फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Many dams in the district are incomplete, villagers are troubled

बांधों के गैप नहीं भरने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों की अटकी सांसे

Sun, 16 May 2021 10:16 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 16 May 2021 10:16 PM IST
विज्ञापन
Many dams in the district are incomplete, villagers are troubled
जिले में कई बांध अधूरे, गांववाले परेशान
विज्ञापन

बांधों के गैप नहीं भरने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों की अटकी सांसे
जिले में 454 किमी लंबी 39 बांधों में विभिन्न स्थानों पर है कुछ दूरी तक गैप
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को त्रासदी से बचाने के लिए बने बांध कई जगहों पर अधूरे हैं। बांधों में गैप के कारण जैसे ही नदियों का जलस्तर बढ़ता है वैसे ही कई गांव जलमग्र हो जाते हैं। अब जब मानसून नजदीक आ रहा है तो बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों की सांसे अटकी हुई है।
जिले में बाढ़ से बचाव के लिए 454 किमी लंबी 39 बांधों का निर्माण हुआ है। इनमें सिंचाई निर्माण खंड के अधीन 22 और ड्रेनेज खंड के क्षेत्र में 17 बांध हैं। इन बांधों में कई जगह स्थित गैप की लंबाई 10 किमी है। राप्ती नदी के दोनों तरफ 30-30 किमी से अधिक लंबाई वाले डुमरियागंज-बांसी बांध में कई स्थानों पर गैप है। वर्ष 1997 में ही निर्मित हुए इस बांध में गैप के कारण प्रति वर्ष ग्रामीणों को जन धन की हानि झेलनी पड़ती है। इसी तरह 10 किमी लंबे फत्तेपुर-खजुरडाड़-अजगरा बांध, 40 किमी लंबे भोजपुर-शाहपुर बांध और 26 किमी लंबे छगड़िहवा-सोनबरसा बांध में जगह-जगह गैप होने से क्षेत्र के ग्रामीणों को बारिश के मौसम बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र के निवासी रामकरन, उमेश, दयाशंकर, गौरी प्रसाद का कहना है कि बांध में गैप होने से नदियों के जलस्तर में जैसे ही ऊफान आता है वैसे हमारे गांव पानी से चारो तरफ से घिर जाते हैं। इससे खेत में खड़ी फसल तो नष्ट होती ही है, घर और उसमें रखे सामान की भी क्षति होती है। सिंचाई निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता आरके सिंह का कहना है कि बांधों में गैप भरने के लिए विभाग की तरफ से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जैसे ही बजट आवंटन होगा गैप पूर्ण करा दिया जाएगा।
विज्ञापन

कई जगह भूमि विवाद के कारण रह गए गैप
बांधों के निर्माण के लिए संबंधित किसान से भूमि अधिग्रहण करने के दौरान कुछ किसानों को मुआवजे की राशि नहीं मिला अथवा उनको निर्धारित दर से कम मुआवजा मिलने के कारण उन्होंने कोर्ट में वाद दाखिल कर दिया। कोर्ट में मुकदमा चलने के कारण इन स्थानों पर बांधों का निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया जा सका। वहीं कई जगहों पर धनाभाव के कारण भी बांधों का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बांधों सेे जिले के आधे क्षेत्र की है सुरक्षा
जिले के समस्त भू-भाग 2.86 लाख हेक्टेयर में आधे से अधिक भूमि बाढ़ प्रभावित है। राप्ती, बूढ़ी राप्ती, बानगंगा, कूड़ा आदि नदियों के किनारे निर्मित 39 बांधों से जिले की 1.38 लाख हेक्टेयर भूमि की सुरक्षा होती है। बांधों में स्थित गैप के कारण बारिश के मौसम में इन नदियों का जलस्तर जैसे ही बढ़ता है वैसे ही कई गांवों में पानी भर जाता है, जिससे लोगों को घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। लोगों ने बांध में बने गैप को जल्द से जल्द भरने की मांग की।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed