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ढाई लाख से अधिक मजदूरों को 20 से मिलेगा रोजगार
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लॉकडाउन : जिले में मनरेगा योजना से शुरू होंगे तालाब व चकमार्ग का कार्य
नए वित्तीय वर्ष में खर्च होगा 280 करोड़ रूपये, सृजित होंगे 95.80 लाख मानव दिवस
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन में आर्थिक तंगी झेल रहे मजदूरों को 20 अप्रैल से रोजगार मिलने लगेगा। यह संभव हुआ प्रदेश सरकार द्वारा सशर्त छूट दिए जाने से। इससे मनरेगा के जॉबकार्ड धारकों और बाहर से आने वाले मजदूरों को रोजगार मिलेगा। ऐसे लोगों की संख्या 2.5 से लाख से अधिक है।
लॉकडाउन से शहरी क्षेत्र में उद्योग धंधे, कारखाने आदि रोजगारपरक उपक्रम बंद होने से दैनिक कार्य करने वालों के समक्ष भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है। मजदूर अब शहर से अपने ग्रामीण इलाकों में का रुख कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में भी रोजगार के अवसर खत्म होने से दैनिक मजदूरी करने वाले और निम्न आय वर्ग के लोग संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में शासन के निर्देश पर डीएम दीपक मीणा ने 20 अप्रैल से मनरेगा के कार्य शुरू करवाने का निर्देश जारी किया है। उन्होंने बताया कि 27 लाख आबादी वाले जिले में लगभग 3.5 लाख मनरेगा जॉबकार्ड धारक हैं। इनमें से ढाई लाख सक्रिय रूप से मजदूरी का कार्य करते हैं। सीडीओ पुलकित गर्ग ने बताया कि जिले में इस वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत 280 करोड़ रुपये खर्च किए जाने है। इस धन में 95.80 लाख मानव दिवस सृजित किए जाने हैं। मनरेगा के तहत प्रतिदिन प्रत्येक मजदूर को 201 रुपये मजदूरी देय होगी। मनरेगा से जिले में तालाबों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के साथ ही चकमार्गों का निर्माण कराया जाना है।
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बाहर से आने वालों को भी मिलेगा मौका
डीसी मनरेगा संजय शर्मा ने बताया कि जिले में जॉबकार्ड धारक मजदूरों और गैर जॉबकार्ड धारी इच्छुक लोगों के साथ ही बाहर से आए लोगों को भी मनरेगा योजना से कार्य करने का मौका मिलेगा। जिनका जाबकार्ड नहीं बना है, वह ग्राम पंचायत अधिकारी व प्रधान के अलावा खंड विकास अधिकारी से जॉबकार्ड बनवाकर मजदूरी का कार्य कर सकते हैं। किसी तरह की समस्या होने पर मुझसे भी संपर्क कर सकते हैं।
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1199 ग्राम पंचायतों को मिलेगी विकास की गति
कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से 24 मई से लॉकडाउन घोषित कर लोगों को घरों में रहने की हिदायत दी गई थी। ऐसे में जिले के सभी 1199 ग्राम पंचायतों में विकास का पहिया भी ठप हो गया था और मजदूरी पर निर्भर परिवारों के समक्ष रोजगार का संकट खड़ा गया था। अब मनरेगा का काम शुरू दूर ही होगी, साथ ही इनकी आर्थिक स्थिति में सुधार भी होगा।
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सामग्री खरीद से अन्य लोगों को भी मिलेगा रोजगार
मनरेगा योजना से जिले में 280 करोड़ रुपये खर्च किए जाने है। इसमें 60 प्रतिशत मजदूरी पर और 40 प्रतिशत सामग्री खरीद पर खर्च होने है। इस धन में इस धन में 95.80 लाख मानव दिवस सृजित किया जाना है। इसके साथ ही ईंट, सीमेंट व बालू आदि सामग्री की खरीद होने से अन्य क्षेत्रों में लोगों के रोजगार के अवसर मिलेंगे।
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नए वित्तीय वर्ष में खर्च होगा 280 करोड़ रूपये, सृजित होंगे 95.80 लाख मानव दिवस
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन में आर्थिक तंगी झेल रहे मजदूरों को 20 अप्रैल से रोजगार मिलने लगेगा। यह संभव हुआ प्रदेश सरकार द्वारा सशर्त छूट दिए जाने से। इससे मनरेगा के जॉबकार्ड धारकों और बाहर से आने वाले मजदूरों को रोजगार मिलेगा। ऐसे लोगों की संख्या 2.5 से लाख से अधिक है।
लॉकडाउन से शहरी क्षेत्र में उद्योग धंधे, कारखाने आदि रोजगारपरक उपक्रम बंद होने से दैनिक कार्य करने वालों के समक्ष भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है। मजदूर अब शहर से अपने ग्रामीण इलाकों में का रुख कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में भी रोजगार के अवसर खत्म होने से दैनिक मजदूरी करने वाले और निम्न आय वर्ग के लोग संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में शासन के निर्देश पर डीएम दीपक मीणा ने 20 अप्रैल से मनरेगा के कार्य शुरू करवाने का निर्देश जारी किया है। उन्होंने बताया कि 27 लाख आबादी वाले जिले में लगभग 3.5 लाख मनरेगा जॉबकार्ड धारक हैं। इनमें से ढाई लाख सक्रिय रूप से मजदूरी का कार्य करते हैं। सीडीओ पुलकित गर्ग ने बताया कि जिले में इस वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत 280 करोड़ रुपये खर्च किए जाने है। इस धन में 95.80 लाख मानव दिवस सृजित किए जाने हैं। मनरेगा के तहत प्रतिदिन प्रत्येक मजदूर को 201 रुपये मजदूरी देय होगी। मनरेगा से जिले में तालाबों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के साथ ही चकमार्गों का निर्माण कराया जाना है।
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बाहर से आने वालों को भी मिलेगा मौका
डीसी मनरेगा संजय शर्मा ने बताया कि जिले में जॉबकार्ड धारक मजदूरों और गैर जॉबकार्ड धारी इच्छुक लोगों के साथ ही बाहर से आए लोगों को भी मनरेगा योजना से कार्य करने का मौका मिलेगा। जिनका जाबकार्ड नहीं बना है, वह ग्राम पंचायत अधिकारी व प्रधान के अलावा खंड विकास अधिकारी से जॉबकार्ड बनवाकर मजदूरी का कार्य कर सकते हैं। किसी तरह की समस्या होने पर मुझसे भी संपर्क कर सकते हैं।
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1199 ग्राम पंचायतों को मिलेगी विकास की गति
कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से 24 मई से लॉकडाउन घोषित कर लोगों को घरों में रहने की हिदायत दी गई थी। ऐसे में जिले के सभी 1199 ग्राम पंचायतों में विकास का पहिया भी ठप हो गया था और मजदूरी पर निर्भर परिवारों के समक्ष रोजगार का संकट खड़ा गया था। अब मनरेगा का काम शुरू दूर ही होगी, साथ ही इनकी आर्थिक स्थिति में सुधार भी होगा।
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सामग्री खरीद से अन्य लोगों को भी मिलेगा रोजगार
मनरेगा योजना से जिले में 280 करोड़ रुपये खर्च किए जाने है। इसमें 60 प्रतिशत मजदूरी पर और 40 प्रतिशत सामग्री खरीद पर खर्च होने है। इस धन में इस धन में 95.80 लाख मानव दिवस सृजित किया जाना है। इसके साथ ही ईंट, सीमेंट व बालू आदि सामग्री की खरीद होने से अन्य क्षेत्रों में लोगों के रोजगार के अवसर मिलेंगे।