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Siddharthnagar News: नेपाल बॉर्डर के जिलों की सांस्कृतिक विरासत को संजोने के लिए होगा मैत्री महोत्सव

Fri, 09 Feb 2024 12:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 09 Feb 2024 12:54 AM IST
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Maitri Mahotsav will be organized to preserve the cultural heritage of Nepal border districts.
सिद्धार्थनगर। नेपाल बाॅर्डर से सटे आठ जिलों में भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव का आयोजन नौ फरवरी से किया जाएगा। इस महोत्सव से भारत-नेपाल के संबंध को मजबूत बनाया जाएगा। दोनों देश के संस्कृत विरासत को संजोने के लिए भी कार्य किया जाएगा। इसके लिए उत्तर-प्रदेश सरकार ने एक करोड़ 59 लाख 96 हजार रुपये का धन आवंटित किया है। महोत्सव शुक्रवार से प्रारंभ होगा।
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भारत-नेपाल में मनाए जाने वाले लगभग सभी त्योहार एक ही है। जबकि भारत-नेपाल का संबंध भी मधुर है। जिसको संजोने के लिए सीमावर्ती क्षेत्र के युवा व विद्यार्थियों के बीच प्रदेश की समृद्ध व संस्कृत विरासत को संरक्षित करने व देश प्रेम की भावना को प्रवाहित करने के लिए पूर्ण राष्ट्र भक्ति का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन से सीमावर्ती क्षेत्र के युवा दोनों देशों के संबंध व उसके सांस्कृतिक विरासत को समझेंगे। महोत्सव में सीमावर्ती क्षेत्र के आठ जिलों को शामिल किया गया है। कार्यक्रम नौ फरवरी से 29 फरवरी तक चलेगा। कार्यक्रम में संरक्षित धरोहर को भी बताया जाएगा। इसमें दोनों देशों के युवा व विद्यार्थी अपने देश के संस्कृत के बारे में जानेंगे।
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मैत्री महोत्सव आज से, नोडल अधिकारी ने पूरी की तैयारी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में होने वाले महोत्सव को भव्य बनाने के लिए जिलाधिकारी ने सदर एसडीएम डॉ ललित कुमार मिश्र को नोडल अधिकारी बनाया है। डॉ. ललित कुमार मिश्र ने बताया कि महोत्सव को भव्य बनाने के लिए विश्वविद्यालय की साज-सज्जा की गई है। महोत्सव के लिए सभी तैयारी पूरी कर ली गई है। सीमा पर पूरी तरह से सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद है। जिससे किसी भी प्रकार की समस्या नहीं हो। मैत्री महोत्सव का शुभारंभ जिले से होगा।
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आठ जिलों में होगा मैत्री महोत्सव

भारत-नेपाल के संबंध को मजबूत बनाने के लिए नेपाल के बार्डर से सटे आठ जिलों में मैत्री महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह महोत्सव नौ फरवरी को सिद्धार्थनगर से प्रारंभ होकर महरागंज, कुशीनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुरखीरी व पीलीभीत में 29 फरवरी को समाप्त होगा। भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव का आयोजन नौ से 11 फरवरी को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय सिद्धार्थनगर में किया जाएगा। इसी प्रकार 13-14 फरवरी को महराजगंज के जवाहर लाल नेहरू पीजी कालेज में किया जाएगा। 16 फरवरी को बुद्ध पीजी महाविद्यालय कुशीनगर व 18-19 फरवरी को राजकीय संग्रहालय इमिलिया कोडर-राजकीय एमएलके महाविद्यालय बलरामपुर में होगा। 21 फरवरी को जिला मुख्यालय भिनगा, सत्यनारायण उच्च शिक्षण संस्थान, तुलसीपुर बलरामपुर में तथा 23-24 फरवरी को बहराइच के सीमांत डिग्री कालेज, लार्ड बुद्धा इंटर कालेज में महोत्सव सम्पन्न होगा। 26 फरवरी को राजकीय एकलव्य आश्रम पद्धति इंटर काॅलेज, लखीमपुर में महोत्सव का आयोजन होगा। अंत में 28-29 फरवरी को एलबीएस महाविद्यालय गांधी स्टेडियम प्रेक्षागृह पीलीभीत में महोत्सव का समापन होगा।
महोत्सव में यह कार्यक्रम रहेंगे आकर्षण के केंद्र
महोत्सव का आकर्षण अनादि भारतम की प्रस्तुति, रघुबीरा, भारतीय लोक नृत्य, व्यंजन एवं हस्तशिल्प, भारत नेपाल परिधना, भारत-नेपाली फ्यूजन बैंड शो, डांस ऑफ यूपी, हिंदी, भोजपुरी व नेपाली गायकों की प्रस्तुति, सांस्कृतिक यात्रा, नेपाली डांडिया, बांसुरी, घाटू, मारुनी, नृत्यों की प्रस्तुति होगी। जबकि नौ फरवरी को नेपाल के लक्ष्मी राना के नेपाली नृत्य से कार्यक्रम का आगाज होगा। उसके बाद नेपाली तमांग समोह, फरुवाही नृत्य, थारु लोक नृत्य, नमामि रामम कथा नृत्य नाटिका, लोकप्रिय गायन होगा।

मैत्री महोत्सव का जुड़ाव सिद्धार्थनगर से सबसे अधिक
विश्वविद्यालय के पुरात्तविक विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ शरदेंदु त्रिपाठी ने बताया कि मैत्री महोत्सव का सिद्धार्थनगर में सबसे अधिक जुड़ाव है। भारत-नेपाल के बॉर्डर क्षेत्र में बुद्ध के स्थानों को सबसे अधिक चिह्नित किया गया है। जो दोनों देश में पाया जाता है। जबकि विश्वविद्यालय का नाम भी गौतम बुद्ध के बचपन के नाम पर रखा गया है। कपिलवस्तु क्षेत्र में कपिलवस्तु स्तूप, गनवरिया स्तूप के अलावा जिले में सर्वेक्षण से अन्य जगहों का भी गौतम बुद्ध से जुड़ी हुई धरोहरों का पता चल रहा है। जबकि नेपाल के लुंबिनी में गौतम बुद्ध की जन्म स्थली है।
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