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Siddharthnagar News: सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में नहीं बन पाई प्रयोगशाला, वर्चुअल माध्यम से हो रहा विज्ञान का प्रैक्टिकल
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में निर्माणाधीन विज्ञान भवन। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में नहीं बन पाई प्रयोगशाला, वर्चुअल माध्यम से हो रहा विज्ञान का प्रैक्टिकल
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में विज्ञान के छात्र-छात्राएं वर्चुअल माध्यम से प्रैक्टिकल कर रहे हैं, जबकि उनको दूसरे महाविद्यालयों की प्रयोगशालाओं में भ्रमण कराने की योजना है। ऐसी स्थिति इसलिए आई है कि विश्वविद्यालय परिसर में विज्ञान भवन अधूरा है और विज्ञान संकाय की कक्षाएं वाणिज्य संकाय में संचालित हो रही हैं।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में एमएएसी में पहली बार प्रवेश हुआ है। प्रवेश के दौरान संभावना थी कि तीन माह में ही विज्ञान भवन बन जाएगा, लेकिन छह माह बाद बन नहीं पाया। प्रैक्टिकल नहीं होने से विज्ञान के छात्र-छात्राओं को असुविधा हो रही है। विज्ञान संकाय के सात विषयों में 90 छात्र-छात्राओं ने ही परीक्षा दी है, जबकि प्रवेश के दौरान छात्र संख्या करीब 120 थी।
विज्ञान शिक्षकों की नियुक्ति के बाद बॉयोटेक्नोलॉजी, फिजिक्स, मैथ, केमिस्ट्री, बॉटनी, जूलॉजी व होम साइंस में प्रवेश दिया गया है। हालांकि, विज्ञान संकाय में प्रयोग के लिए कुछ उपकरण भी मंगाए गए हैं। विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. देवेश कुमार ने बताया कि विज्ञान संकाय में वर्चुअल माध्यम से प्रयोग कराया जा रहा है। कंप्यूटर से संबंधित प्रयोग में कोई समस्या नहीं है। भवन बनने के बाद विधिवत प्रयोगशाला बनाई जाएगा।
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विज्ञान संकाय भवन के लिए पांच करोड़ रुपये प्राप्त हो गए हैं। डेढ़ माह में भवन बनकर तैयार हो जाएगा। उसके बाद प्रयोगशाला बनाई जाएगी। कार्य तेजी से कराया जा रहा है। -अमरेंद्र कुमार सिंह, कुलसचिव, सिविवि
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में विज्ञान के छात्र-छात्राएं वर्चुअल माध्यम से प्रैक्टिकल कर रहे हैं, जबकि उनको दूसरे महाविद्यालयों की प्रयोगशालाओं में भ्रमण कराने की योजना है। ऐसी स्थिति इसलिए आई है कि विश्वविद्यालय परिसर में विज्ञान भवन अधूरा है और विज्ञान संकाय की कक्षाएं वाणिज्य संकाय में संचालित हो रही हैं।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में एमएएसी में पहली बार प्रवेश हुआ है। प्रवेश के दौरान संभावना थी कि तीन माह में ही विज्ञान भवन बन जाएगा, लेकिन छह माह बाद बन नहीं पाया। प्रैक्टिकल नहीं होने से विज्ञान के छात्र-छात्राओं को असुविधा हो रही है। विज्ञान संकाय के सात विषयों में 90 छात्र-छात्राओं ने ही परीक्षा दी है, जबकि प्रवेश के दौरान छात्र संख्या करीब 120 थी।
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विज्ञान शिक्षकों की नियुक्ति के बाद बॉयोटेक्नोलॉजी, फिजिक्स, मैथ, केमिस्ट्री, बॉटनी, जूलॉजी व होम साइंस में प्रवेश दिया गया है। हालांकि, विज्ञान संकाय में प्रयोग के लिए कुछ उपकरण भी मंगाए गए हैं। विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. देवेश कुमार ने बताया कि विज्ञान संकाय में वर्चुअल माध्यम से प्रयोग कराया जा रहा है। कंप्यूटर से संबंधित प्रयोग में कोई समस्या नहीं है। भवन बनने के बाद विधिवत प्रयोगशाला बनाई जाएगा।
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विज्ञान संकाय भवन के लिए पांच करोड़ रुपये प्राप्त हो गए हैं। डेढ़ माह में भवन बनकर तैयार हो जाएगा। उसके बाद प्रयोगशाला बनाई जाएगी। कार्य तेजी से कराया जा रहा है। -अमरेंद्र कुमार सिंह, कुलसचिव, सिविवि