{"_id":"68efde9b871d87c5ff0f20ee","slug":"make-yoga-a-part-of-your-life-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1033-146580-2025-10-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: योग को जीवन का हिस्सा बनाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: योग को जीवन का हिस्सा बनाएं
Wed, 15 Oct 2025 11:19 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 15 Oct 2025 11:19 PM IST
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के स्थापना सप्ताह “सिद्धार्थ उत्सव” के तीसरे बुधवार को भारत की ज्ञान परंपरा और योग का विज्ञान” विषय पर एक प्रेरक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें योग से होने वाले फायदे के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही योग को जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी गई।
मुख्य वक्ता दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं वेद विज्ञान के प्रतिष्ठित विद्वान प्रोफेसर दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा की जड़ें वेदों में निहित हैं, जहां हजारों वर्ष पूर्व हमारे ऋषि-मुनियों ने प्रकृति, चेतना और मानव जीवन के गूढ़ रहस्यों का वैज्ञानिक विवेचन किया।
उन्होंने बताया कि वेदों में निहित यह ज्ञान आज से लगभग 10 हजार वर्ष पूर्व अभिव्यक्त हुआ था, किंतु आधुनिक विज्ञान अब जाकर उन सत्यों को पुनः खोजने और प्रमाणित करने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि आज जिस खोज में आधुनिक भौतिक विज्ञान लगा हुआ है, उसका मूल भाव वेदांत और योग दर्शन में पहले से ही विद्यमान है।
विज्ञापन
भारतीय मनीषियों ने ‘एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति’ के माध्यम से उस एकत्व के सिद्धांत की स्थापना की, जिसे आज विज्ञान भौतिक स्तर पर खोजने का प्रयास कर रहा है। कहा कि योग केवल साधना नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक अनुशासन है, जो शरीर, मन और आत्मा के समन्वय का माध्यम बनता है।
विज्ञापन
मुख्य वक्ता दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं वेद विज्ञान के प्रतिष्ठित विद्वान प्रोफेसर दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा की जड़ें वेदों में निहित हैं, जहां हजारों वर्ष पूर्व हमारे ऋषि-मुनियों ने प्रकृति, चेतना और मानव जीवन के गूढ़ रहस्यों का वैज्ञानिक विवेचन किया।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि वेदों में निहित यह ज्ञान आज से लगभग 10 हजार वर्ष पूर्व अभिव्यक्त हुआ था, किंतु आधुनिक विज्ञान अब जाकर उन सत्यों को पुनः खोजने और प्रमाणित करने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि आज जिस खोज में आधुनिक भौतिक विज्ञान लगा हुआ है, उसका मूल भाव वेदांत और योग दर्शन में पहले से ही विद्यमान है।
विज्ञापन
भारतीय मनीषियों ने ‘एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति’ के माध्यम से उस एकत्व के सिद्धांत की स्थापना की, जिसे आज विज्ञान भौतिक स्तर पर खोजने का प्रयास कर रहा है। कहा कि योग केवल साधना नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक अनुशासन है, जो शरीर, मन और आत्मा के समन्वय का माध्यम बनता है।