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बूढ़ी राप्ती नदी की बाढ़ से कई गांव घिरे, फसल बर्बाद
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बाढ़ के पानी में घिरा पन्नापुर टोले में बना घर।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
बूढ़ी राप्ती नदी की बाढ़ से कई गांव घिरे, फसल बर्बाद
सिद्धार्थनगर/बांसी। बूढ़ी राप्ती का जलस्तर तीन दिन से खतरे के लाल निशान से ऊपर पहुंचकर स्थिर हो गया है। राप्ती समेत अन्य नदियां भी खतरे के निशान के नजदीक पहुंच गई है। इससे कछार क्षेत्र के कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इससे जहां इन गांव के लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, वहीं इनकी सैकड़ों एकड़ धान की फसल जलमग्न होने से बर्बाद हो गई है। ऐसे में बाढ़ बाद उन्हें राशन के संकट का सामना करना पड़ेगा।
बूढ़ी राप्ती नदी के तट पर बसे तहसील क्षेत्र के भगौतापुर व छोटकी डड़िया गांव दो दिन से बाढ़ से घिर हुआ है और सभी रास्ते जलभराव से बंद है। अपनी तबाही और बर्बादी से दुखी ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा जानने का प्रयास प्रशासन ने नहीं किया। गांव के लोगों का कहना है कि बाढ़ से घिरने के बीस घंटे बाद ग्राम प्रधान ने नाव की व्यवस्था तो कर दी, परंतु नाविक नहीं है। भगौतापुर गांव निवासी संजय कुमार का कहना है नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने और कटान करने से उनके सहित चार परिवार ने रात जागकर गुजारी है। इनका कहना है कि नदी कटान करते हुए उनके घर के करीब पहुंच चुकी है और कभी भी उनका तथा मोती लाल, सीताराम और नंदलाल का मकान नदी में विलीन हो सकता है, जिसका डर इन्हें सता रहा है। ये लोग सुरक्षित ठौर की तलाश में लगे हुए हैं।
गांव निवासी बुजुर्ग झीनक का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ की त्रासदी झेलने के कारण उन्होंने एक घर बांध के पास बना लिया है, परंतु वह पशुओं के साथ गांव में रहते हैं। इनका कहना है की चारों तरफ से पानी से घिर जाने से पशुओं के लिए चारा की समस्या उत्पन्न हो गई है। गांव निवासी भगवानदास का कहना है कि रविवार दोपहर बाद ही गांव पूरी तरह मैरुंड हो गया, परंतु सोमवार की सुबह नाव की व्यवस्था की। नाव पर कोई नाविक न होने से लोगों को काफी दिक्कत हो रही है। नाव पर कुछ लोगों के हो जाने पर सवार लोगों में से कोई नाव खेने लगता है।
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प्रमोद का कहना है कि बाढ़ से घिरे गांव को 36 घंटे से ऊपर हो गया, परंतु किसी जिम्मेदार ने गांव में आकर उनका हाल जानने का प्रयास नहीं किया। इनका कहना है कि हल्का लेखपाल आए थे। वह बांध खड़े होकर गांव का फोटो लेकर चले गए। बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे बसे इन दोनों गांव के ग्रामीणों की बाढ़ की त्रासदी झेलनी किस्मत बन चुकी है।
एसडीएम जग प्रवेश का कहना है कि बूढ़ी राप्ती का जलस्तर बढ़ने पर सबसे पहले ये गांव प्रभावित होते हैं। बाढ़ से घिरे 24 घंटे से अधिक होने पर राहत सामग्री उन गांव में पहुंचाई जाएगी।
वहीं दूसरी ओर बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर सवा मीटर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचकर स्थिर है। हालत यह है कि नदी के बढ़ते जलस्तर को देख किनारे बसे गांव के ग्रामीण सहमे हुए हैं। केंद्रीय जल आयोग बाढ़ और पूर्वानुमान केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर सोमवार दोपहर दो बजे 86.880 है, जबकि इस नदी के खतरे का लेबल 85.650 है। दो दिनों से नदी में तेजी से आई उफान से तट पर बसे भगौतापुर, डड़िया, खैरहवा, सूपा राजा, नगवा, बलुवा, कोड़री, सतवाढ़ी, नवैला, सूपा घाट, गोनहा, कापिया, रमपुरवा सहित कई गांव के लोग चिंतित हैं।
सीएचसी और स्कूल में घुसा पानी
मन्नीजोत। भनवापुर क्षेत्र में राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से कई गांव समेत शाहपुर सिंगारजोत रोड पर स्थित पावर हाउस सिरसिया, सीएचसी सिरसिया, डॉ. राममनोहर लोहिया कन्या इंटर कॉलेज के परिसर तथा आवास में बाढ़ का पानी भर गया है। इससे मरीजों को अस्पताल आने तथा कोरोना के बाद खुले विद्यालय में बच्चियों को करीब दो फिट पानी में घुस कर आना-जाना पड़ रहा है। राप्ती नदी किनारे बसे गांव वीरपुर एहतमाली तथा कोहल पिकौरा, चंदनजोत, पेंड़रिया जीत, जुड़वनियां, तेनुई, नेहतुआ आदि पानी से घिर गए है, जिससे लोगों पानी में घुस कर जाना पड़ रहा है। क्षेत्र के गुडलेश श्रीवास्तव, लब्लू श्रीवास्तव, परशुराम दुबे, भानू पांडेय, अनिल कुमार यादव, अरून शर्मा, रवि प्रकाश श्रीवास्तव आदि ने प्रशासन से बाढ़ की समस्या से निजात की मांग की।
