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महाराणा प्रताप ने मां से सीखा था युद्ध कौशल : जयप्रताप
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लोहिया कला भवन में महाराणा प्रताप की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में मंचासीन अतिथि।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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महाराणा प्रताप ने मां से सीखा था युद्ध कौशल : जयप्रताप
सिद्धार्थनगर। महाराणा प्रताप की जयंती सोमवार को लोहिया कला भवन में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की ओर से धूमधाम से मनाई गई। इस दौरान महाराणा प्रताप के बताए हुए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया।
मुख्य अतिथि विधायक जयप्रताप सिंह ने कहा कि राजस्थान के कुंभलगढ़ में जन्मे महाराणा प्रताप भारत के महान राजाओं में से एक थे, जिन्होंने कई मुगल शासकों को पछाड़ा था। महाराणा प्रताप ने अपनी मां से युद्ध कौशल सीखा था। महाराणा प्रताप उदयपुर, मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे, जिन्होंने मुगल बादशाह अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की थी। वह हिंदू कुल के गौरव को सुरक्षित रखने में सदा तल्लीन रहे। हियुवा के प्रदेश प्रभारी राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप ने उस समय मुगल साम्राज्य के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी। जब दूसरे राजाओं ने अकबर की अधीनता को स्वीकार कर लिया था, तब महाराणा प्रताप ने मुगल साम्राज्य के विस्तारवाद के खिलाफ सैन्य प्रतिरोध और हल्दी घाटी, देवर की लड़ाई लड़ी थी, जिसे काफी अहम माना जाता है।
शिवपति डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद सिंह ने महाराणा प्रताप के जीवन से लोगों को सीख लेने की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि मनुष्य का गौरव और आत्मसम्मान उसकी सबसे बड़ी कमाई होती है। अत: सदा इनकी रक्षा करनी चाहिए। जो इंसान अपने और प्रियजनों के अलावा अपने देश के बारे में सोचता है, वही सच्चा नागरिक होता है। विधायक श्यामधनी राही ने कहा कि जो मनुष्य अपने कर्तव्य और इस सृष्टि के कल्याण के लिए सदैव प्रयत्नरत है, उसको युग युगांतर तक याद रखा जाता है। प्राचार्य अंजू चौहान ने कहा कि महाराणा प्रताप भारत माता के सच्चे सपूत थे, जिन्होंने कभी घास से बनी रोटी खाने का विकल्प चुना, लेकिन अपना धर्म और अभिमान अकबर को नहीं दिया। अपनी मातृभूमि के लिए आखिरी सांस तक बहादुरी से लड़ाई लड़े।
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क्षत्रिय महासभा के प्रदेश सचिव अखंड प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष ने भी महाराणा के प्रताप के जीवन के बारे में लोगों को बताया और उनके बताए हुए मार्ग पर चलने की अपील की। इस दौरान हरेंद्र बहादुर सिंह, राजू सिंह, लवकुश ओझा, हरिशंकर सिंह, फतेहबहादुर सिंह, आशीष सिंह, भूप नारायण सिंह, विजय सिंह, प्रिंस सिंह, राकेश सिंह, अजीत सिंह, सोनू सिंह, अरुणा मिश्र, हरिशंकर सिंह, अंकित सिंह, अविनाश सिंह, विपिन सिंह, रजनीश सिंह, अमित श्रीनेत, रामनिवास यादव, मानबहादुर सिंह, राजू पांडेय आदि मौजूद रहे।
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सिद्धार्थनगर। महाराणा प्रताप की जयंती सोमवार को लोहिया कला भवन में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की ओर से धूमधाम से मनाई गई। इस दौरान महाराणा प्रताप के बताए हुए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया।
मुख्य अतिथि विधायक जयप्रताप सिंह ने कहा कि राजस्थान के कुंभलगढ़ में जन्मे महाराणा प्रताप भारत के महान राजाओं में से एक थे, जिन्होंने कई मुगल शासकों को पछाड़ा था। महाराणा प्रताप ने अपनी मां से युद्ध कौशल सीखा था। महाराणा प्रताप उदयपुर, मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे, जिन्होंने मुगल बादशाह अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की थी। वह हिंदू कुल के गौरव को सुरक्षित रखने में सदा तल्लीन रहे। हियुवा के प्रदेश प्रभारी राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप ने उस समय मुगल साम्राज्य के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी। जब दूसरे राजाओं ने अकबर की अधीनता को स्वीकार कर लिया था, तब महाराणा प्रताप ने मुगल साम्राज्य के विस्तारवाद के खिलाफ सैन्य प्रतिरोध और हल्दी घाटी, देवर की लड़ाई लड़ी थी, जिसे काफी अहम माना जाता है।
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शिवपति डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद सिंह ने महाराणा प्रताप के जीवन से लोगों को सीख लेने की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि मनुष्य का गौरव और आत्मसम्मान उसकी सबसे बड़ी कमाई होती है। अत: सदा इनकी रक्षा करनी चाहिए। जो इंसान अपने और प्रियजनों के अलावा अपने देश के बारे में सोचता है, वही सच्चा नागरिक होता है। विधायक श्यामधनी राही ने कहा कि जो मनुष्य अपने कर्तव्य और इस सृष्टि के कल्याण के लिए सदैव प्रयत्नरत है, उसको युग युगांतर तक याद रखा जाता है। प्राचार्य अंजू चौहान ने कहा कि महाराणा प्रताप भारत माता के सच्चे सपूत थे, जिन्होंने कभी घास से बनी रोटी खाने का विकल्प चुना, लेकिन अपना धर्म और अभिमान अकबर को नहीं दिया। अपनी मातृभूमि के लिए आखिरी सांस तक बहादुरी से लड़ाई लड़े।
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क्षत्रिय महासभा के प्रदेश सचिव अखंड प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष ने भी महाराणा के प्रताप के जीवन के बारे में लोगों को बताया और उनके बताए हुए मार्ग पर चलने की अपील की। इस दौरान हरेंद्र बहादुर सिंह, राजू सिंह, लवकुश ओझा, हरिशंकर सिंह, फतेहबहादुर सिंह, आशीष सिंह, भूप नारायण सिंह, विजय सिंह, प्रिंस सिंह, राकेश सिंह, अजीत सिंह, सोनू सिंह, अरुणा मिश्र, हरिशंकर सिंह, अंकित सिंह, अविनाश सिंह, विपिन सिंह, रजनीश सिंह, अमित श्रीनेत, रामनिवास यादव, मानबहादुर सिंह, राजू पांडेय आदि मौजूद रहे।