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जिंदगी के अब पटरी पर लौटने की उम्मीद
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शहर में मोबाइल दुकान खुलने के बाद इक्का-दुक्का लोग ही पहुंचे।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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अब पटरी पर जिंदगी लौटने की उम्मीद
दुकानें खुलीं, व्यापार से जागी बेहतरी की आस
दुकानदार बोले, दुकानें खुलने के समय में बदलाव की जरूरत
प्रशासन की ओर से जारी की गई समय सारिणी के हिसाब से खुलीं दुकानें
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। लॉकडाउन के 49वें दिन प्रशासन की ओर से छूट मिलने पर शहर में सोमवार को मोबाइल फोन, कृषि, इलेक्ट्रानिक की दुकानें खुलीं। आदेश के बाद दुकानदारों को लगा की जिदंगी पटरी पर लौट आएगी, लेकिन मायूसी हाथ लगी। बिक्री न के बराबर थी, समय सारिणी का भी कारोबार पर असर देखने को मिला।
व्यापारियों ने प्रशासन की ओर से जारी कि गए टाइम टेबल को गलत ठहराया। सोमवार को नगर की दुकानों में से एकाध जगह कोई खरीदारी करते हुए दिखा। मोबाइल फोन की दुकान करने वाले राशिद खान ने कहा कि ग्राहक भगवान होता है। दुकान पर एक ही व्यक्ति को प्रवेश देने की अनुमति है। अगर किसी को रोक रहे हैं तो वह झल्लाते हुए पेश आ रहा है। साथ ही अप्रैल में मोबाइल फोन पर 12 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत टैक्स कर देने की वजह से हैंडसेट के दम बढ़े हैं। ऐसे में उपभोक्ता यह सोच रहा है कि लॉकडाउन के चलते दाम बढ़ा दिया गया है। इसकी वजह से भी ग्राहक लौट जा रहे हैं। वहीं इलेक्ट्रानिक की दुकान चलाने वाले अब्दुल रहमान ने कहा कि दुकान खुली तो लगा कि अब पटरी पर जिंदगी लौट गई, लेकिन जहां आम दिनों में भीड़ लगती थी, वहीं इक्का-दुक्का लोग आ रहे हैं। इससे अच्छा तो लॉकडाउन ही था, कम से कम जान तो बची रहती। कृषि कार्य से जुड़ी दुकान करने वाले शिवशंकर अग्रहरि ने बताया कि लॉकडाउन ने व्यापार बर्बाद कर दिया। दुकान खोलने की रियायत तो दी गई, लेकिन वह बेकार है। कारण दुकान को 12 से चार बजे, वह भी सप्ताह में दो बार खोलने के लिए कहा गया है। ऐसे में इस धूप में किसी का कब तक इंतजार करें। किसान व्यस्त हैं। ऐसे में दोपहर 12 बजे से चार बजे तक खुलने से कोई लाभ नहीं है। न तो किसान को लाभ मिलेगा और न ही दुकानदार को। प्रशासन को नियम में बदलवा करना चाहिए। इसी प्रकार अन्य दुकानदारों ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
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खुलने की जानकारी पर बाजार में बढ़ी भीड़
दुकानों के खुलने की जानकारी मिलने के बाद सोमवार को बाजार में भीड़ दिखी। लोग गांव से शहरों में खरीददारी के लिए निकले तो, लेकिन उन्हें मायूस लौटना पड़ा। कारण अधिकांश दुकानें नियम के दायरे में उलझकर नहीं खुल सकीं।
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दुकानें खुलीं, व्यापार से जागी बेहतरी की आस
दुकानदार बोले, दुकानें खुलने के समय में बदलाव की जरूरत
प्रशासन की ओर से जारी की गई समय सारिणी के हिसाब से खुलीं दुकानें
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। लॉकडाउन के 49वें दिन प्रशासन की ओर से छूट मिलने पर शहर में सोमवार को मोबाइल फोन, कृषि, इलेक्ट्रानिक की दुकानें खुलीं। आदेश के बाद दुकानदारों को लगा की जिदंगी पटरी पर लौट आएगी, लेकिन मायूसी हाथ लगी। बिक्री न के बराबर थी, समय सारिणी का भी कारोबार पर असर देखने को मिला।
व्यापारियों ने प्रशासन की ओर से जारी कि गए टाइम टेबल को गलत ठहराया। सोमवार को नगर की दुकानों में से एकाध जगह कोई खरीदारी करते हुए दिखा। मोबाइल फोन की दुकान करने वाले राशिद खान ने कहा कि ग्राहक भगवान होता है। दुकान पर एक ही व्यक्ति को प्रवेश देने की अनुमति है। अगर किसी को रोक रहे हैं तो वह झल्लाते हुए पेश आ रहा है। साथ ही अप्रैल में मोबाइल फोन पर 12 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत टैक्स कर देने की वजह से हैंडसेट के दम बढ़े हैं। ऐसे में उपभोक्ता यह सोच रहा है कि लॉकडाउन के चलते दाम बढ़ा दिया गया है। इसकी वजह से भी ग्राहक लौट जा रहे हैं। वहीं इलेक्ट्रानिक की दुकान चलाने वाले अब्दुल रहमान ने कहा कि दुकान खुली तो लगा कि अब पटरी पर जिंदगी लौट गई, लेकिन जहां आम दिनों में भीड़ लगती थी, वहीं इक्का-दुक्का लोग आ रहे हैं। इससे अच्छा तो लॉकडाउन ही था, कम से कम जान तो बची रहती। कृषि कार्य से जुड़ी दुकान करने वाले शिवशंकर अग्रहरि ने बताया कि लॉकडाउन ने व्यापार बर्बाद कर दिया। दुकान खोलने की रियायत तो दी गई, लेकिन वह बेकार है। कारण दुकान को 12 से चार बजे, वह भी सप्ताह में दो बार खोलने के लिए कहा गया है। ऐसे में इस धूप में किसी का कब तक इंतजार करें। किसान व्यस्त हैं। ऐसे में दोपहर 12 बजे से चार बजे तक खुलने से कोई लाभ नहीं है। न तो किसान को लाभ मिलेगा और न ही दुकानदार को। प्रशासन को नियम में बदलवा करना चाहिए। इसी प्रकार अन्य दुकानदारों ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
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खुलने की जानकारी पर बाजार में बढ़ी भीड़
दुकानों के खुलने की जानकारी मिलने के बाद सोमवार को बाजार में भीड़ दिखी। लोग गांव से शहरों में खरीददारी के लिए निकले तो, लेकिन उन्हें मायूस लौटना पड़ा। कारण अधिकांश दुकानें नियम के दायरे में उलझकर नहीं खुल सकीं।
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