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सिद्धार्थनगर/बांसी। बूढ़ी राप्ती का जलस्तर तीन दिन से खतरे के लाल निशान से ऊपर पहुंचकर स्थिर हो गया है। राप्ती समेत अन्य नदियां भी खतरे के निशान के नजदीक पहुंच गई है। इससे कछार क्षेत्र के कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इससे जहां इन गांव के लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, वहीं इनकी सैकड़ों एकड़ धान की फसल जलमग्न होने से बर्बाद हो गई है। ऐसे में बाढ़ बाद उन्हें राशन के संकट का सामना करना पड़ेगा।
बूढ़ी राप्ती नदी के तट पर बसे तहसील क्षेत्र के भगौतापुर व छोटकी डड़िया गांव दो दिन से बाढ़ से घिर हुआ है और सभी रास्ते जलभराव से बंद है। अपनी तबाही और बर्बादी से दुखी ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा जानने का प्रयास प्रशासन ने नहीं किया। गांव के लोगों का कहना है कि बाढ़ से घिरने के बीस घंटे बाद ग्राम प्रधान ने नाव की व्यवस्था तो कर दी, परंतु नाविक नहीं है। भगौतापुर गांव निवासी संजय कुमार का कहना है नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने और कटान करने से उनके सहित चार परिवार ने रात जागकर गुजारी है। इनका कहना है कि नदी कटान करते हुए उनके घर के करीब पहुंच चुकी है और कभी भी उनका तथा मोती लाल, सीताराम और नंदलाल का मकान नदी में विलीन हो सकता है, जिसका डर इन्हें सता रहा है। ये लोग सुरक्षित ठौर की तलाश में लगे हुए हैं।
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गांव निवासी बुजुर्ग झीनक का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ की त्रासदी झेलने के कारण उन्होंने एक घर बांध के पास बना लिया है, परंतु वह पशुओं के साथ गांव में रहते हैं। इनका कहना है की चारों तरफ से पानी से घिर जाने से पशुओं के लिए चारा की समस्या उत्पन्न हो गई है। गांव निवासी भगवानदास का कहना है कि रविवार दोपहर बाद ही गांव पूरी तरह मैरुंड हो गया, परंतु सोमवार की सुबह नाव की व्यवस्था की। नाव पर कोई नाविक न होने से लोगों को काफी दिक्कत हो रही है। नाव पर कुछ लोगों के हो जाने पर सवार लोगों में से कोई नाव खेने लगता है।
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प्रमोद का कहना है कि बाढ़ से घिरे गांव को 36 घंटे से ऊपर हो गया, परंतु किसी जिम्मेदार ने गांव में आकर उनका हाल जानने का प्रयास नहीं किया। इनका कहना है कि हल्का लेखपाल आए थे। वह बांध खड़े होकर गांव का फोटो लेकर चले गए। बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे बसे इन दोनों गांव के ग्रामीणों की बाढ़ की त्रासदी झेलनी किस्मत बन चुकी है।
एसडीएम जग प्रवेश का कहना है कि बूढ़ी राप्ती का जलस्तर बढ़ने पर सबसे पहले ये गांव प्रभावित होते हैं। बाढ़ से घिरे 24 घंटे से अधिक होने पर राहत सामग्री उन गांव में पहुंचाई जाएगी।
वहीं दूसरी ओर बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर सवा मीटर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचकर स्थिर है। हालत यह है कि नदी के बढ़ते जलस्तर को देख किनारे बसे गांव के ग्रामीण सहमे हुए हैं। केंद्रीय जल आयोग बाढ़ और पूर्वानुमान केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर सोमवार दोपहर दो बजे 86.880 है, जबकि इस नदी के खतरे का लेबल 85.650 है। दो दिनों से नदी में तेजी से आई उफान से तट पर बसे भगौतापुर, डड़िया, खैरहवा, सूपा राजा, नगवा, बलुवा, कोड़री, सतवाढ़ी, नवैला, सूपा घाट, गोनहा, कापिया, रमपुरवा सहित कई गांव के लोग चिंतित हैं।
सीएचसी और स्कूल में घुसा पानी
मन्नीजोत। भनवापुर क्षेत्र में राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से कई गांव समेत शाहपुर सिंगारजोत रोड पर स्थित पावर हाउस सिरसिया, सीएचसी सिरसिया, डॉ. राममनोहर लोहिया कन्या इंटर कॉलेज के परिसर तथा आवास में बाढ़ का पानी भर गया है। इससे मरीजों को अस्पताल आने तथा कोरोना के बाद खुले विद्यालय में बच्चियों को करीब दो फिट पानी में घुस कर आना-जाना पड़ रहा है। राप्ती नदी किनारे बसे गांव वीरपुर एहतमाली तथा कोहल पिकौरा, चंदनजोत, पेंड़रिया जीत, जुड़वनियां, तेनुई, नेहतुआ आदि पानी से घिर गए है, जिससे लोगों पानी में घुस कर जाना पड़ रहा है। क्षेत्र के गुडलेश श्रीवास्तव, लब्लू श्रीवास्तव, परशुराम दुबे, भानू पांडेय, अनिल कुमार यादव, अरून शर्मा, रवि प्रकाश श्रीवास्तव आदि ने प्रशासन से बाढ़ की समस्या से निजात की मांग की।