिम्मेदारों की नजर इस पर नहीं पड़ी।
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सुबह आठ बजे बिना खाए पीए आ गए
इटवा ब्लॉक के शनिचरा गांव से दिव्यांग बेटी मोनका को लेकर आई महिला ने बताया कि सुबह आठ बजे ही बिना कुछ खाए-पीए अस्पताल लाकर पहुंचा दिया गया। दोपहर के 12 बजे गए, लेकिन नाश्ता और भोजन तो छोड़िए एक गिलास पानी तक नहीं मिला। बांसी ब्लॉक के बलेजिनवा निवासी व्यक्ति दिव्यांग बेटी ज्योति को लेकर पहुंचे थे। बताया कि दिव्यांग बेटी को लेकर परेशान हूं, कोई पूछने वाला नहीं है। सब मंत्री की आवगभगत में लगे हुए हैं। बिना कुछ खाए पहुंचा हूं। अब तक नाश्ता तक नहीं मिला है। बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। खुनियांव ब्लॉक के खखरी गांव निवासी महिला ने बताया कि दिव्यांग बेटी सुनैना को लेकर आई थी। आशा ने उसे जल्दबाजी में भेज दिया और कहा कि अस्पताल पहुंचने के बाद खाना भी मिलेगा। मगर यहां खाना कौन कहे पानी और बैठने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। यह हाल तो ऐसे लोगों का था, जिन्होंने किसी तरह अपनी बात कह ली। लेकिन कई ऐसे भी थे, जो बेहद परेशान नजर आए।