{"_id":"655e5ae099461d32560fed46","slug":"lac-of-budget-in-land-buying-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1032-8615-2023-11-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"विकास में बाधा : 56 लाख के कारण अटका 53 करोड़ से 33 एकड़ भूमि का अधिग्रहण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विकास में बाधा : 56 लाख के कारण अटका 53 करोड़ से 33 एकड़ भूमि का अधिग्रहण
Thu, 23 Nov 2023 01:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 23 Nov 2023 01:17 AM IST
विज्ञापन
फोटो-
बौद्ध स्थली कपिलवस्तु में पर्यटन विकास के लिए अधिग्रहण हो रही है 33 एकड़ भूमि
संपूर्ण भूमि खरीद नहीं होने से रुका विकास कार्य, डीएम ने शेष राशि के
लिए भेजा पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पर्यटन सुविधाओं के लिए बौद्ध स्थली कपिलवस्तु में
खरीदी जा रही 33 एकड़ भूमि के लिए शासन से मिली धनराशि में
56,42,460 रुपये कम पड़ने से संपूर्ण भूमि की खरीद नहीं हो सकी है। इससे यहां
संपूर्ण भूमि में बनने वाली कार्ययोजना तीन माह से अधर में है। डीएम पवन
अग्रवाल ने एक माह पहले प्रमुख सचिव पर्यटन को शेष धनराशि अवमुक्त करने के लिए पत्र भेजा है। धनराशि अभी आवंटित नहीं हो सकी है।
महात्मा बुद्ध की स्थली कपिलवस्तु में पर्यटन सुविधाएं विकसित करने के
लिए पर्यटन विभाग ने आसपास के किसानों से 33 एकड़ (13.317 हेक्टेयर) भूमि
खरीद शुरू कर दी है। इसके लिए 53,76,88,460 रुपये की जरूरत थी। इसके
सापेक्ष शासन से 5320.46 लाख रुपये आवंटित हो चुके हैं। इसमें 5307.95
लाख रुपये से 26 किसानों से 13.181 हेक्टेयर भूमि खरीदी जा चुकी है। दो गाटा की 0.136 हेक्टेयर भूमि खरीदी जानी बाकी है।
तीन माह से इस शेष भूमि की खरीद नहीं होने से संपूर्ण भूमि के लिए बनी
पर्यटन विकास की कार्ययोजना का प्रस्ताव नहीं भेजा जा सका है। विकास
कार्य कराने में आ रहे अवरोध को दूर करने के लिए डीएम पवन अग्रवाल ने 25
अक्तूबर 2023 को प्रमुख सचिव पर्यटन को पत्र भेजकर अवशेष भूमि की खरीद के लिए 56,42,460 रुपये अवमुक्त करने के लिए कहा है।
भूमि रजिस्ट्री शुल्क की घटी धनराशि
किसानों से 33 एकड़ भूमि खरीद के लिए प्रशासकीय स्वीकृति 5320.46 लाख
रुपये की थी। इसके अतिरिक्त लिपिकीय व्यय और पंजीयन शुल्क पर 56,42,460
रुपये खर्च होने थे। भूमि खरीद के लिए प्रशासकीय स्वीकृति की धनराशि तो
शासन से आवंटित हो गई, लेकिन लिपिकीय व्यय और पंजीयन शुल्क की धनराशि नहीं मिली। इससे प्रशासकीय स्वीकृति की धनराशि में से ही अब तक लिपिकीय व्यय और पंजीयन शुल्क पर खर्च किया गया। इस तरह शेष किसानों से दो गाटों की 0.136 हेक्टेयर भूमि की खरीद अटक गई है।
यहां प्रस्तावित हैं ये सुविधाएं
कपिलवस्तु में बौद्ध स्तूप के सामने अधिग्रहीत की जा रही 33 एकड़ भूमि
में पर्यटकों को ठहरने की सुविधा के लिए होटल और अन्य दर्शनीय स्थल
विकसित करने की योजना है। पर्यटन विभाग की तरफ से यहां नेपाल के लुंबिनी
की तर्ज पर बौद्ध धर्मावलंबी देशों को धर्मशाला आदि बनवाने के लिए भूमि
उपलब्ध कराने की भी योजना है।
क्रय भूमि पर्यटन विभाग के नाम होगी दर्ज
पर्यटन विभाग के निदेशक प्रखर मिश्र ने 26 अक्तूबर को जिले के क्षेत्रीय
पर्यटन अधिकारी को पत्र भेजकर कपिलवस्तु में किसानों से अब तक क्रय की
