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मौसम की बेरुखी से हलकान हुए किसान

Wed, 13 Jul 2022 11:39 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 13 Jul 2022 11:39 PM IST
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mausam kee berukhee se halakaan hue kisaan
मौसम की बेरुखी से हलकान हुए किसान
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-सिंचाई करने में कर्जदार हो रहे किसान
बारिश के इंतजार में 40 प्रतिशत नहीं हो पाई है धान की रोपाई
सिद्धार्थनगर/बिस्कोहर। मौसम की बेरुखी ने किसानों को चिंता में डाल दिया है। जो किसान रोपाई कर चुके हैं, उन्हें फसल बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है, जबकि जिनकी रोपाई नहीं हुई है, वे रोपाई करने के लिए चिंतित हैं। बादलों के रूठ जाने से किसानों सिंचाई करने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। बारिश न होने से रोपाई और फसल की सिंचाई के लिए उन्हें पंपिंग सेट का सहारा लेना पड़ा रहा है। वे सूखा पड़ने की आशंका से चिंतित हो गए हैं।
बारिश न होने व डीजल का भाव अधिक होने से किसानों की समस्या बढ़ गई है। अधिक तापमान होने से धान की पौध पीली पड़कर खराब हो रही है। जिले के नौगढ़, बांसी, शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में बारिश नहीं होने से अधिकांश किसान रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, जो रोपाई कर चुके हैं, वे फसलों को सूखे से बचाने के लिए पानी भरने को विवश हो गए हैं।
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इटवा तहसील के नगर पंचायत बिस्कोहर क्षेत्र में अधिकांश किसान फसल की सिंचाई पंपिंग सेट से ही करते हैं। तापमान अधिक होने व उमस भरी गर्मी के कारण धान की नर्सरी खराब हो रही है, जिससे किसान चिंतित हैं। साल दर साल बारिश कम होने से किसानों का धान की फसल से मोहभंग हो रहा है। बारिश के इंतजार में धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। डीजल के भाव आसमान छूने से धान की रोपाई करने की किसान हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। बारिश कम होने से धान का उत्पादन कम हो जाता है और लागत बढ़ जाती है, जिससे किसानों को लागत भी नहीं मिल पाती है।
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घाटे का सौदा हो गई धान की खेती
बिस्कोहर निवासी किसान जगदीश यादव ने बताया कि उनके पास तीन बीघा खेत है। जिसमें से एक बीघा खेत में पानी चलवाया, जोताई और फसल रोपाई में दो हजार रुपये लग गए। पानी के अभाव में खेत में दरार पड़ने लगी है और फसल सूख रही है। दो बीघा खेत की रोपाई बारिश के इंतजार में नहीं हो पायी है। डीजल महंगा होने से पानी चलाने वाले दो सौ रुपये प्रति घंटा मांग रहे हैं। पिछले सीजन में पानी चलवाई सौ रुपया प्रति घंटा लगता था। इतना पैसा नही कि पानी चलवा कर खेती कर सकूं। अब धान की खेती से मोह भंग हो रहा है। कठोतिया रामनाथ निवासी धूनमुन यादव कहते हैं कि डीजल के भाव आसमान छू रहे हैं, जिससे धान की लागत बहुत बढ़ गई है और बारिश कम होने से उत्पादन कम हो जाता है, जिससे लागत भी नहीं निकल पाती है।
माधोपुर निवासी किसान सीताराम नाइक कहते हैं कि पंपिंग सेट से सिंचाई महंगी पड़ रही है। एक बीघा फसल की सिंचाई पंपिंग सेट से करने में 4-5 घंटे समय लग जाता है, जिसमें 4 से 5 सौ रुपये का डीजल खर्च हो जाता है। वहीं रोपाई के लिए सिंचाई करने में 450 से 600 रुपये का डीजल खर्च हो जाता है। एक सप्ताह बाद ही सिंचाई करने की नौबत आ रही है।
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40 प्रतिशत रोपाई के लिए बारिश का इंतजार
जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि जिले में खरीफ की फसल में 1.71 लाख हेक्टेयर धान की रोपाई का लक्ष्य है। बारिश नहीं होने के कारण 60 प्रतिशत रकबे में ही रोपाई हो पाई है, 40 प्रतिशत रोपाई के लिए किसानों को बारिश का इंतजार है। सूखे पड़ने की आशंका में किसानों की चिंता बढ़ गई है।

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दो दिन बाद हल्की बारिश का पूर्वानुमान
राज्य कृषि मौसम केंद्र के प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि दो दिन बाद कहीं कहीं हल्की बारिश का पूर्वानुमान है। मानसून सीजन में सिद्धार्थनगर में 134.8 मिमी बारिश हुई है, इस अवधि में करीब 58 प्रतिशत कम बारिश हुई है। प्रदेश में बारिश कम होने के कारण तापमान में वृद्धि हो गई है।
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