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कर्बला से मिलता है जुल्म से लड़ने का हौसला : मौलाना
Sun, 30 Jul 2023 10:54 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 30 Jul 2023 10:54 PM IST
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डुमरियागंज क्षेत्र के हटवा में मजलिस को संबोधित करते मौलाना किरतास करबलाई।
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम हटवा बुजुर्ग के इमाम बारगाह जांबाज हुसैन में रविवार को मोहर्रम की ग्यारहवीं के मौके पर मरसिया मजलिस आयोजित की गई। मौलाना किरतास ने कर्बला के मैदान में शहीद हुए इमाम हुसैन के साथ 71 साथियों की शहादत को बयां किया। जिसे सुनकर अकीदत मंद रो पड़े।
लखनऊ से आए मौलाना किरतास ने कहा कि अली नमाज है और हम सब नमाजी है। मजलिस में आने से होता है शिक्षा का ज्ञान कर्बला दुनिया को हक, सच्चाई और इंसाफ का पैगाम देता है। हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में नाना के दीन को बचाने के लिए जो महत्वपूर्ण कुर्बानियां दी है। उससे पूरी दुनिया को यह संदेश मिलता है कि कभी भी जालिम के आगे सिर नहीं झुकाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन व उनके इक्हतर साथियों ने कर्बला में अपने को तथा अपने घर वालों की भूखे प्यासे शहादत दे कर ये साबित कर दिया। कि सच्चाई को कोई झुका नहीं सकता सामने वाला चाहे जितना ताकत वर हो सच्चे लोगों का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उन्होंने कहा कि आज भी सभी को कर्बला के इतिहास से जुल्म से लड़ने का हौसला मिलता है। हुसैन ने कर्बला में हिंदुस्तान को याद किया था। और हिंदुस्तान आने की इच्छा ज़ाहिर की थी। मजलिस के आखिर में मौलाना ने हजऱत अली की बेटी जनाबे जैनब का मसायब बया किया। जिसे सुनकर अकीदतमंदों के आंसू छलक पड़े। अंत में मजलिस आयोजक सरफऱाज़ रिज़्वी ने मजलिस में आए हुए अकीदतमंदों का शुक्रिया अदा किया।
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लखनऊ से आए मौलाना किरतास ने कहा कि अली नमाज है और हम सब नमाजी है। मजलिस में आने से होता है शिक्षा का ज्ञान कर्बला दुनिया को हक, सच्चाई और इंसाफ का पैगाम देता है। हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में नाना के दीन को बचाने के लिए जो महत्वपूर्ण कुर्बानियां दी है। उससे पूरी दुनिया को यह संदेश मिलता है कि कभी भी जालिम के आगे सिर नहीं झुकाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन व उनके इक्हतर साथियों ने कर्बला में अपने को तथा अपने घर वालों की भूखे प्यासे शहादत दे कर ये साबित कर दिया। कि सच्चाई को कोई झुका नहीं सकता सामने वाला चाहे जितना ताकत वर हो सच्चे लोगों का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उन्होंने कहा कि आज भी सभी को कर्बला के इतिहास से जुल्म से लड़ने का हौसला मिलता है। हुसैन ने कर्बला में हिंदुस्तान को याद किया था। और हिंदुस्तान आने की इच्छा ज़ाहिर की थी। मजलिस के आखिर में मौलाना ने हजऱत अली की बेटी जनाबे जैनब का मसायब बया किया। जिसे सुनकर अकीदतमंदों के आंसू छलक पड़े। अंत में मजलिस आयोजक सरफऱाज़ रिज़्वी ने मजलिस में आए हुए अकीदतमंदों का शुक्रिया अदा किया।
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