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Siddharthnagar News: लड्डू गोपाल के आकर्षण से गुलजार रहे बाजार
Thu, 03 Sep 2026 11:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 03 Sep 2026 11:43 PM IST
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श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर शहर में पूजन सामाग्री की खरीददारी करती महिलाएं। संवाद
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सिद्धार्थनगर। जन्माष्टमी से पहले जिले के बाजारों में इस बार लड्डू गोपाल का अलग ही संसार नजर आ रहा है। नौगढ़, बांसी, शोहरतगढ़ और इटवा के बाजारों में बाल गोपाल की प्रतिमाओं के साथ झूले, सिंहासन, मुकुट, पोशाक और छोटे-छोटे पूजा बर्तनों की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है।
दुकानदारों के अनुसार पहले यह परंपरा ब्रज क्षेत्र तक सीमित मानी जाती थी लेकिन अब सिद्धार्थनगर में भी बड़ी संख्या में परिवार घर में लड्डू गोपाल की स्थापना कर रहे हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार लड्डू गोपाल भगवान श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप हैं। पंडित जनार्दन शास्त्री बताते हैं कि वृंदावन, गोकुल, नंदगांव और बरसाना में वैष्णव संप्रदाय में सदियों से बाल कृष्ण की वात्सल्य भाव से सेवा करने की परंपरा रही है। इसमें भगवान को शिशु मानकर उन्हें सुबह जगाना, स्नान कराना, नए वस्त्र पहनाना, भोग लगाना और रात में शयन कराना दैनिक पूजा का हिस्सा माना जाता है। यही परंपरा अब छोटे शहरों और कस्बों के घरों तक तेजी से पहुंच रही है।
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पंडित दिव्यांश त्रिपाठी के अनुसार लड्डू गोपाल भगवान श्रीकृष्ण को सदियों से उन्हें पुत्रवत मानकर सेवा करने की परंपरा चली आ रही है। इसे वात्सल्य भक्ति कहा जाता है, जिसमें भगवान के प्रति माता यशोदा जैसा स्नेह और पालन-पोषण का भाव प्रमुख होता है।
चार से छह इंच के गोपाल की सबसे ज्यादा मांग : बाजार में इस समय दो से 12 इंच तक की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। तेतरी बाजार के दुकानदार चंद्रशेखर गुप्ता बताते हैं कि अधिकांश श्रद्धालु चार से छह इंच की मूर्ति पसंद करते हैं क्योंकि उसके लिए पोशाक, मुकुट और झूला आसानी से मिल जाता है। घर के मंदिर में स्थापित करना भी सुविधाजनक रहता है। संगमरमर फिनिश, धातु और रेजिन की प्रतिमाओं के साथ मखमली वस्त्र और लकड़ी के सिंहासन सबसे अधिक बिक रहे हैं।
दुकानदारों का कहना है कि अब ग्राहक केवल मूर्ति नहीं खरीदते बल्कि यह भी पूछते हैं कि कितनी बार वस्त्र बदलने चाहिए, कौन-सा भोग लगाना उचित है और जन्माष्टमी की रात स्थापना कैसे की जाए।
मंदिरों में सजेगा नंद महोत्सव, आधी रात को होगी आरती : सिद्धार्थनगर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार को जिले के मंदिर नंद महोत्सव की आभा से जगमगा उठेंगे। नौगढ़, बांसी, डुमरियागंज, इटवा और शोहरतगढ़ क्षेत्र के प्रमुख राधा-कृष्ण मंदिरों में आकर्षक झांकियां सजाई गई हैं। मंदिरों में शाम से भजन-कीर्तन शुरू होगा जबकि मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव शंख, घंटा-घड़ियाल और वेद मंत्रों के बीच मनाया जाएगा।
मंदिर समितियों के अनुसार श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए दर्शन की अलग कतार, प्रसाद वितरण और पेयजल की व्यवस्था की गई है। कई मंदिरों में बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक कर नए वस्त्र, मुकुट और झूले में विराजमान होंगे।
पंडित सुधीर त्रिपाठी के अनुसार पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। इसी दौरान जन्माभिषेक, आरती और माखन-मिश्री का भोग अर्पित किया जाएगा।
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दुकानदारों के अनुसार पहले यह परंपरा ब्रज क्षेत्र तक सीमित मानी जाती थी लेकिन अब सिद्धार्थनगर में भी बड़ी संख्या में परिवार घर में लड्डू गोपाल की स्थापना कर रहे हैं।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार लड्डू गोपाल भगवान श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप हैं। पंडित जनार्दन शास्त्री बताते हैं कि वृंदावन, गोकुल, नंदगांव और बरसाना में वैष्णव संप्रदाय में सदियों से बाल कृष्ण की वात्सल्य भाव से सेवा करने की परंपरा रही है। इसमें भगवान को शिशु मानकर उन्हें सुबह जगाना, स्नान कराना, नए वस्त्र पहनाना, भोग लगाना और रात में शयन कराना दैनिक पूजा का हिस्सा माना जाता है। यही परंपरा अब छोटे शहरों और कस्बों के घरों तक तेजी से पहुंच रही है।
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पंडित दिव्यांश त्रिपाठी के अनुसार लड्डू गोपाल भगवान श्रीकृष्ण को सदियों से उन्हें पुत्रवत मानकर सेवा करने की परंपरा चली आ रही है। इसे वात्सल्य भक्ति कहा जाता है, जिसमें भगवान के प्रति माता यशोदा जैसा स्नेह और पालन-पोषण का भाव प्रमुख होता है।
चार से छह इंच के गोपाल की सबसे ज्यादा मांग : बाजार में इस समय दो से 12 इंच तक की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। तेतरी बाजार के दुकानदार चंद्रशेखर गुप्ता बताते हैं कि अधिकांश श्रद्धालु चार से छह इंच की मूर्ति पसंद करते हैं क्योंकि उसके लिए पोशाक, मुकुट और झूला आसानी से मिल जाता है। घर के मंदिर में स्थापित करना भी सुविधाजनक रहता है। संगमरमर फिनिश, धातु और रेजिन की प्रतिमाओं के साथ मखमली वस्त्र और लकड़ी के सिंहासन सबसे अधिक बिक रहे हैं।
दुकानदारों का कहना है कि अब ग्राहक केवल मूर्ति नहीं खरीदते बल्कि यह भी पूछते हैं कि कितनी बार वस्त्र बदलने चाहिए, कौन-सा भोग लगाना उचित है और जन्माष्टमी की रात स्थापना कैसे की जाए।
मंदिरों में सजेगा नंद महोत्सव, आधी रात को होगी आरती : सिद्धार्थनगर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार को जिले के मंदिर नंद महोत्सव की आभा से जगमगा उठेंगे। नौगढ़, बांसी, डुमरियागंज, इटवा और शोहरतगढ़ क्षेत्र के प्रमुख राधा-कृष्ण मंदिरों में आकर्षक झांकियां सजाई गई हैं। मंदिरों में शाम से भजन-कीर्तन शुरू होगा जबकि मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव शंख, घंटा-घड़ियाल और वेद मंत्रों के बीच मनाया जाएगा।
मंदिर समितियों के अनुसार श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए दर्शन की अलग कतार, प्रसाद वितरण और पेयजल की व्यवस्था की गई है। कई मंदिरों में बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक कर नए वस्त्र, मुकुट और झूले में विराजमान होंगे।
पंडित सुधीर त्रिपाठी के अनुसार पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। इसी दौरान जन्माभिषेक, आरती और माखन-मिश्री का भोग अर्पित किया जाएगा।