भूमि को राजस्व अभिलेख में पर्यटन विभाग के नाम से दर्ज कराने के लिए कहा
है। उन्होंने कहा है कि संबंधित तहसीलदार से नियत प्रारूप पर आवेदन कर
क्रय भूमि का नामांतरण कर राजस्व अभिलेख में पर्यटन विभाग की संपत्ति के
रूप में दर्ज कराएं।
विज्ञापन
बौद्ध स्थली कपिलवस्तु में पर्यटन विकास के लिए अधिग्रहण हो रही है 33 एकड़ भूमि
संपूर्ण भूमि खरीद नहीं होने से रुका विकास कार्य, डीएम ने शेष राशि के
लिए भेजा पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पर्यटन सुविधाओं के लिए बौद्ध स्थली कपिलवस्तु में
खरीदी जा रही 33 एकड़ भूमि के लिए शासन से मिली धनराशि में
56,42,460 रुपये कम पड़ने से संपूर्ण भूमि की खरीद नहीं हो सकी है। इससे यहां
संपूर्ण भूमि में बनने वाली कार्ययोजना तीन माह से अधर में है। डीएम पवन
अग्रवाल ने एक माह पहले प्रमुख सचिव पर्यटन को शेष धनराशि अवमुक्त करने के लिए पत्र भेजा है। धनराशि अभी आवंटित नहीं हो सकी है।
महात्मा बुद्ध की स्थली कपिलवस्तु में पर्यटन सुविधाएं विकसित करने के
लिए पर्यटन विभाग ने आसपास के किसानों से 33 एकड़ (13.317 हेक्टेयर) भूमि
खरीद शुरू कर दी है। इसके लिए 53,76,88,460 रुपये की जरूरत थी। इसके
सापेक्ष शासन से 5320.46 लाख रुपये आवंटित हो चुके हैं। इसमें 5307.95
लाख रुपये से 26 किसानों से 13.181 हेक्टेयर भूमि खरीदी जा चुकी है। दो गाटा की 0.136 हेक्टेयर भूमि खरीदी जानी बाकी है।
तीन माह से इस शेष भूमि की खरीद नहीं होने से संपूर्ण भूमि के लिए बनी
पर्यटन विकास की कार्ययोजना का प्रस्ताव नहीं भेजा जा सका है। विकास
कार्य कराने में आ रहे अवरोध को दूर करने के लिए डीएम पवन अग्रवाल ने 25
अक्तूबर 2023 को प्रमुख सचिव पर्यटन को पत्र भेजकर अवशेष भूमि की खरीद के लिए 56,42,460 रुपये अवमुक्त करने के लिए कहा है।
भूमि रजिस्ट्री शुल्क की घटी धनराशि
किसानों से 33 एकड़ भूमि खरीद के लिए प्रशासकीय स्वीकृति 5320.46 लाख
रुपये की थी। इसके अतिरिक्त लिपिकीय व्यय और पंजीयन शुल्क पर 56,42,460
रुपये खर्च होने थे। भूमि खरीद के लिए प्रशासकीय स्वीकृति की धनराशि तो
शासन से आवंटित हो गई, लेकिन लिपिकीय व्यय और पंजीयन शुल्क की धनराशि नहीं मिली। इससे प्रशासकीय स्वीकृति की धनराशि में से ही अब तक लिपिकीय व्यय और पंजीयन शुल्क पर खर्च किया गया। इस तरह शेष किसानों से दो गाटों की 0.136 हेक्टेयर भूमि की खरीद अटक गई है।
यहां प्रस्तावित हैं ये सुविधाएं
कपिलवस्तु में बौद्ध स्तूप के सामने अधिग्रहीत की जा रही 33 एकड़ भूमि
में पर्यटकों को ठहरने की सुविधा के लिए होटल और अन्य दर्शनीय स्थल
विकसित करने की योजना है। पर्यटन विभाग की तरफ से यहां नेपाल के लुंबिनी
की तर्ज पर बौद्ध धर्मावलंबी देशों को धर्मशाला आदि बनवाने के लिए भूमि
उपलब्ध कराने की भी योजना है।
क्रय भूमि पर्यटन विभाग के नाम होगी दर्ज
पर्यटन विभाग के निदेशक प्रखर मिश्र ने 26 अक्तूबर को जिले के क्षेत्रीय
पर्यटन अधिकारी को पत्र भेजकर कपिलवस्तु में किसानों से अब तक क्रय की
भूमि को राजस्व अभिलेख में पर्यटन विभाग के नाम से दर्ज कराने के लिए कहा
है। उन्होंने कहा है कि संबंधित तहसीलदार से नियत प्रारूप पर आवेदन कर
क्रय भूमि का नामांतरण कर राजस्व अभिलेख में पर्यटन विभाग की संपत्ति के
रूप में दर्ज कराएं।